तारीक़ रहमान की ऐतिहासिक वतन वापसी: 17 साल के निर्वासन के बाद ढाका की राजनीति में नई हलचल

17 साल बाद तारीक़ रहमान की ऐतिहासिक वतन वापसी और बीएनपी की ताकत

तारीक़ रहमान की वतन वापसी और बांग्लादेश की नई राजनीतिक तस्वीर

साठ वर्षीय बीएनपी कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान व पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बड़े बेटे तारीक़ रहमान, जिन्हें अक्सर तारीक़ ज़िया भी कहा जाता है, लगभग 17 साल के स्वैच्छिक निर्वासन के बाद अब बांग्लादेश लौट रहे हैं। तारीक़ रहमान की वतन वापसी ऐसे समय हो रही है जब उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले सत्ता की मुख्य दावेदार मानी जा रही है।

तारीक़ रहमान की वतन वापसी की तस्वीरें लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई हैं, जहां से वे अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी ज़ाइमा रहमान के साथ ढाका के लिए रवाना हुए। उनकी बेटी ज़ाइमा ने विमान से तस्वीरें साझा करते हुए फेसबुक पर लिखा कि वे अपने वतन बांग्लादेश लौटने की राह पर हैं, जिससे समर्थकों में उत्साह और बढ़ गया। बीएनपी का दावा है कि राजधानी में उनका स्वागत करने के लिए अभूतपूर्व भीड़ जुटेगी, जिसे पार्टी अपने जनसमर्थन की बड़ी ताकत के रूप में पेश करना चाहती है।

बीएनपी की मेगा स्वागत योजना और राजनीतिक दांव

बीएनपी ने योजना बनाई है कि ढाका हवाईअड्डे से तारीक़ रहमान के स्वागत स्थल तक लगभग 50 लाख समर्थकों की रैली निकाली जाएगी, ताकि तारीक़ रहमान की वतन वापसी को ऐतिहासिक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में दर्ज कराया जा सके। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यह शक्ति प्रदर्शन न केवल फरवरी चुनाव से पहले बीएनपी की स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि तारीक़ रहमान को संभावित प्रधानमंत्री के मुख्य दावेदार के रूप में स्थापित करेगा। वरिष्ठ नेता रूहुल कबीर रिज़वी ने इसे बांग्लादेश की राजनीति का निर्णायक क्षण बताते हुए कहा कि सुरक्षा तैयारियां प्रशासन के साथ समन्वय में की जा रही हैं।

तारीक़ रहमान 2008 से लंदन में रह रहे थे, जब वे अपने खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों और सजा के कारण देश छोड़कर चले गए थे। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों के साथ-साथ उस मामले का भी सामना करना पड़ा, जिसमें उन पर शेख हसीना की हत्या की साजिश से जुड़े होने के आरोप लगे थे। हालांकि बाद में हसीना सरकार के हटने और अंतरिम व्यवस्था के आने के बाद कई मुकदमों में उन्हें राहत और बरी होने के फैसले मिले, जिससे तारीक़ रहमान की वतन वापसी की कानूनी अड़चनें काफी हद तक दूर हो गईं।

निर्वासन के साल: 2008 से 2025 तक की भूमिका

तारीक़ रहमान की वतन वापसी से पहले 2008 से लेकर 2025 के अंत तक उनका राजनीतिक और पेशेवर सफर लंदन से ही संचालित होता रहा। सितंबर 2008 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद भी उन्होंने बीएनपी नेतृत्व से अपना संबंध बनाए रखा और दिसंबर 2009 में उन्हें ढाका में आयोजित बीएनपी की पांचवीं राष्ट्रीय परिषद में वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया, जहां से उन्होंने विदेश में रहते हुए पार्टी की रणनीतिक दिशा तय करने में सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवधि में तारीक़ रहमान की वतन वापसी बार‑बार चर्चा में आती रही, लेकिन मुकदमों और सुरक्षा आशंकाओं के कारण यह टलती रही।

तारीक़ रहमान की वतन वापसी पर ढाका एयरपोर्ट पर जुटी बीएनपी समर्थकों की भीड़
तारीक़ रहमान की वतन वापसी पर ढाका एयरपोर्ट पर जुटी बीएनपी समर्थकों की भीड़

लंदन में रहते हुए 2015 में तारीक़ रहमान ने व्हाइट एंड ब्लू कंसल्टेंट्स लिमिटेड नाम से एक निजी पीआर और कम्युनिकेशन फर्म भी पंजीकृत कराई, जिसकी जानकारी यूके कंपनीज़ हाउस के दस्तावेजों में दर्ज है। शुरुआत में उन्होंने अपनी नागरिकता ब्रिटिश लिखवाई, लेकिन 2016 में कागजों को संशोधित कर राष्ट्रीयता को बांग्लादेशी के रूप में दर्ज कराया, जिसे कई विश्लेषक उनकी तारीक़ रहमान की वतन वापसी की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा से जोड़कर देखते हैं। 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद उन्होंने खुले तौर पर घोषणा की कि जैसे ही उनके खिलाफ मामलों की बाधाएं हटेंगी, वे बांग्लादेश लौटकर अंतरिम सरकार के सुधार एजेंडा का समर्थन करेंगे।

अंतरिम सरकार की बागडोर नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस के हाथों में आने के बाद तारीक़ रहमान की वतन वापसी की चर्चा तेज हो गई। यूनुस की अगुवाई वाली इस अंतरिम व्यवस्था ने वादा किया कि निष्पक्ष चुनाव और व्यापक राजनीतिक सुधार के लिए सभी दलों को समान अवसर दिया जाएगा, जिससे बीएनपी को भी नए सिरे से अपने संगठन को पुनर्गठित करने का मौका मिला। इस पृष्ठभूमि में तारीक़ रहमान की वतन वापसी को पार्टी के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त और संगठनात्मक ऊर्जा के स्रोत के रूप में देखा जा रहा है।

तारीक़ रहमान की वतन वापसी का समय भी बांग्लादेश के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि देश लंबे राजनीतिक उथल‑पुथल के बाद चुनावी दौर में प्रवेश कर रहा है। मुस्लिम बहुल इस दक्षिण एशियाई देश की आबादी लगभग 17.5 करोड़ है और यहां की जनता दो साल से ज्यादा समय से अस्थिरता, हिंसा और आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रही है। फरवरी में होने वाला चुनाव राजनीतिक स्थिरता की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिसमें बीएनपी को अग्रणी पार्टी के रूप में देखा जा रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में संकेत मिला कि आगामी चुनाव में बीएनपी सबसे अधिक संसदीय सीटें जीत सकती है, जबकि इस्लामी दल जमात‑ए‑इस्लामी भी प्रतियोगिता में प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। दूसरी ओर, शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया है और उसने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है, जिससे आशंका है कि तारीक़ रहमान की वतन वापसी के बीच चुनावी माहौल में तनाव और बढ़ सकता है।

तारीक़ रहमान की वतन वापसी की पृष्ठभूमि केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भी है, क्योंकि उनकी मां और बीएनपी प्रमुख खालिदा ज़िया पिछले कई महीनों से गंभीर रूप से बीमार हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनकी बिगड़ती सेहत ने भी बेटे के लिए तुरंत लौटने का भावनात्मक दबाव बनाया है, ताकि वे परिवार के साथ रहकर राजनीतिक और पारिवारिक दोनों मोर्चों पर सक्रिय हो सकें। बीएनपी के कई नेता इसे एक ऐसा क्षण बता रहे हैं, जो संगठन के भीतर भावनात्मक एकजुटता और नेतृत्व पर भरोसे को मजबूत करेगा।

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बांग्लादेश इस समय चौराहे पर खड़ा है, जहां तारीक़ रहमान की वतन वापसी बीएनपी की शांतिपूर्ण लामबंदी की क्षमता और अंतरिम प्रशासन की निष्पक्ष सत्ता‑हस्तांतरण की प्रतिबद्धता, दोनों की परीक्षा बन गई है। सरकार भले ही स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव कराने का वादा कर रही हो, लेकिन हाल में मीडिया संस्थानों पर हमले और छिटपुट हिंसा की घटनाओं ने कानून‑व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में तारीक़ रहमान की वतन वापसी अगर शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से होती है, तो यह आने वाले चुनाव की साख को मजबूत कर सकती है।

राष्ट्रीय नागरिक पार्टी (एनसीपी), जो शेख हसीना सरकार को गिराने वाले छात्र आंदोलन से उभरकर सामने आई है, ने भी तारीक़ रहमान की वतन वापसी का स्वागत किया है। एनसीपी के प्रवक्ता खान मुहम्मद मुरसलीन ने कहा कि तारीक़ रहमान को कड़े दबाव और धमकियों के कारण देश छोड़ना पड़ा था, इसलिए तारीक़ रहमान की वतन वापसी एक प्रतीकात्मक मायने रखती है और लोकतांत्रिक रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए विभिन्न धाराओं के बीच सहयोग की जरूरत होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की बहाली की दिशा में वे तारीक़ रहमान और अन्य लोकतांत्रिक ताकतों के साथ खड़े होंगे।

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