US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस 2,965 डॉलर, भारतीयों पर सीधा असर
US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस बढ़ोतरी से कौन प्रभावित होगा?
US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में की गई ताज़ा बढ़ोतरी से अमेरिका में काम करने और पढ़ने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स व छात्रों पर सीधा असर पड़ने जा रहा है। US Citizenship and Immigration Services (USCIS) ने प्रीमियम प्रोसेसिंग की फीस में यह वृद्धि 1 मार्च से लागू करने का फैसला किया है, ताकि जून 2023 से जून 2025 के बीच की मुद्रास्फीति को समायोजित किया जा सके। US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में यह संशोधन रोज़गार आधारित और अन्य नॉन-इमिग्रेंट कैटेगरी की तेज़ निपटान सुविधा को जारी रखने के उद्देश्य से किया गया है।
नई प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस: H‑1B, I‑129 और I‑140 पर क्या बदला
US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस के तहत Form I‑129 की अलग-अलग श्रेणियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। USCIS के अनुसार H‑2B या R‑1 नॉनइमिग्रेंट स्टेटस के लिए दाखिल होने वाली Form I‑129 याचिकाओं की प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस 1,685 डॉलर से बढ़ाकर 1,780 डॉलर कर दी गई है। इसी तरह, H‑1B, L‑1, O‑1, P‑1 और TN वीज़ा सहित Form I‑129 की अन्य सभी उपलब्ध क्लासिफिकेशन के लिए प्रीमियम प्रोसेसिंग का शुल्क 2,805 डॉलर से बढ़कर 2,965 डॉलर कर दिया गया है, जो सीधे US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में बढ़ोतरी को दर्शाता है। USCIS ने यह भी स्पष्ट किया है कि Form I‑140 (Immigrant Petition for Alien Worker) के लिए भी वही 2,965 डॉलर की प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस लागू होगी, जबकि पहले यह शुल्क 2,805 डॉलर था। इसका मतलब है कि अब रोज़गार आधारित इमिग्रेंट वीज़ा याचिकाओं के प्रीमियम प्रोसेसिंग के लिए नियोक्ताओं और विदेशी प्रोफेशनल्स को अधिक शुल्क देना होगा। यह बढ़ी हुई US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस न केवल अस्थायी नॉनइमिग्रेंट वीज़ा पर बल्कि दीर्घकालिक रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर भी लागत का दबाव बढ़ाती है।
स्टूडेंट वीज़ा, OPT और स्टेटस चेंज पर नई लागत
प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में यह संशोधन केवल H‑1B या I‑140 तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टूडेंट और एक्सचेंज विज़िटर कैटेगरी को कवर करने वाली आवेदनों पर भी लागू होता है। Form I‑539, जो F‑1 और F‑2 स्टूडेंट्स, J‑1 और J‑2 एक्सचेंज विज़िटर्स तथा M‑1 और M‑2 वोकेशनल स्टूडेंट्स के लिए स्टेटस बढ़ाने या बदलने हेतु दाखिल की जाती है, उसकी प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस 1,965 डॉलर से बढ़कर 2,075 डॉलर कर दी गई है। इस प्रकार, US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस के साथ-साथ स्टूडेंट संबंधित प्रीमियम सेवाओं की कुल लागत भी बढ़ गई है।
रोज़गार प्राधिकरण को जल्दी हासिल करने के इच्छुक आवेदकों के लिए Form I‑765 पर भी असर पड़ा है। USCIS के मुताबिक, Optional Practical Training (OPT) और STEM‑OPT क्लासिफिकेशन सहित I‑765 आवेदनों की प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस 1,685 डॉलर से बढ़ाकर 1,780 डॉलर कर दी गई है, जिससे छात्रों और नियोक्ताओं दोनों को तेज़ निर्णय के बदले अधिक शुल्क चुकाना पड़ेगा। यह कदम उन भारतीय छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो अमेरिकी विश्वविद्यालयों से ग्रेजुएशन के बाद OPT और STEM‑OPT के ज़रिए H‑1B जैसे लंबे समय के वर्क वीज़ा तक पहुंचने का रास्ता बनाते हैं। USCIS ने स्पष्ट किया है कि प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में वृद्धि से मिलने वाली अतिरिक्त आय का उपयोग एजेंसी के परिचालन को मज़बूत करने में किया जाएगा। नोटिस के अनुसार यह राजस्व प्रीमियम प्रोसेसिंग सेवाएं प्रदान करने, निपटान प्रक्रियाओं में सुधार करने, बैकलॉग सहित निपटान मांगों को संबोधित करने और USCIS के एडजुडिकेशन तथा नैचुरलाइजेशन सेवाओं को फंड करने में लगाया जाएगा। इस प्रकार, US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में किया गया यह समायोजन केवल फीस बढ़ोतरी नहीं, बल्कि संपूर्ण इमिग्रेशन सिस्टम की दक्षता बढ़ाने की योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
फीस में इस बदलाव का सीधा असर विशेष रूप से भारतीय प्रोफेशनल्स, स्टूडेंट्स और नियोक्ताओं पर पड़ेगा, जो H‑1B, L‑1, रोज़गार आधारित ग्रीन कार्ड और OPT फाइलिंग्स में प्रमुख हिस्सेदारी रखते हैं। प्रीमियम प्रोसेसिंग सुविधा का इस्तेमाल आमतौर पर उन नियोक्ताओं और आवेदकों द्वारा किया जाता है, जिन्हें नौकरी बदलने, वीज़ा एक्सटेंशन, अंतरराष्ट्रीय यात्रा की योजना या स्टेटस की निश्चितता के लिए तेज़ निर्णय की ज़रूरत होती है। चूंकि भारतीय नागरिक US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस वाली रोज़गार आधारित वीज़ा कैटेगरी के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं, इसलिए उनके कुल इमिग्रेशन बजट पर यह वृद्धि और भी अधिक महसूस की जाएगी। Optional Practical Training और STEM‑OPT एक्सटेंशन का उपयोग अमेरिकी डिग्री प्राप्त करने वाले भारतीय छात्रों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है, ताकि वे लंबी अवधि के H‑1B जैसे वर्क वीज़ा तक पहुंचने से पहले व्यावहारिक अनुभव हासिल कर सकें। प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में वृद्धि के बावजूद कई नियोक्ता और छात्र समय पर निर्णय और प्रोसेसिंग की निश्चितता के लिए इस सेवा को चुनना जारी रख सकते हैं, खासकर जब नौकरी के ऑफर, प्रोजेक्ट डेडलाइन और वीज़ा वैधता की समय सीमाएं काफ़ी कड़ी हों। कुल मिलाकर, US H‑1B वीज़ा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस में यह संशोधन अमेरिका में रोजगार और शिक्षा के अवसर तलाश रहे भारतीय आवेदकों के लिए योजना और बजट दोनों स्तरों पर नई रणनीति की मांग करेगा।

