महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी का मां-बहन-बेटी सेअपील, विपक्ष की आपत्तियां बरकरार

महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी की भावुक अपील, संसद सत्र

महिला आरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में भावुक अपील की है। उन्होंने सदस्यों से मां, बहन, बेटी और पत्नी को याद कर इस बिल के पक्ष में वोट करने को कहा। यह अपील लोकसभा में चल रही बहस के बीच आई, जहां विपक्ष ने महिला आरक्षण को परिसीमन का धोखा बताया।

पीएम मोदी की भावुक अपील: महिला आरक्षण का समय आ गया

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा, “चार दशकों से देश में महिला आरक्षण पर राजनीति होती रही। अब समय आ गया है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार मिलें।” उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वतंत्रता के इतने दशकों बाद भी महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में न्यूनतम प्रतिनिधित्व ठीक नहीं। “देश की करोड़ों महिलाओं की नजर हम पर, हमारे इरादों पर है। कृपया संवेदनशीलता से फैसला लें और महिला आरक्षण के पक्ष में वोट दें।”

एक अन्य पोस्ट में पीएम ने कहा, “संसद सदस्यों से निवेदन है- अपनी मां, बहन, बेटी, पत्नी को याद करें। अंतर्मन की आवाज सुनें। यह देश की नारी शक्ति को सेवा का सुनहरा अवसर है। उन्हें नई संभावनाओं से वंचित न करें।” 2023 में संसद से पारित मूल बिल अगली जनगणना और परिसीमन से जुड़ा था। अब सरकार इस शर्त को हटाना चाहती है, जिससे दक्षिणी राज्य चिंतित हैं।

विपक्ष की मुख्य आपत्तियां

कांग्रेस समेत विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण को ढाल बनाकर पक्षपाती परिसीमन थोपा जा रहा। दक्षिणी राज्यों के नेता, खासकर केरल के सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में कहा, “यह नोटबंदी जैसी जल्दबाजी है, जो देश को नुकसान पहुंचाएगी। परिसीमन राजनीतिक नोटबंदी साबित होगा।” थरूर ने चेतावनी दी कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से कर्नाटक, केरल जैसे राज्यों की सीटें घटेंगी, जबकि यूपी-बिहार जैसे हिंदी पट्टी वाले राज्य हावी हो जाएंगे।

कानून बनाम गृह मंत्री का दावा

गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया कि कुल सीटें 50% बढ़ेंगी, जिससे अनुपात वही रहेगा। लेकिन थरूर ने सवाल उठाया, “यह कहां लिखा है? विधेयक में परिसीमन आयोग को पूर्ण स्वतंत्रता है, जिसके फैसले अदालत में चुनौती नहीं दिए जा सकते। यह राजनीतिक आश्वासन है, कानूनी निश्चितता नहीं।” एनडीए सरकार को बिल पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए, जो उसके पास नहीं। पीएम मोदी ने भ्रम दूर करने का दावा किया, लेकिन बहस जारी है।

यह विवाद लोकतंत्र की मजबूती और क्षेत्रीय संतुलन पर केंद्रित है। दक्षिणी राज्य अपनी जनसंख्या नियंत्रण नीतियों के बावजूद नुकसान से डर रहे। सरकार 50% वृद्धि का आश्वासन दे रही, लेकिन विपक्ष लिखित गारंटी मांग रहा। महिला आरक्षण का सपना साकार होगा या राजनीतिक विवाद में उलझेगा, यह आने वाले दिन बताएंगे।

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