शेख हसीना मौत सजा विवाद: मुहम्मद यूनुस सरकार पर अवामी लीग के गंभीर आरोप और अशांति की आशंका
शेख हसीना मौत सजा विवाद पर बढ़ते प्रश्न
शेख हसीना मौत सजा विवाद ने बांग्लादेश की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचा दी है, जहां मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार के खिलाफ अवामी लीग ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शेख हसीना मौत सजा विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब ढाका स्थित इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके करीबी सहयोगी को पिछले वर्ष हुए छात्र आंदोलन पर कठोर कार्रवाई के लिए मौत की सजा सुनाई। अवामी लीग का दावा है कि यह निर्णय एक “पूर्व नियोजित न्यायिक ड्रामा” है।
अवामी लीग नेता मोहिबुल हसन चौधरी, जिन्होंने हसीना सरकार में मंत्री के तौर पर काम किया, ने आरोप लगाया कि यह फैसला पहले से लिखित था और अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री को उचित बचाव का अवसर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि शेख हसीना मौत सजा विवाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश है और अंतरिम शासन देश को गृहयुद्ध की ओर धकेल रहा है। उनके अनुसार ट्रिब्यूनल का गठन ही अवैध था, क्योंकि अंतरिम सरकार को कानून में संशोधन करने का अधिकार नहीं था।
चौधरी ने यह भी बताया कि हसीना को वकील चुनने का अधिकार तक नहीं दिया गया और जिन वरिष्ठ वकीलों ने उनका पक्ष लेना चाहा, उन्हें अदालत में प्रवेश से रोक दिया गया। उन्होंने इसे एकतरफा मुकदमा बताते हुए दावा किया कि शेख हसीना मौत सजा विवाद के पीछे राजनीतिक प्रतिशोध है।
जब पूछा गया कि अवामी लीग का भविष्य क्या होगा, जिसे यूनुस सरकार चुनाव लड़ने से रोक चुकी है, तो उन्होंने कहा कि यह पार्टी हमेशा जनता के समर्थन के दम पर लौटी है और भविष्य में भी ऐसा ही होगा। उन्होंने चुनौती दी कि यदि मौजूदा शासन को अपने समर्थन पर भरोसा है तो वह पार्टी को चुनाव में भाग लेने दे।
उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों को “शाम चुनावी प्रक्रिया” बताकर जनता से इसमें भाग न लेने की अपील की जाएगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूनुस सरकार पाकिस्तान आधारित आतंकी नेटवर्क जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से संपर्क बना रही है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा बढ़ रहा है।
चौधरी ने सवाल उठाया कि पाकिस्तान के कट्टरपंथी नेताओं और सैन्य अधिकारियों को बांग्लादेश क्यों बुलाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह सब देश को अस्थिर बनाए रखने और सत्ता पर पकड़ बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी और शेख हसीना मौत सजा विवाद के बावजूद लोकतांत्रिक ताकतें फिर उभरेंगी।
इसी बीच ढाका ट्रिब्यूनल ने हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान को छात्रों पर घातक बल प्रयोग का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई, जबकि दोनों भारत में रह रहे हैं और प्रत्यर्पण की संभावना कम है। हसीना का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीतिक और पक्षपातपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हिंसा रोकना था, न कि छात्रों पर हमला करना।
अवामी लीग ने फैसले के विरोध में राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है। यदि हसीना 30 दिनों में आत्मसमर्पण नहीं करतीं तो वह अपील नहीं कर पाएंगी। शेख हसीना मौत सजा विवाद आने वाले समय में देश की राजनीति पर गहरी छाप छोड़ सकता है।

