वेनेज़ुएला संकट पर भारत की चिंता: एस जयशंकर ने लोगों की सुरक्षा पर दिया जोर

वेनेज़ुएला संकट पर एस जयशंकर की प्रतिक्रिया

वेनेज़ुएला संकट पर भारत की चिंता और एस जयशंकर की अपील

भारत ने वेनेज़ुएला संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है और स्पष्ट किया है कि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम मुद्दा वहां के लोगों की सुरक्षा और भलाई है।  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वेनेज़ुएला संकट को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत के रास्ते पर लौटें और ऐसा समाधान निकालें जो आम नागरिकों के हित में हो। लक्समबर्ग में एक कार्यक्रम के दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में एस जयशंकर ने कहा कि भारत वेनेज़ुएला संकट के हालिया घटनाक्रम से चिंतित है, लेकिन साथ ही उम्मीद करता है कि सभी पक्ष अब बैठकर स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। उन्होंने दोहराया कि भारत की प्राथमिक चिंता यह है कि वेनेज़ुएला के लोग इस संकट से सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलें, क्योंकि भारत और वेनेज़ुएला के बीच कई वर्षों से घनिष्ठ और सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं।


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निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और बढ़ता वेनेज़ुएला संकट

वेनेज़ुएला संकट की पृष्ठभूमि उस समय बनी जब 3 जनवरी को कराकस में अचानक हुए सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेज़ुएला के पदच्युत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया।  रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी डेल्टा फोर्स के कमांडो मादुरो और उनकी पत्नी सिसीलिया फ्लोरेस को उनके शयनकक्ष से गिरफ्तार कर विशेष विमान के जरिए न्यूयॉर्क ले गए, जहां उन्हें बाद में संघीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल में भेज दिया गया।
निकोलस मादुरो के खिलाफ लंबे समय से ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज़्म से जुड़े गंभीर आरोप लगाए जाते रहे हैं और अमेरिकी प्रशासन ने उन पर सत्ता छोड़ने के लिए लगातार दबाव बढ़ाया था।  कई महीनों से चल रही चेतावनियों और सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बाद यह ऑपरेशन वेनेज़ुएला संकट को वैश्विक सुर्खियों में ले आया, जिससे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र की राजनीतिक स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित प्रभावों को लेकर भी सवाल उठने लगे।


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अमेरिकी अदालत में मादुरो की पेशी और राजनीतिक निष्कर्ष

गिरफ्तारी के तुरंत बाद निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को ब्रुकलिन की जेल में रखा गया और फिर उन्हें मैनहैटन की संघीय अदालत में पेश किया गया, जहां मादुरो ने सभी ड्रग तस्करी और संघीय आरोपों से खुद को निर्दोष बताते हुए दोषी न मानने की दलील दी।  अदालत में उन्होंने स्पेनिश भाषा में स्वयं को अपने देश का राष्ट्रपति बताते हुए कहा कि वह निर्दोष, निष्पाप और एक सम्मानित व्यक्ति हैं, जबकि उनके समर्थक इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हैं।
अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 17 मार्च तय की है, जिसके दौरान मादुरो के खिलाफ पेश सबूतों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर आगे सुनवाई होगी।  इस बीच, वेनेज़ुएला संकट केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित न रहकर वहां की आंतरिक राजनीति, सत्ता संरचना और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है, जिस पर भारत जैसे देशों की कड़ी नजर बनी हुई है। वेनेज़ुएला के भीतर सत्ता शून्य की स्थिति से निपटने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में दायित्व संभालने का आदेश दिया। अदालत के औपचारिक आदेश के अनुसार, डेल्सी रोड्रिगेज को तुरंत प्रभाव से राष्ट्रपति पद से संबंधित सभी अधिकार, कर्तव्य और जिम्मेदारियां संभालनी होंगी, ताकि वेनेज़ुएला संकट के बीच शासन की निरंतरता और संवैधानिक व्यवस्था बनी रहे।


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सुप्रीम कोर्ट की इस आदेश के बाद डेल्सी रोड्रिगेज पर अब यह जिम्मेदारी आ गई है कि वह घरेलू हालात को स्थिर करने, आर्थिक चुनौतियों से निपटने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ संवाद बनाए रखने के लिए प्रभावी निर्णय लें।  दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह संकेत दिया गया है कि संक्रमण काल में वे वेनेज़ुएला में स्थिरता और सुचारू राजनीतिक संक्रमण के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे, हालांकि इस भूमिका की सीमा और स्वरूप को लेकर अभी स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। [
भारत की ओर से एस जयशंकर का संदेश यह संकेत देता है कि नई दिल्ली वेनेज़ुएला संकट को केवल भू-राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि एक मानवीय दृष्टिकोण से भी देख रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वेनेज़ुएला जैसा देश, जिसके साथ भारत के ऊर्जा, व्यापार और विकास सहयोग के मजबूत रिश्ते हैं, वहां की जनता को इस संकट से सुरक्षित और गरिमापूर्ण तरीके से बाहर आने का अवसर मिलना चाहिए और इसके लिए सभी पक्षों को संवाद और संयम की राह चुननी होगी।


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