ट्रंप, वांस ने रोका भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: सीनेटर की लीक ऑडियो
भारत व्यापार समझौता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज की कथित लीक ऑडियो में व्हाइट हाउस ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो, उपराष्ट्रपति जेडी वांस और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाए गए हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, क्रूज ने डोनर्स के साथ फोन कॉल में कहा कि वह व्हाइट हाउस से इस समझौते को पास कराने के लिए लड़ रहे हैं।
ट्रंप-वांस भारत व्यापार समझौता: लीक ऑडियो का पूरा मामला
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर सस्पेंस बढ़ गया है। कई महीनों से चल रही बातचीत के बीच ट्रंप ने रूस के साथ तेल व्यापार के लिए भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाए, जिससे कुल ड्यूटी 50% हो गई। क्रूज की लीक ऑडियो से पता चलता है कि ट्रंप-वांस का भारत व्यापार समझौता को रोकने में उनकी भूमिका है। टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेटर ने समर्थकों को बताया कि वह ट्रंप प्रशासन से जूझ रहे हैं।
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रिपब्लिकन पार्टी में फूट और टैरिफ का खतरा
यह रिपोर्ट ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी में गहरी दरार दिखाती है, जो पहले फ्री ट्रेड समर्थक थी। क्रूज ने डोनर्स को बताया कि उन्होंने ट्रंप को पिछले साल अप्रैल में ‘लिबरेशन डे टैरिफ’ से रोका था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि टैरिफ से अमेरिकी कीमतें बढ़ेंगी, रिटायरमेंट सेविंग्स प्रभावित होंगी और 2026 मिडटर्म चुनाव में हाउस व सीनेट डेमोक्रेट्स के हाथ चले जाएंगे। क्रूज 2028 राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप-वांस को चुनौती दे सकते हैं।
क्रूज भारत-अमेरिका संबंधों के समर्थक रहे हैं। 2019 भारत यात्रा पर उन्होंने कहा, “भारत और अमेरिका प्राकृतिक सहयोगी हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। टेक्सास में 5 लाख से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी रहते हैं।” उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात में चीन के खिलाफ साझा हितों का जिक्र किया। भारतीय-अमेरिकी टेक्सास की 2% आबादी हैं और राजनीतिक ताकत रखते हैं।
नई दिल्ली-वाशिंगटन संबंधों पर असर
ट्रंप-वांस भारत व्यापार समझौता रुकने से दोनों देशों के आर्थिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। क्रूज ने 2016 में ट्रंप से राष्ट्रपति नामांकन हारने के बावजूद भारत नीति का समर्थन किया। एशियन अमेरिकन पैसिफिक आइलैंडर (AAPI) डेटा के अनुसार, टेक्सास में 5 लाख भारतीय-अमेरिकी महत्वपूर्ण वोट बैंक हैं। यह लीक ऑडियो व्यापार वार्ता को नई दिशा दे सकता है।
कुल मिलाकर, भारत व्यापार समझौता पर राजनीतिक चुनौतियां साफ हैं। कई दौर की बातचीत के बावजूद टैरिफ तनाव बरकरार है। भारत-अमेरिका साझेदारी चीन के खिलाफ मजबूत होनी चाहिए।

