ट्रंप का ग्रीनलैंड मनी प्लान: हर व्यक्ति को $100,000, कुल पैकेज लगभग $6 बिलियन

ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान: हर ग्रीनलैंडर को $100,000 ऑफर

ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान: हर ग्रीनलैंडर को मोटी रकम की तैयारी

ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान के तहत अमेरिका में ऐसी रणनीति पर चर्चा चल रही है, जिसमें ग्रीनलैंड के हर निवासी को सीधे नकद भुगतान की पेशकश की जा सकती है, ताकि वे डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के साथ जुड़ने पर विचार करें। व्हाइट हाउस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने इस प्लान के तहत प्रति व्यक्ति 10,000 डॉलर से लेकर 100,000 डॉलर तक की एकमुश्त राशि देने पर चर्चा की है, जो सीधे ग्रीनलैंड के लोगों को दी जा सकती है। कुल मिलाकर यह पैकेज लगभग 6 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिसे ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान का सबसे आकर्षक हिस्सा माना जा रहा है। ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का स्वायत्त विदेशी क्षेत्र है और जहां लगभग 57,000 लोग रहते हैं, लंबे समय से अपनी स्वतंत्रता और डेनमार्क पर आर्थिक निर्भरता के बीच संतुलन खोजने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान सीधे तौर पर उन नागरिकों को लुभाने की कोशिश है, जो भविष्य में स्वतंत्रता या किसी नए राजनीतिक विकल्प पर विचार कर सकते हैं।

अभी एक्सक्लूसिव ऑनलाइन ऑफर देखें यहाँ क्लिक करें

डेनमार्क की सख्त चेतावनी और सैन्य विकल्प

इस कथित मनी प्लान के बीच डेनमार्क ने भी अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है और साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह के सैन्य अतिक्रमण की स्थिति में उसकी सेना तुरंत जवाबी कार्रवाई करेगी। डेनिश रक्षा मंत्रालय ने 1952 के एक नियम का हवाला दिया, जिसके तहत सैनिकों को आदेश का इंतजार किए बिना ही किसी भी घुसपैठिए के खिलाफ ‘पहले गोली, बाद में सवाल’ की नीति पर चलने का निर्देश है। डेनमार्क की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह नियम आज भी प्रभावी है और ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी, चाहे संभावित खतरा किसी भी देश से क्यों न हो। यही वजह है कि ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान के साथ-साथ सैन्य विकल्प की चर्चा भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई बहस छेड़ रही है, जिसे कई विशेषज्ञ अत्यधिक आक्रामक और संवेदनशील मान रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, व्हाइट हाउस के भीतर ग्रीनलैंड को किसी न किसी रूप में हासिल करने पर काफी समय से चर्चा चल रही है और यह मुद्दा ट्रंप के पद संभालने से पहले से उनके एजेंडा में रहा है। हाल में कुछ अन्य सफल भू-राजनीतिक अभियानों के बाद इस विषय पर फिर से तेजी से बातचीत शुरू हुई, जिसमें ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान के साथ सैन्य शक्ति के संभावित उपयोग की संभावना भी शामिल बताई जा रही है।

स्मार्ट तरीके से ऑनलाइन कमाई शुरू करें अभी

रणनीतिक महत्व, COFA विकल्प और जनमत

ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से अत्यंत रणनीतिक है, क्योंकि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच वहां सैन्य और संसाधन-संबंधी उपस्थिति से विरोधियों को रोका जा सकता है। उनका मानना है कि डेनमार्क इतने बड़े रणनीतिक बोझ को संभालने में सक्षम नहीं है, इसलिए ग्रीनलैंड को अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र में आना चाहिए, और इसी सोच से ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान का विचार भी जुड़ा हुआ है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के बीच एक और विकल्प ‘कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन’ (COFA) जैसा समझौता है, जिसे कुछ छोटे द्वीपीय देशों – माइक्रोनेशिया, मार्शल आइलैंड्स और पलाऊ – के साथ पहले भी किया जा चुका है। इन COFA समझौतों में आमतौर पर अमेरिका डाक, रक्षा और अन्य अहम सेवाएं मुहैया कराता है, बदले में वहां अमेरिकी सेना को मुक्त रूप से संचालन का अधिकार मिलता है और अमेरिका के साथ व्यापार पर ज्यादातर शुल्क नहीं लगता।

अपने खाली समय को ऑनलाइन इनकम में बदलें

अगर ग्रीनलैंड के साथ COFA जैसा मॉडल लागू करना हो तो पहले उसे डेनमार्क से औपचारिक रूप से अलग होना पड़ेगा, जिसके लिए किसी तरह के जनमत संग्रह या स्वतंत्रता संबंधी वोट की जरूरत होगी। ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान के समर्थकों का मानना है कि प्रति व्यक्ति 100,000 डॉलर तक की पेशकश ग्रीनलैंडर्स को स्वतंत्रता के पक्ष में वोट देने या बाद में COFA समझौते को स्वीकार करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि ग्रीनलैंड के अधिकांश लोग दीर्घकालिक रूप से स्वतंत्रता के विचार के प्रति सकारात्मक हैं, लेकिन डेनमार्क से आर्थिक सहयोग और कल्याणकारी सुविधाओं के खत्म होने की आशंका उन्हें तुरंत अलग होने के फैसले से रोक रही है। साथ ही, कई सर्वे यह भी दिखाते हैं कि भले ही वे डेनमार्क से अलग होने के सवाल पर खुले हों, लेकिन अधिकांश ग्रीनलैंडर्स अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहते, जिससे ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान के सामने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक अवरोध खड़ा हो जाता है।

सिर्फ एक क्लिक में नए रिवॉर्ड्स अनलॉक करें

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ कहा कि अब ‘एनेक्सेशन की कल्पनाओं’ को खत्म करने का समय आ गया है और उनकी सरकार किसी भी जबरन कब्जे या सौदेबाजी को स्वीकार नहीं करेगी। इस सख्त संदेश ने डेनमार्क की चेतावनी और ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान के बीच चल रही भू-राजनीतिक रस्साकशी को और अधिक तीखा बना दिया है, जो आने वाले दिनों में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के रिश्तों की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल, कई अहम सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं, जैसे कि यह भुगतान किस रूप में और कब किया जाएगा, और ग्रीनलैंडर्स से बदले में किस प्रकार की राजनीतिक प्रतिबद्धता की अपेक्षा की जाएगी। इतना साफ है कि ट्रंप ग्रीनलैंड मनी प्लान न केवल आर्थिक पैमाने पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और स्थानीय जनमत के लिहाज से भी एक बेहद जटिल और विवादित पहल बनने जा रहा है।

आज ही सबसे ज्यादा पे करने वाले ऑफर टेस्ट करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!