हॉर्मुज बंद से एशिया का कच्चा तेल संकट, भारत 40% आयात प्रभावित

हॉर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों की कतार, वैकल्पिक पाइपलाइनों पर दबाव

हॉर्मुज बंद से एशिया का कच्चा तेल संकट, भारत 40% आयात प्रभावित

हॉर्मुज बंद ने एशिया की कच्चे तेल आपूर्ति को गहरा झटका दिया है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद ईरान द्वारा लगाए गए इस ब्लॉकेड से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई है। भारत जैसे देशों में तेल की आपूर्ति की आशंकाएं बढ़ गई हैं, जिससे बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के दाम इस महीने दो बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चढ़ चुके हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, हॉर्मुज बंद से पहले भारत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल आयात इसी रास्ते से आता था, लेकिन अब 70 प्रतिशत गैर-हॉर्मुज स्रोतों पर निर्भरता बढ़ा दी गई है।

हॉर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व

हॉर्मुज स्ट्रेट से प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो विश्व के समुद्री कच्चे तेल का एक पांचवां हिस्सा है। इनमें से आधे से अधिक, यानी करीब 8.2 मिलियन बैरल, भारत और चीन जैसे विशाल ऊर्जा-भूखे देशों के लिए होते हैं। भारत को हॉर्मुज बंद से 12-15 प्रतिशत तेल मिलता है, जबकि चीन 38 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया 12 प्रतिशत और जापान 11 प्रतिशत लेते हैं। ये चार देश मिलकर हॉर्मुज के 76 प्रतिशत तेल खरीदते हैं और वैश्विक जीडीपी का 30 प्रतिशत योगदान देते हैं। इसलिए, इनकी ऊर्जा आपूर्ति में बाधा दुनिया के लिए बर्दाश्त से बाहर है।

हॉर्मुज बंद के कारण भारतीय बाजारों में आपूर्ति भय व्याप्त है, जो तेल कीमतों को ऊपर धकेल रहा है। वैकल्पिक रूट जैसे सऊदी का ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई का हबशन-फुजैराह पाइपलाइन मौजूद हैं, लेकिन ये हॉर्मुज के 20 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) के मुकाबले महज 25-30 प्रतिशत ही कवर कर सकते हैं। सऊदी का 750 किलोमीटर लंबा पेट्रोलाइन पाइपलाइन पूर्वी तेल क्षेत्रों से लाल सागर तट तक जाता है और इसकी क्षमता 7 मिलियन bpd है, जो हॉर्मुज प्रवाह का मात्र 24 प्रतिशत है। 2019 में हूती ड्रोन हमले से इसकी कमजोरी साबित हो चुकी है।

वैकल्पिक पाइपलाइनों की सीमाएं

यूएई का हबशन-फुजैराह पाइपलाइन अबू धाबी के हबशन तेल क्षेत्र से ओमान की खाड़ी के फुजैराह बंदरगाह तक जुड़ती है, जो ईरान के ब्लॉकेड से परे है। इसकी क्षमता 1.2-1.5 मिलियन bpd है, जो हॉर्मुज का 7 प्रतिशत है। 16 मार्च को फुजैराह में ड्रोन हमले से लोडिंग ऑपरेशन रुक गए। कुल मिलाकर, सभी बायपास रूट मिलाकर 6-7 मिलियन bpd ही हैंडल कर सकते हैं। अन्य रूट जैसे इराक होते हुए महज 1 मिलियन bpd से कम हैं। इससे एशिया के ईंधन-भूखे बाजारों को राहत नहीं मिल रही।

हॉर्मुज बंद मध्य पूर्व के तेल को पश्चिम की ओर मोड़ रहा है, जो ट्रंप प्रशासन के लिए रणनीतिक चुनौती है। भारत ने विविधीकरण से जोखिम कम किया है, लेकिन वैश्विक स्थिरता के लिए स्ट्रेट का महत्व बरकरार है।

 

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) रिपोर्ट – वैश्विक तेल बाजार पर आधिकारिक आंकड़े।

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