चीनी जासूसी कांड से ब्रिटिश राजनीति में भूचाल, सुरक्षा बनाम व्यापारिक हित पर सवाल
चीनी जासूसी कांड से ब्रिटेन की सरकार में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। इस मामले के अचानक खारिज होने के बाद प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार घिरती नजर आ रही है। विपक्ष और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बीजिंग को खुश करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया गया है।
मामले की शुरुआत और बड़ा मोड़
सितंबर 2025 में एक अहम मुकदमा अचानक खारिज कर दिया गया, जिसमें दो ब्रिटिश नागरिकों पर चीन के लिए जासूसी करने का आरोप था। क्रिस्टोफर कैश और क्रिस्टोफर बेरी नामक इन दोनों पर 2021 से 2023 के बीच संवेदनशील जानकारी देने का आरोप लगा था। पुलिस ने मार्च 2023 में उन्हें गिरफ्तार किया और अप्रैल 2024 में आधिकारिक रहस्य अधिनियम 1911 के तहत आरोप लगाए गए थे। लेकिन मुकदमे की शुरुआत से कुछ सप्ताह पहले सरकारी अभियोजक ने इसे वापस ले लिया।
ब्रिटेन के मुख्य अभियोजक स्टीफन पार्किंसन ने बताया कि जुलाई 2024 में उच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद कानूनी आवश्यकताएं बदल गईं। अब अभियोजन पक्ष को यह साबित करना था कि उस समय चीन ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा था। लेकिन सरकार इस बात के ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। अगस्त 2025 तक स्पष्ट हो गया कि बिना सबूत मामला आगे नहीं बढ़ेगा।
विवाद की जड़ और विपक्ष के आरोप
मुकदमे से जुड़े गवाह बयानों में बड़ा बदलाव विवाद का केंद्र बन गया। डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर मैट कॉलिन्स के शुरुआती बयान में जासूसी की विस्तृत जानकारी थी। लेकिन बाद के बयानों में चीन के साथ “सकारात्मक संबंध” पर जोर दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि यह घोटाले की बदबू है और प्रधानमंत्री ने संसद को गुमराह किया है।
अक्टूबर 2024 में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पॉवेल ने ट्रेजरी के दबाव में एक बड़ी जांच रिपोर्ट को दबा दिया था, ताकि चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते प्रभावित न हों। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने संसद में बचाव करते हुए कहा कि मुख्य बयान पूर्व सरकार के समय दिए गए थे और सुरक्षा सलाहकार की कोई भूमिका नहीं थी।
इस पूरे चीनी जासूसी कांड ने ब्रिटेन की चीन नीति पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां सुरक्षा एजेंसियां चीनी जासूसी को लेकर चेतावनी देती रही हैं, वहीं सरकार आर्थिक रिश्तों को बनाए रखना चाहती है। अगस्त 2024 में स्टार्मर ने चीन के राष्ट्रपति से फोन पर बात की और बाद में स्वीकार किया कि चीन के अनुरोध पर दूतावास योजना पर रोक लगा दी गई थी।
यह मामला यह बड़ा सवाल उठाता है — क्या ब्रिटेन व्यापारिक हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता कर रहा है? सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार चीनी खुफिया सेवाएं बड़े पैमाने पर जासूसी में शामिल हैं। लेकिन सरकारी दस्तावेज “सकारात्मक संबंध” की बात करते हैं, जो इस संकट की जड़ है।
लिबरल डेमोक्रेट्स ने वैधानिक जांच की मांग की है। आरोपी क्रिस्टोफर कैश ने खुद को निर्दोष बताया है। वहीं चीनी दूतावास ने इन सभी आरोपों को “गढ़ी हुई” और “दुर्भावनापूर्ण बदनामी” करार दिया है।
यह चीनी जासूसी कांड ब्रिटिश सरकार के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। यह प्रकरण लंबे समय तक ब्रिटिश राजनीति को प्रभावित करेगा और चीन के साथ रिश्तों की दिशा तय करेगा। आधुनिक युग में जब राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हित आपस में टकराते हैं, तब जासूसी के ऐसे मामले और भी संवेदनशील बन जाते हैं।
अधिक जानकारी के लिए देखें: BBC

