ट्रंप का $100K H-1B वीज़ा शुल्क: भारतीय पेशेवरों के लिए अहम जानकारी
$100K H-1B वीज़ा शुल्क पर भारतीयों के लिए अहम स्पष्टीकरण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के $100K H-1B वीज़ा शुल्क से जुड़े अचानक बदलावों ने भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों को चिंतित कर दिया था। माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, मेटा और जेपी मॉर्गन जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को चेतावनी दी कि समय पर अमेरिका नहीं लौटने पर वे फंस सकते हैं या प्रवेश से वंचित हो सकते हैं। लेकिन व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि मौजूदा वीज़ा धारकों को अमेरिका लौटने के लिए कोई $100K शुल्क नहीं देना होगा।
व्हाइट हाउस की तीन बिंदुओं में सफाई
व्हाइट हाउस प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि $100K H-1B वीज़ा शुल्क केवल नए वीज़ा आवेदनों पर लागू होगा। यह वार्षिक शुल्क नहीं है बल्कि एक बार का शुल्क है। मौजूदा H-1B वीज़ा धारक जो वर्तमान में देश से बाहर हैं, उनसे यह राशि नहीं ली जाएगी और वे सामान्य नियमों के तहत अमेरिका में आ-जा सकते हैं। यह नियम नवीनीकरण पर भी लागू नहीं होगा बल्कि केवल अगले लॉटरी चक्र से शुरू होने वाले नए आवेदनों पर लागू होगा।
भारतीय पेशेवरों के लिए राहत
भारत H-1B वीज़ा कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के अनुसार, कुल स्वीकृत H-1B आवेदनों में भारतीयों का हिस्सा लगभग 71% है। मौजूदा शुल्क जहां 2,000 से 5,000 डॉलर तक था, अब नए आवेदनों के लिए $100K H-1B वीज़ा शुल्क वसूलने का निर्णय आईटी कंपनियों और कुशल पेशेवरों पर असर डाल सकता है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने भी चेताया कि यह बदलाव परिवारों के लिए मानवीय संकट खड़ा कर सकता है।
ट्रंप ने कहा कि H-1B वीज़ा कार्यक्रम का उद्देश्य अमेरिका में अस्थायी उच्च-कुशल कार्यबल लाना था, लेकिन इसका दुरुपयोग करके अमेरिकी श्रमिकों की जगह कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों को रखा गया। उनके अनुसार, इस दुरुपयोग ने अमेरिकी श्रम बाजार और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर किया है।
इस प्रकार, भारतीय H-1B धारकों को जल्दबाजी में अमेरिका लौटने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वैध वीज़ा धारकों के लिए प्रवेश शर्तें अपरिवर्तित हैं और $100K H-1B वीज़ा शुल्क केवल नए आवेदनों पर लागू होगा।
बाहरी लिंक सुझाव: USCIS आधिकारिक वेबसाइट

