पाकिस्तान के बयान से ट्रंप की मध्यस्थता दावे की पोल खुली
ट्रंप की मध्यस्थता दावे की पोल खुलने के बाद अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अल जजीरा को दिए साक्षात्कार में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। डार ने स्पष्ट कहा कि भारत ने कभी तृतीय पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की थी।
ट्रंप के दावे बनाम वास्तविकता
पिछले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि उपराष्ट्रपति वांस और राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले 48 घंटों में भारतीय और पाकिस्तानी वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की थी, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ भी शामिल थे। लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्री के इस बयान ने ट्रंप की मध्यस्थता दावे की पोल खोल दी और ट्रंप की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।
इशाक डार ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका के जरिए युद्धविराम का प्रस्ताव आया था, लेकिन भारत ने इसे अस्वीकार किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि भारत हमेशा से किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं रहा है।
भारत की स्पष्ट स्थिति
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने कहा था, “प्रधानमंत्री मोदी ने दृढ़ता से कहा कि भारत मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता और न ही कभी करेगा। इस मामले में भारत में पूर्ण राजनीतिक सहमति है।” यह बयान भारत की पारंपरिक विदेश नीति को दर्शाता है कि द्विपक्षीय मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय बातचीत से ही होना चाहिए।
ट्रंप की मध्यस्थता दावे की पोल खुलने से मोदी विरोधी नैरेटिव की हवा निकली है। पाकिस्तान के इस बयान ने उन आलोचकों को जवाब दिया है जो मोदी सरकार पर “नरेंद्र सरेंडर” जैसे आरोप लगाते रहे। भारत ने अपनी नीतिगत दृढ़ता बनाए रखी और किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विश्वसनीयता पहले ही गिरती जा रही थी, लेकिन पाकिस्तान के मंत्री के इस बयान ने उनके दावों की हवा पूरी तरह से निकाल दी। यह अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
यह घटना भू-राजनीतिक संदर्भ में भी अहम है। पाकिस्तान का राजनीतिक प्रतिष्ठान चीन से जुड़ा दिखता है, जबकि सैन्य प्रतिष्ठान अमेरिका से। यह द्विविधा पाकिस्तान की विदेश नीति में झलकती है। प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा और भारत-चीन के सुधरते रिश्तों के बीच यह बयान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का संकेत है।
निष्कर्षतः, पाकिस्तान के विदेश मंत्री के इस बयान ने स्पष्ट कर दिया कि भारत की विदेश नीति में कोई कमजोरी नहीं है। द्विपक्षीय मुद्दों का समाधान केवल द्विपक्षीय बातचीत से होना चाहिए। ट्रंप की मध्यस्थता दावे की पोल ने यह भी साबित कर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में झूठे दावे जल्दी बेनकाब हो जाते हैं। ट्रंप प्रशासन को अब भविष्य में ऐसे दावे करने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए। यह घटना भारत की कूटनीतिक दृढ़ता और परिपक्वता को उजागर करती है।

