ईरान प्रदर्शन: इंटरनेट ब्लैकआउट, 42 से ज्यादा मौतें और देशव्यापी विरोध तेज

ईरान प्रदर्शन के दौरान तेहरान में सड़कों पर उतरे हजारों लोग और इंटरनेट बंदी की स्थिति।

ईरान प्रदर्शन में इंटरनेट ब्लैकआउट और बढ़ती मौतें

ईरान प्रदर्शन हाल के दिनों में बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां बिगड़ती अर्थव्यवस्था, गिरती मुद्रा और सरकार विरोधी नाराजगी ने पूरे देश में व्यापक विरोध की चिंगारी भड़का दी है। राजधानी तेहरान के बाज़ार में 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए ये ईरान प्रदर्शन अब इंटरनेट बंदी, सख्त दमनात्मक कार्रवाई और बढ़ती मौतों के कारण पूर्ण रूप से राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल चुके हैं।

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी (HRANA) के अनुसार 28 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 के बीच कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट में बताया गया कि मृतकों में 29 प्रदर्शनकारी नागरिक, आठ सुरक्षाकर्मी और 18 वर्ष से कम आयु के पांच बच्चे और किशोर शामिल हैं, जबकि नॉर्वे आधारित ईरान ह्यूमन राइट्स समूह ने कुल मृतकों की संख्या 45 तक पहुंचने का दावा किया है।

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तेहरान में विशाल रैली और हिंसक झड़पें

राजधानी तेहरान की सड़कों पर भारी भीड़ के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं, जिनमें नाराज प्रदर्शनकारी सरकार और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ नारे लगाते नजर आते हैं। एएफपी के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया कि उत्तर-पश्चिमी तेहरान की विशाल अयातुल्लाह कशानी बुलेवार्ड पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा, जबकि अबादान सहित अन्य पश्चिमी शहरों में भी विरोध प्रदर्शन की ऐसी ही तस्वीरें सामने आईं।

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सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि तेहरान और मशहद में गुरुवार रात की रैलियों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों को खदेड़ा और एक सरकारी इमारत को आग के हवाले कर दिया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, फिर भी यह स्पष्ट है कि ईरान प्रदर्शन केवल आर्थिक असंतोष तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब सीधे तौर पर शासन व्यवस्था को चुनौती देने वाले व्यापक जनाक्रोश का रूप ले चुके हैं।

46 शहरों में हड़ताल, सैकड़ों गिरफ्तार

HRANA की रिपोर्ट के मुताबिक ताजा दौर के विरोध में कम से कम 21 प्रांतों के 46 शहरों में प्रदर्शन दर्ज किए गए, जिनमें कई इलाकों में बाज़ार बंद और हड़ताल की खबरें भी शामिल हैं। विशेष रूप से कुर्द बहुल क्षेत्रों जैसे कुर्दिस्तान, पश्चिम अज़रबैजान, करमानशाह और इलाम प्रांतों के दर्जनों शहरों में बाजारों के शटर गिराए जाने और हड़तालों के जरिए सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की गई। देशव्यापी कार्रवाई के हिस्से के रूप में कम से कम 60 और लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 28 दिसंबर से अब तक 2,277 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने की सूचना है। रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में कम से कम 166 नाबालिग और 48 विश्वविद्यालय छात्र शामिल हैं, साथ ही राज्य मीडिया पर कम से कम 45 कथित जबरन इकबालिया बयान भी प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया गया है।

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इन गिरफ्तारियों और आरोपित जबरन स्वीकारोक्ति ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों की चिंता बढ़ा दी है, जो मानते हैं कि ईरान प्रदर्शन पर की जा रही कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सीधा प्रहार है। लगातार बढ़ती गिरफ्तारी और दमन के बावजूद प्रदर्शन जारी रहने से संकेत मिलता है कि जनता की असंतुष्टि असाधारण स्तर पर पहुंच चुकी है।ऑनलाइन निगरानी समूह नेटब्लॉक्स ने बताया कि लाइव नेटवर्क आंकड़ों से स्पष्ट है कि ईरान में व्यापक स्तर पर इंटरनेट सेवाओं में गिरावट दर्ज की गई है और देश लगभग पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति में है। संगठन के अनुसार यह अवरोध हाल के दिनों में लागू की जा रही डिजिटल सेंसरशिप की उस श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में चल रहे ईरान प्रदर्शन और विरोध गतिविधियों को दबाना और नागरिकों की संचार क्षमता को सीमित करना है।

इंटरनेट बंदी और संचार माध्यमों पर लगाम ने न केवल प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय को प्रभावित किया है, बल्कि बाहरी दुनिया तक वास्तविक स्थिति पहुंचने के रास्तों को भी संकीर्ण कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यापक इंटरनेट बंदी से आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है और इससे पहले से संकट झेल रही अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनता है, जिसने ईरान प्रदर्शन को जन्म दिया था। निर्वासित ईरानी राजकुमार रेज़ा पहलवी ने इंटरनेट और संचार पर लगाई गई रोक की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि सरकार विरोध को दबाने के लिए इंटरनेट बंद करने के साथ-साथ सैटेलाइट संकेतों को भी जाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यूरोपीय नेताओं से अपील की कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तर्ज पर ईरानी जनता के पक्ष में खड़े हों और शासन को जवाबदेह ठहराने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि ईरान प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल सके।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरानी अधिकारी प्रदर्शनकारियों की हत्या शुरू करते हैं, तो संयुक्त राज्य अमेरिका बहुत कड़ा जवाब देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों पर गोलीबारी या घातक हिंसा की गई, तो अमेरिका ईरानी शासन के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के लिए तैयार है, जिससे ईरान प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक संरक्षण व राजनीतिक समर्थन मिलने की संभावना बढ़ गई है। कुल मिलाकर, गिरती अर्थव्यवस्था, व्यापक बेरोजगारी, मुद्रा अवमूल्यन और राजनीतिक असंतोष ने ईरान प्रदर्शन को एक निर्णायक संघर्ष में बदल दिया है, जहां एक ओर सुरक्षा तंत्र सख्ती से नियंत्रण की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर जनता अधिक स्वतंत्रता और जवाबदेही की मांग पर अड़ी हुई है। इंटरनेट ब्लैकआउट, बढ़ती मौतें और अंतरराष्ट्रीय चेतावनियां यह दर्शाती हैं कि आने वाले दिनों में ईरान का आंतरिक संकट और गहराने के साथ वैश्विक कूटनीतिक दबाव भी बढ़ सकता है।

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