भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: रक्षा से श्रमिक गतिशीलता तक, $136 अरब व्यापार का नया दौर

पीएम मोदी की मेजबानी में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता, $136 अरब व्यापार का नया दौर

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता ऐतिहासिक सौदा साबित होने जा रहा है। यह समझौता दोनों पक्षों के बीच व्यापक संबंधों को मजबूत करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच यह एक नई दिशा प्रदान करेगा।

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता के प्रमुख बिंदु

यह समझौता व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित होगा। दोनों पक्ष रक्षा ढांचा समझौता और रणनीतिक एजेंडा भी जारी करेंगे। यूरोप अमेरिका और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत के साथ गहरे संबंध चाहता है।

पीएम मोदी की मेजबानी में ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी करेंगे। ये नेता 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में राजपथ पर रहे। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता 2 अरब लोगों का बाजार बनेगा, जो वैश्विक जीडीपी का एक चौथाई होगा। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं। प्रस्तावित सुरक्षा और रक्षा साझेदारी (एसडीपी) रक्षा सहयोग को गहरा करेगी। यह भारतीय कंपनियों को ईयू के 150 अरब यूरो के SAFE कार्यक्रम में भागीदारी का मौका देगी, जो सदस्य देशों की रक्षा तैयारी तेज करेगा।

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श्रमिक गतिशीलता और व्यापार संबंधों में नया आयाम

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता की वार्ता 2007 में शुरू हुई थी, जो 2013 में महत्वाकांक्षा के अंतर से रुकी। जून 2022 में इसे पुनः शुरू किया गया। शिखर सम्मेलन में भारतीय श्रमिकों की यूरोप गतिशीलता पर समझौता होगा। फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देश पहले से भारत के साथ साझेदारी रखते हैं।रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों पक्ष स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था चाहते हैं। पिछले वर्षों में संबंध मजबूत हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में ईयू के साथ भारत का माल व्यापार $136 अरब रहा, जिसमें निर्यात $76 अरब और आयात $60 अरब थे। ईयू भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

यह भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता द्विपक्षीय संबंधों में गुणात्मक बदलाव लाएगा। यह रक्षा से लेकर श्रमिक गतिशीलता तक सभी क्षेत्रों को प्रभावित करेगा।

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