ईरान प्रदर्शन पर ट्रंप की कड़ी चेतावनी: ‘Locked and Loaded’, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या पर सैन्य दखल की धमकी
ईरान प्रदर्शन पर ट्रंप की चेतावनी: Locked and Loaded
ईरान प्रदर्शन पर ट्रंप की चेतावनी ने मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा दिया है, जहां देश भर में आर्थिक संकट के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शनों के बीच कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारता है तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यदि ईरान की सुरक्षा एजेंसियां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाकर उन्हें हिंसक तरीके से मारती हैं, तो संयुक्त राज्य अमेरिका “उनकी मदद के लिए पहुंचेगा” और इसके लिए वह “Locked and Loaded और तैयार” है। इस तीखी टिप्पणी ने यह संकेत दिया कि ईरान प्रदर्शन पर ट्रंप की चेतावनी केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि संभावित सैन्य या कड़े भू-राजनीतिक कदमों की ओर इशारा भी मानी जा रही है।
ईरान में बीते कुछ दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम सात लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। ये प्रदर्शन राजधानी तेहरान से शुरू हुए, जहां रविवार को बाजारों और दुकानों के कारोबारियों ने अपनी दुकानों के शटर गिराकर सरकार की आर्थिक नीतियों, तेज़ी से गिरती मुद्रा और महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरकर नाराज़गी जताई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में मुद्रास्फीति दर 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसने आम लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी पर भारी दबाव बना दिया है।
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आर्थिक संकट से भड़के देशव्यापी प्रदर्शन
तेहरान में शुरू हुए ये प्रदर्शन जल्दी ही देश की अन्य प्रमुख विश्वविद्यालयों और शहरों तक फैल गए, जहां कम से कम दस बड़े विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भी सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में हिस्सा लिया। छात्रों के जुड़ने के बाद आंदोलन और ज्यादा संगठित और तीव्र हो गया, जिसके चलते कई बाज़ारों ने अपने शटर पूरी तरह बंद कर दिए और सरकार को अत्यधिक ठंड का हवाला देकर अवकाश घोषित करना पड़ा, जिससे व्यावहारिक रूप से देश के बड़े हिस्से की आर्थिक गतिविधियां ठप हो गईं।
बीते 24 घंटों में यह विरोध लहर कई प्रांतों तक फैल चुकी है, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई जगह झड़पें हुईं और कुछ स्थानों पर हालात हिंसक टकराव में बदल गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, वाहनों में आग लगा दी और सरकारी इमारतों के बाहर नारेबाज़ी की, जबकि सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। इस पृष्ठभूमि में ईरान प्रदर्शन पर ट्रंप की चेतावनी को ईरानी सरकार की कार्रवाई पर बाहरी दबाव बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों ने दावा किया है कि प्रदर्शन की आड़ में कुछ सशस्त्र “गड़बड़ी फैलाने वाले” भीड़ में घुस आए, जिन्होंने सुरक्षा बलों पर गोली चलाने की कोशिश की और हिंसा को और भड़काया। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि बाद में अधिकारियों ने कुछ लोगों से अवैध हथियार बरामद किए हैं, हालांकि स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
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सरकार की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य
ईरान की असैन्य सरकार, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन कर रहे हैं, ने सार्वजनिक रूप से यह दिखाने की कोशिश की है कि वह प्रदर्शनकारियों की आर्थिक परेशानियों को समझती है और उनसे संवाद के लिए तैयार है। पेजेश्कियन ने राज्य टीवी पर प्रसारित एक कार्यक्रम में कहा कि “इस्लामी दृष्टिकोण से यदि हम लोगों की रोज़ी-रोटी की समस्याओं को हल नहीं कर पाते, तो अंततः हम नरक में जाएंगे,” जो इस बात का संकेत है कि सरकार जनता की नाराज़गी को केवल विदेशी साज़िश बताकर नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती।
विश्लेषकों के अनुसार लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में धकेल दिया है, क्योंकि ये प्रतिबंध तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों से जुड़े हैं। तेल निर्यात पर पाबंदियों, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रतिबंधों और निवेश पर रोक ने सरकारी खजाने पर भारी दबाव डाला है, जबकि हाल ही में इज़राइल के साथ 12 दिन तक चले संघर्ष ने सैन्य खर्च बढ़ाकर वित्तीय स्थिति को और कमजोर कर दिया है। ऐसे माहौल में ईरान प्रदर्शन पर ट्रंप की चेतावनी ने भू-राजनीतिक तनाव को नए स्तर पर पहुंचा दिया है, क्योंकि किसी भी प्रकार के अमेरिकी हस्तक्षेप से क्षेत्र में व्यापक टकराव का खतरा बढ़ सकता है।
नीति विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के भीतर आर्थिक असंतोष, राजनीतिक नाराज़गी और अंतरराष्ट्रीय दबाव का यह संगम बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां एक तरफ जनता रोजमर्रा की महंगाई और बेरोज़गारी से जूझ रही है, तो दूसरी तरफ सत्ता प्रतिष्ठान सत्ता और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। ऐसे में भावनात्मक रूप से भरी भीड़भाड़ वाली सड़कों पर किसी भी तरह की अतिरिक्त हिंसा या बाहरी सैन्य संकेत पूरे क्षेत्र के लिए अस्थिरता का कारण बन सकते हैं, इसलिए ईरान सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पर यह जिम्मेदारी है कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति के रास्ते तलाशें।

