महिला आरक्षण बिल: लोकसभा सीटें 543 से 816, विपक्ष ने रोकी 33% नारी शक्ति

पीएम मोदी का राष्ट्र को संबोधन: महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का विरोध

महिला आरक्षण बिल का भ्रूण हत्या: पीएम मोदी का विपक्ष पर तीखा प्रहार

महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर भ्रूण हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। संविधान (131वें संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में विपक्ष के एकजुट विरोध के कारण पारित नहीं किया जा सका। शनिवार रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह विधेयक राज्यों को समान आवाज देने का ईमानदार प्रयास था। छोटे-बड़े राज्यों, अधिक या कम आबादी वाले क्षेत्रों को समान शक्ति देने का लक्ष्य था, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इसके भ्रूण हत्या कर दी।

पीएम मोदी ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कढ़गम को निशाना बनाते हुए कहा कि ये दल संविधान और नारी शक्ति के अपराधी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को महिला आरक्षण से नफरत है। देश की महिलाएं कांग्रेस और उसके सहयोगियों को करारा जवाब देंगी। पीएम ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया कि कांग्रेस ने हमेशा जरूरी सुधारों पर झूठ फैलाया और उन्हें लटकाया।

लोकसभा में वोटिंग और विधेयक की मुख्य विशेषताएं

महिला आरक्षण बिल के तहत लोकसभा की सीटें वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होता। राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों में भी सीटें बढ़ाई जानी थीं। विधेयक पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था, लेकिन भाजपा नीत गठबंधन को संख्या नहीं जुटा सकी। शुक्रवार रात लोकसभा में 528 सदस्यों ने वोटिंग की, जिसमें 298 ने समर्थन दिया और 230 ने विरोध। दो-तिहाई के लिए 352 वोट चाहिए थे।

विपक्षी दलों ने कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन बिल का विरोध कर रहे थे। उन्होंने मौजूदा सीटों पर ही महिला आरक्षण लागू करने की मांग की। विधेयक हारने के बाद सरकार ने परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल आगे नहीं बढ़ाए। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार को 66 प्रतिशत वोट न मिले, लेकिन महिलाओं का समर्थन है। हमारा संघर्ष जारी रहेगा और यह वचन पूरा होगा।

विपक्ष का जवाब और राजनीतिक पृष्ठभूमि

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि सब पूर्वनियोजित था। बंगाल और तमिलनाडु चुनाव को ध्यान में रखकर बिल लाया गया। अगर सरकार गंभीर है तो 2023 से ही लागू क्यों नहीं किया? हम समर्थन के लिए तैयार हैं। उन्होंने पीएम मोदी के लंबे कार्यकाल का जिक्र किया और महिला प्रधानमंत्री का स्वागत करने की बात कही। लोकसभा ने संविधान संशोधन बिल, परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेश विधेयक पर बहस के बाद वोटिंग की। सभी राज्यों के लिए अनुपातिक सीट वृद्धि का प्रावधान था।

यह घटना महिला आरक्षण बिल की दिशा में महत्वपूर्ण मोड़ है। पीएम मोदी का संबोधन राष्ट्र में बहस छेड़ चुका है। सरकार का दावा है कि यह समानता का प्रयास था, जबकि विपक्ष इसे चुनावी स्टंट बता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और चर्चा होगी।

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