पाकिस्तान का दोहरा चरित्र: इजरायल से गठजोड़ की चौंकाने वाली रिपोर्ट
पाकिस्तान का दोहरा चरित्र हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में उजागर हुआ है, जिसमें दावा किया गया है कि पाकिस्तान अपनी सेना की लगभग 20,000 टुकड़ियों को गाजा भेजने की तैयारी कर रहा है ताकि हमास को निष्क्रिय किया जा सके। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद तथा अमेरिकी CIA के बीच मिस्र में हुई गुप्त बैठकों के बाद उठाया जा रहा है।
पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और गुप्त वार्ता का खुलासा
पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर दुनिया के सामने आया है। News18 की रिपोर्ट के अनुसार:
- 20,000 पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती गाजा में युद्धोत्तर स्थिरीकरण के लिए की जाएगी।
- मिस्र में पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने मोसाद और CIA से गुप्त बैठकें कीं।
- अमेरिका और इजरायल ने सैनिक तैनाती के बदले आर्थिक प्रोत्साहन का वादा किया।
- इसका उद्देश्य हमास को निष्क्रिय करना और गाजा में शांति स्थापित करना बताया गया है।
इस्लामी गणराज्य का विरोधाभास
यह रिपोर्ट पाकिस्तान का दोहरा चरित्र स्पष्ट करती है — एक ओर पाकिस्तान फिलिस्तीन के समर्थन की बात करता है, वहीं दूसरी ओर कथित रूप से इजरायल की खुफिया एजेंसी के साथ समझौते में जुटा है। यह न केवल उसके इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ है बल्कि “इस्लामी भाईचारे” की उसकी छवि को भी धक्का पहुंचाता है।
भारत में मुस्लिम समुदाय का रुख
जबकि भारत में कुछ मुस्लिम समूहों ने हमास को “प्रतिरोध आंदोलन” के रूप में समर्थन दिया, यह रिपोर्ट दिखाती है कि पाकिस्तान व्यावहारिक कारणों से हमास के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है। यह एक गहरा विरोधाभास है, जो पाकिस्तान का दोहरा चरित्र उजागर करता है।
भू-राजनीतिक निहितार्थ और भारत के लिए सबक
पाकिस्तान के आर्थिक संकट, IMF की शर्तें और अमेरिकी दबाव के बीच यह रणनीति समझ में आती है। मध्य पूर्व के बदलते समीकरणों के चलते कई अरब देशों की तरह पाकिस्तान भी आर्थिक लाभ को प्राथमिकता दे रहा है। भारत के लिए यह स्थिति स्पष्ट संदेश देती है कि आतंकवाद के किसी भी रूप का समर्थन राष्ट्रहित के विरुद्ध है।
विशेषज्ञों की राय और संभावित परिणाम
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह “इस्लामी भाईचारे” की आड़ में पाकिस्तान के व्यावहारिक और अवसरवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है। यदि यह रिपोर्ट सही साबित होती है, तो पाकिस्तान की छवि इस्लामी दुनिया में गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
पाकिस्तान का दोहरा चरित्र इस बात का उदाहरण है कि आर्थिक लाभ के लिए पाकिस्तान किसी भी सिद्धांत से समझौता कर सकता है। भारत के लिए यह समय है कि आतंकवाद के किसी भी समर्थन को सख्ती से रोका जाए और राष्ट्रीय एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
अस्वीकरण: यह लेख News18 की रिपोर्ट पर आधारित है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान, इजरायल और अमेरिका ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

