सीज़फायर संकट: इज़राइल का 100 मिसाइल से लेबनान पर हमला, ट्रंप के तीन विकल्प
सीज़फायर संकट ने मिडिल ईस्ट में नया तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिका-ईरान सीज़फायर के महज कुछ घंटों बाद इज़राइल ने लेबनान पर 100 मिसाइलों का भारी हमला किया, जिसमें 254 लोग मारे गए। इस हमले ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इज़राइल और खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागीं तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया, जो विश्व के 20% कच्चे तेल के व्यापार का मार्ग है। अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने तीन कठिन विकल्प हैं – युद्ध फिर शुरू करना, उपराष्ट्रपति वांस को पाकिस्तान भेजकर कूटनीति पर जोर देना या बेंजामिन नेतन्याहू पर दबाव डालना।
सीज़फायर संकट में लेबनान का मुद्दा क्यों केंद्र में?
सीज़फायर संकट का मुख्य कारण लेबनान है, जो समझौते में शामिल नहीं था। ईरान ने लेबनान को किसी भी सौदे का हिस्सा बनाने पर जोर दिया, लेकिन अमेरिका और इज़राइल इससे सहमत नहीं। ट्रंप ने पीबीएस न्यूज को बुधवार सुबह बताया कि बेरूत पर हमले को वे ‘अलग झड़प’ मानते हैं, क्योंकि हिज़बुल्लाह के कारण लेबनान को सीज़फायर से बाहर रखा गया। इज़राइल ने स्पष्ट कहा कि ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करना तथा हिज़बुल्लाह को समाप्त करना उनका लक्ष्य है। ईरान के हार्डलाइनर इस इज़राइल कार्रवाई को ‘विश्वासघात’ कहकर शांति प्रयासों पर सवाल उठा रहे हैं, जैसा कि जून 2025 और फरवरी 2026 में बातचीत के दौरान हमलों में हुआ था।
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ट्रंप के तीन विकल्प: युद्ध, कूटनीति या इज़राइल पर दबाव
ट्रंप के पहले विकल्प – युद्ध फिर शुरू करना – से ईरान भड़क उठेगा और पश्चिम एशिया में लड़ाई तेज हो जाएगी। इससे ऊर्जा संकट गहराएगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी तथा नवंबर मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप की लोकप्रियता को झटका लगेगा। ट्रंप ने ईरान को ‘पागल’ कहते हुए बिजली ग्रिड, तेल बुनियादी ढांचे और परमाणु सुविधाओं पर हमले की धमकी दी है, लेकिन अमेरिकी मिसाइल भंडार तेजी से घट रहे हैं। पेंटागन की मार्च 2025 लीक रिपोर्ट ने चेतावनी दी थी कि 10 और दिनों के युद्ध में स्टॉक खत्म हो जाएंगे।
दूसरा विकल्प कूटनीति है। उपराष्ट्रपति जेडी वांस शुक्रवार इस्लामाबाद पहुंचेंगे, जहां ईरान से शांति वार्ता शुरू होगी। वांस ने सीज़फायर कराया था, लेकिन इज़राइल के लेबनान हमलों के बीच लंबी शांति मुश्किल। अमेरिका को पाकिस्तान में वांस और नेतन्याहू से ट्रंप की दोहरी रणनीति अपनानी होगी। ईरान अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंध हटाना, नागरिक परमाणु कार्यक्रम, मुआवजा और होर्मुज पर नियंत्रण मांग रहा है।
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इज़राइल को रोकना सबसे चुनौतीपूर्ण, लेकिन संभव
तीसरा विकल्प इज़राइल पर दबाव डालना है, जैसा ट्रंप ने जून 2025 में किया। तब नेतन्याहू ने सीज़फायर तोड़ा, लेकिन ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर सख्ती दिखाई और सीधे बात की। इससे ईरान को लगेगा कि अमेरिका शांति चाहता है और तेल अवीव पर नियंत्रण रखता है। हालांकि, नेतन्याहू लेबनान को ‘अलग अभियान’ बता चुके हैं।
दो सप्ताह का सीज़फायर ऊर्जा संकट सुलझाने वाला था। ईरान के हमलों से प्रभावित ब्रेंट क्रूड 13-16% और डब्ल्यूटीआई 14-15% गिरा, जो $100 प्रति बैरल से नीचे है। लेकिन सीज़फायर संकट बढ़ने से ईंधन कीमतें आसमान छू सकती हैं। ट्रंप का निर्णय क्षेत्रीय स्थिरता तय करेगा।

