भारत-यूके साझेदारी वैश्विक स्थिरता की कुंजी, व्यापार और रक्षा में अहम समझौते
भारत-यूके साझेदारी वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम बन गई है। प्रधानमंत्री ने गुरुवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के बाद कहा कि दोनों देशों की साझेदारी लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है। यह रणनीतिक गठजोड़ दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए एक मजबूत स्तंभ साबित होगा।
भारत-यूके साझेदारी वैश्विक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर बुधवार को 126 सदस्यीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुंबई पहुंचे। इस दो दिवसीय यात्रा का उद्देश्य निवेश और व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा देना है। तीन महीने पहले भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौते (CETA) पर सहमति बनी थी, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नया आयाम मिला है।
दोनों नेताओं ने वैश्विक स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते की सराहना की, जो टैरिफ कम करेगा, बाजारों तक पहुंच बढ़ाएगा, व्यापार को गति देगा, रोजगार सृजित करेगा और दोनों देशों के उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाएगा।
रक्षा और तकनीकी सहयोग में नई पहल
बातचीत के दौरान भारत-यूके साझेदारी के तहत टेलीकॉम, महत्वपूर्ण खनिज, एआई और हेल्थ टेक में सहयोग बढ़ाने की पहल की गई। साथ ही हल्के मल्टीरोल मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति पर सहमति बनी, जिससे भारत की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा भारतीय वायु सेना के प्रशिक्षकों को रॉयल एयर फोर्स के साथ इंटीग्रेट करने की योजना भी बनी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत और यूके स्वाभाविक साझेदार हैं। हमारी साझेदारी भरोसे, प्रतिभा और तकनीक पर आधारित है।” स्टार्मर ने भारत की विकास यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर आधुनिक भविष्य का निर्माण करेंगे। उन्होंने भारत के “विकसित भारत 2047” दृष्टिकोण में साझेदारी का वादा किया।
उच्च शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी हुई चर्चा
दोनों देशों ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। ब्रिटेन की नौ प्रमुख यूनिवर्सिटियों ने भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी पाई है। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और रक्षा सहयोग को गहराई देने पर भी सहमति बनी।
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की और इस पर जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर संयुक्त कार्रवाई का आह्वान किया। साथ ही यूक्रेन संघर्ष और गाजा में शांति बहाल करने के प्रयासों को समर्थन देने की बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाली के प्रयासों का समर्थन करता है। वहीं स्टार्मर ने गाजा में शांति योजना के पहले चरण के समझौते का स्वागत किया और तुरंत मानवीय सहायता की बाधाएं हटाने पर जोर दिया।
भारत-यूके साझेदारी व्यापार, रक्षा, तकनीक और शिक्षा में सहयोग के साथ वैश्विक शांति और स्थिरता में नई दिशा प्रदान करेगी।
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