प्रशांत महासागर तनाव: क्या तीसरा विश्वयुद्ध नजदीक है?
प्रशांत महासागर तनाव तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया के सामने गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या हालात तीसरे विश्वयुद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। रूसी परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती, अमेरिकी रक्षा मंत्री की आपातकालीन बैठक और राष्ट्रपति ट्रंप की कड़ी चेतावनी इस तनाव को और गहरा बना रहे हैं।
रूसी परमाणु पनडुब्बियों की रणनीतिक तैनाती
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु पनडुब्बियों की उपस्थिति काफी बढ़ाई है। सितंबर 2025 में रूसी नौसेना ने उत्तर प्रशांत में व्यापक सैन्य अभ्यास शुरू किए हैं, जिसमें परमाणु पनडुब्बियों और तटीय मिसाइल प्रणालियों की महत्वपूर्ण तैनाती शामिल है।
रूसी प्रशांत बेड़े की क्राइसनायार्स्क पनडुब्बी, जो दिसंबर 2023 में कमीशन हुई थी, को आर्कटिक के रास्ते से बैरेंट्स सागर से प्रशांत बेड़े में स्थानांतरित किया गया है। यह कदम एक गंभीर सैन्य संकेत माना जा रहा है।
रूसी पनडुब्बी “सम्राट अलेक्जेंडर III” 16 परमाणु मिसाइलें ले जाने में सक्षम है, जिनकी अनुमानित रेंज 5,157 मील है। हाल ही में, रूसी परमाणु पनडुब्बियों ने उत्तर प्रशांत में सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों का परीक्षण भी किया है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री की आपातकालीन बैठक
पेंटागन के रक्षा सचिव हेगसेथ ने 30 सितंबर को सैकड़ों जनरलों के साथ आपातकालीन बैठक बुलाई है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख जनरल और उनके सहायक भी बैठक के कारण से अनजान हैं। इस असामान्य कदम को प्रशांत महासागर तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
ट्रंप की चेतावनी और चीन-रूस समीकरण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि रूसी विमान यदि अमेरिकी या नाटो हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करेंगे तो उन्हें मार गिराया जाएगा। नाटो महासचिव रुटे ने भी इसका समर्थन किया है।
वहीं, चीन और रूस के बीच बढ़ते रक्षा संबंध चिंता का कारण हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस-उत्तर कोरिया रक्षा संधि से चीन भी असहज है, जबकि शी जिनपिंग शांति की वकालत कर रहे हैं।
क्या तीसरा विश्वयुद्ध संभव है?
प्रशांत महासागर तनाव को देखते हुए विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती, अमेरिकी आपात बैठक, और हथियारों की बढ़ती संख्या खतरनाक संकेत हैं। हालांकि, शांति की उम्मीद अब भी बनी हुई है।
ट्रंप और शी जिनपिंग की “उत्पादक” बातचीत, चीन की शांति पहल और संभावित अमेरिका-रूस शिखर सम्मेलन उम्मीद की किरण दिखाते हैं।
निष्कर्ष: मौजूदा हालात तनावपूर्ण जरूर हैं, लेकिन तीसरा विश्वयुद्ध अपरिहार्य नहीं है। सभी पक्षों को संयम बरतते हुए कूटनीतिक समाधान पर जोर देना होगा।
अस्वीकरण: यह लेख मौजूदा रिपोर्टों और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। नवीनतम जानकारी के लिए विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर नज़र बनाए रखें।

