NIA चार्जशीट: पहलगाम हमले में 6 आरोपित, 26 नागरिकों की मौत का पाक लिंक बेनकाब

पहलगाम आतंकी हमला मामले में NIA द्वारा पाकिस्तान स्थित हैंडलर और छह आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पहलगाम आतंकी हमला मामले में विस्तृत जांच के बाद छह आरोपितों के खिलाफ 1,597 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका और प्रतिबंधित संगठनों की साजिश का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

पहलगाम आतंकी हमला और NIA की चार्जशीट

इस चार्जशीट में वर्ष 2025 के पहलगाम आतंकी हमले को सुनियोजित, धर्म-आधारित लक्षित हत्या की साजिश करार देते हुए 26 नागरिकों की मौत और अनेक घायलों की जिम्मेदारी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर डाली गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, पहलगाम आतंकी हमला और उसके मुखौटा संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) द्वारा रचे गए एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा था, जिसमें सीमा पार बैठे हैंडलर की निगरानी में हमले की पूरी योजना, तैयारी और क्रियान्वयन किया गया। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि हमले को भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की व्यापक साजिश के रूप में देखा गया है, जिसे चार्जशीट में दर्ज धाराओं से रेखांकित किया गया है।

चार्जशीट में नामजद आतंकियों की पहचान

NIA द्वारा दायर चार्जशीट में चार आतंकियों को सीधे तौर पर पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ा गया है, जिनमें पाकिस्तान स्थित हैंडलर आतंकवादी साजिद जट प्रमुख है, जिस पर हमले की रूपरेखा तैयार करने और निर्देश जारी करने का आरोप है। शेष तीन आतंकी—फैसल जट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिबरान और हमजा अफगानी—को सुरक्षा बलों ने जुलाई 2025 में श्रीनगर के डाचीगाम क्षेत्र में चलाए गए ऑपरेशन महादेव के दौरान मुठभेड़ में मार गिराया था, जिससे पहलगाम आतंकी हमला करने वाले सक्रिय मॉड्यूल का सफाया हो गया।

एजेंसी ने बताया कि लेT/TRF और इन चारों आरोपित आतंकियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, शस्त्र अधिनियम 1959 और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम 1967 के तहत प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, साथ ही भारत के विरुद्ध युद्ध छेड़ने से संबंधित दंडनीय प्रावधान भी लगाए गए हैं।  NIA ने अपनी चार्जशीट में तर्क दिया है कि पहलगाम आतंकी हमला केवल एक अलग-थलग वारदात नहीं, बल्कि भारत के नागरिकों और सुरक्षा ढांचे के खिलाफ दीर्घकालिक आतंकवादी अभियान का हिस्सा था।

स्थानीय मददगार और पाकिस्तानी कनेक्शन

चार्जशीट में दो अन्य व्यक्तियों, बशीर अहमद जौठार और परवेज अहमद जौठार, को भी आरोपित बनाया गया है, जिन्हें NIA ने 22 जून 2025 को आतंकियों को पनाह देने और मदद पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया था।पूछताछ के दौरान दोनों ने उन तीन सशस्त्र आतंकियों की पहचान उजागर की, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमला अंजाम दिया, और यह भी स्वीकार किया कि ये आतंकी प्रतिबंधित लेT संगठन से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक थे।

NIA ने जांच के दौरान 1,000 से अधिक लोगों से पूछताछ की, तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए, तथा पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से पहलगाम आतंकी हमले के तार जोड़ने वाले अनेक सुरागों को चार्जशीट में शामिल किया है।  जांच में तीन पाकिस्तानी आतंकियों के मोबाइल फोन से आधार कार्ड, तस्वीरें और कुछ व्यक्तियों के फेसबुक आईडी बरामद हुए, जिनके आधार पर एजेंसी ने हमले की साजिश में शामिल संपर्कों की पड़ताल आगे बढ़ाई।

NIA के अनुसार, सुलेमान शाह, हमजा अफगानी उर्फ अफगान और जिबरान के बीच तथा उनके पाकिस्तान स्थित हैंडलर के साथ एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड संचार को डिकोड किया गया, जिससे पहलगाम आतंकी हमला की योजना, मार्गदर्शन और हमले के बाद की गतिविधियों के स्पष्ट डिजिटल सबूत हासिल हुए।  ये संचार रिकॉर्ड, अन्य तकनीकी और फॉरेंसिक प्रमाणों के साथ, चार्जशीट में प्रमुख डिजिटल साक्ष्य के रूप में सम्मिलित किए गए हैं, जो पहलगाम आतंकी हमला मामले को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की पुख्ता मिसाल के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

चार्जशीट में यह भी रेखांकित किया गया है कि 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमला ने न केवल निर्दोष सैलानियों और स्थानीय नागरिकों की जान ली, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा, पर्यटन और सामुदायिक सौहार्द पर व्यापक प्रभाव डाला, जिस पर भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने कठोर प्रतिक्रिया दी। इस हमले के बाद, केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने निगरानी, खुफिया संग्रह और आतंकवाद विरोधी अभियानों को और अधिक सघन बनाया, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

पहलगाम आतंकी हमला के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने ऑपरेशन महादेव के तहत डाचीगाम–हरवान वन क्षेत्र में छिपे आतंकियों को तलाशने के लिए लंबा अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप तीन मुख्य पाकिस्तानी आतंकियों का सफाया हुआ और हमले में प्रयुक्त हथियारों की पहचान फॉरेंसिक जांच से पुख्ता हो सकी। बाद में बरामद की गई राइफलों की बैरल से निकली गोलियों और पहलगाम हमले की जगह से मिले खोखों का मिलान कर यह प्रमाणित किया गया कि इन्हीं हथियारों से 26 नागरिकों की हत्या की गई थी।

पहलगाम आतंकी हमला के भू-रणनीतिक प्रभाव भी गंभीर रहे, क्योंकि हमले ने सीमापार आतंकी ढांचे को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को नए स्तर तक पहुंचा दिया और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बहस को तेज किया।  भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि पहलगाम आतंकी हमला जैसी घटनाओं पर कड़ी सैन्य व कूटनीतिक प्रतिक्रिया होगी, और ऐसी किसी भी साजिश के लिए पाकिस्तान प्रायोजित संगठनों व उनके नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 7 मई को सीमा पार पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर पूर्व-भोर हवाई हमले किए गए, जिनमें कम से कम 100 आतंकियों के मारे जाने की सूचना सामने आई, हालांकि आधिकारिक आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित रही। इन हमलों के बाद पश्चिमी सीमा पर लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, सशस्त्र ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट हमलों के माध्यम से दोनों ओर से तीखी सैन्य कार्रवाई हुई, जिसने पहलगाम आतंकी हमला के बाद के परिदृश्य को और अधिक विस्फोटक बना दिया।

इसी क्रम में 9–10 मई की रात भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 13 वायुअड्डों और सैन्य ठिकानों पर निशाना साधते हुए हमले किए, जिसके बाद चार दिनों तक लगातार सैन्य टकराव की स्थिति बनी रही और दोनों देशों की सेनाओं के बीच गोलाबारी और हवाई हमले चलते रहे। अंततः 10 मई की शाम भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता होने पर युद्धविराम जैसी स्थिति बनी और पहलगाम आतंकी हमला के बाद भड़की सीधी सैन्य शत्रुता पर फिलहाल विराम लग गया।

NIA की चार्जशीट और पहलगाम आतंकी हमला के बाद की सैन्य कार्रवाइयों ने यह संकेत दिया है कि भारत अब सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर चलते हुए कड़ा कानूनी, कूटनीतिक और सैन्य रुख अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पहलगाम आतंकी हमला को लेकर चली विस्तृत जांच, ऑपरेशन महादेव और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों तथा अदालत में पेश साक्ष्यों से यह संदेश दिया गया है कि ऐसे हमलों में शामिल किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून से बच निकलने का अवसर नहीं मिलेगा।

पहलगाम आतंकी हमला मामले में दर्ज विस्तृत चार्जशीट भविष्य के आतंकवाद विरोधी अभियानों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि इसमें सीमा पार नेटवर्क, फंडिंग, डिजिटल संचार और स्थानीय सहयोगियों की सहभागिता का समग्र चित्र प्रस्तुत किया गया है।  NIA ने संकेत दिया है कि पहलगाम आतंकी हमला से जुड़े कुछ अन्य संदिग्धों और नेटवर्क की जांच अभी जारी है, और आवश्यकता पड़ने पर पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है, जिससे पूरे आतंकी तंत्र को कानून के दायरे में लाया जा सके।

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