यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम हटे, अब 12.55 करोड़ मतदाता दर्ज
यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए
यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने 2.89 करोड़ नाम हटाकर मतदाताओं की सूची को नए सिरे से व्यवस्थित किया है।
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत गणना चरण पूरा होने के बाद नई ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की है, जिसे यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2026 के रूप में प्रकाशित किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पुनरीक्षण से पहले राज्य की मतदाता सूची में कुल 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने के बाद अब यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम दर्ज रह गए हैं।चुनाव आयोग का कहना है कि इस कदम से मतदाता सूची अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटि रहित बनेगी, ताकि आगामी चुनावों में केवल वैध और योग्य मतदाता ही शामिल हो सकें।
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18.7 प्रतिशत तक घट गई मतदाता सूची
आंकड़ों के अनुसार, यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पिछले आंकड़ों की तुलना में लगभग 18.7 प्रतिशत घट गई है, यानी हर पांच में से लगभग एक मतदाता का नाम सूची से बाहर हो गया है।चुनाव आयोग के बयान के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची में दर्ज 15,44,30,092 मतदाताओं में से 12,55,56,025 मतदाताओं ने गणना अवधि के दौरान अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए, जो SIR के पहले चरण में व्यापक भागीदारी को दर्शाता है।उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि यह पुनरीक्षण मतदान अधिकार से संबंधित आंकड़ों को साफ करने और सूची में मौजूद दोहराव तथा निष्क्रिय प्रविष्टियों को हटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में किसी भी नाम को पर्याप्त जांच और प्रक्रिया के बिना नहीं हटाया गया है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
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किस आधार पर हटाए गए 2.89 करोड़ नाम
चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनमें से लगभग 46.23 लाख मतदाता ऐसे हैं जो अब इस दुनिया में नहीं रहे और उन्हें मृत श्रेणी में चिह्नित किया गया।इसके अलावा, करीब 2.17 करोड़ मतदाता ऐसे पाए गए जो अपने पते से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके थे, जबकि लगभग 25.46 लाख नाम डुप्लीकेट प्रविष्टियां थीं, जिन्हें सूची से हटाकर रिकॉर्ड को साफ किया गया। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को तैयार करते समय मृत, स्थानांतरित और दोहराए गए मतदाताओं को चिह्नित कर व्यवस्थित तरीके से हटाया गया, ताकि अनावश्यक और गलत प्रविष्टियों को समाप्त किया जा सके।चुनाव आयोग के अनुसार, इस प्रकार के व्यापक सत्यापन से मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ती है और भविष्य में मतदान प्रक्रिया के दौरान फर्जी मतदान या तकनीकी त्रुटियों की संभावनाएं कम होती हैं।
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सूची से नाम हटाने के साथ ही आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक मतदाता को अपने पंजीकरण की स्थिति जानने और आवश्यक होने पर सुधार कराने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि राज्य स्तर पर की गई यह कवायद देश में अब तक के सबसे बड़े मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियानों में से एक है।विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर नाम हटाए जाने के बाद भी, यदि दावा–आपत्ति अवधि में वास्तविक पात्र मतदाता पुनः जुड़ जाते हैं, तो मतदाता सूची और अधिक संतुलित तथा प्रतिनिधिक स्वरूप में सामने आएगी। चुनाव आयोग की यह पहल न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को भी मजबूत करती है। आयोग का अनुमान है कि स्वच्छ और अद्यतन यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के आधार पर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए बेहतर योजना और संसाधन प्रबंधन संभव होगा। मौजूदा ड्राफ्ट सूची में किए गए संशोधनों के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने पर वास्तविक मतदाताओं की संख्या का अधिक स्पष्ट और सटीक चित्र सामने आएगा।
यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में किए गए व्यापक सुधारों को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि अन्य राज्यों को भी इस मॉडल से सीख लेकर अपनी मतदाता सूचियों को और अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। कुल मिलाकर, विशेष गहन पुनरीक्षण के परिणामस्वरूप तैयार हुई यह नई यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट राज्य में पारदर्शी और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम पड़ाव के रूप में देखी जा रही है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस पुनरीक्षित सूची के माध्यम से मतदाता पहचान, पते और पंजीकरण से जुड़ी मूलभूत जानकारी को अद्यतन कर भविष्य के चुनावों के लिए व्यवस्थित आधार तैयार किया गया है।
आयोग ने यह भी दोहराया कि यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में किसी भी नाम की प्रविष्टि या विलोपन पूरी प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों और प्रावधानों के अनुरूप ही किया गया है। चुनाव आयोग के अधिकारी मानते हैं कि इस तरह के नियमित विशेष गहन पुनरीक्षण से मतदाता सूची में समय–समय पर आवश्यक सुधार होते रहते हैं और लोकतांत्रिक ढांचे की नींव और अधिक मजबूत बनती है।साथ ही, इस प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं को भी अपने रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित करने और यदि आवश्यक हो तो उसमें सुधार करवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। आयोग की ओर से यह भी बताया गया है कि यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विवरण और दिशानिर्देश ऑनलाइन माध्यम से सुलभ कराए गए हैं, जिससे अधिक से अधिक मतदाता डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी स्थिति की जांच कर सकें। यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के इस बड़े पुनरीक्षण अभियान ने यह संदेश भी दिया है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी सटीकता को लेकर आयोग गंभीर और प्रतिबद्ध है।
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राज्य के राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि अद्यतन और साफ मतदाता सूची के आधार पर आगामी चुनावों में वास्तविक मतदाताओं की भागीदारी और चुनावी निष्पक्षता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।चुनाव आयोग का यह भी मानना है कि यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को समय पर दुरुस्त करने से मतदान केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ और नाम न मिलने की शिकायतों में कमी आएगी, जिससे मतदाताओं का अनुभव बेहतर हो सकेगा। इस व्यापक पुनरीक्षण के बाद अपेक्षा की जा रही है कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट और अधिक सटीक हो जाएगी और सभी पात्र मतदाता अपने मतदान अधिकार का सुचारु रूप से प्रयोग कर सकेंगे।
चुनाव आयोग की इस पहल के माध्यम से यह भी प्रयास किया जा रहा है कि मतदाता पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक–आधारित हों, जिससे आम नागरिकों का लोकतांत्रिक प्रणाली पर भरोसा और मजबूत हो। कुल मिलाकर, यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.89 करोड़ नाम हटाए जाने और 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखे जाने की प्रक्रिया राज्य में स्वच्छ, अद्यतन और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम के रूप में सामने आई है। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे जारी की गई यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को ध्यान से देखें और यदि किसी प्रकार की त्रुटि या कमी हो तो निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक सुधार के लिए आवेदन अवश्य करें।आयोग के अनुसार, जागरूक मतदाता, अद्यतन रिकॉर्ड और पारदर्शी प्रक्रिया ही मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद हैं, और यूपी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का यह पुनरीक्षण उसी दिशा में एक सशक्त प्रयास है।

