10% Global Tariff: सुप्रीम कोर्ट के 6-3 फैसले के बाद ट्रंप का नया 150 दिन वाला टैरिफ कदम
10% Global Tariff: ट्रंप का नया टैरिफ आदेश और समायोजन प्रक्रिया की शुरुआत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने US Supreme Court द्वारा पहले लगाए गए व्यापक टैरिफ को खारिज किए जाने के कुछ घंटे बाद ही दुनिया भर से होने वाले आयात पर नया 10% Global Tariff लागू कर दिया। यह नया आदेश एक अलग कानून के तहत लाया गया है, जो सरकार को अधिकतम 150 दिनों तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की अनुमति देता और इसके तहत यह 10% टैरिफ लगभग तुरंत प्रभाव से लागू होगा। ट्रंप ने साफ कहा कि इस नए 10% Global Tariff के साथ अब एक “समायोजन प्रक्रिया” शुरू हो रही है, जिसके जरिए उनकी प्रशासनिक आर्थिक रणनीति को नए ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह कदम न केवल पहले वाले टैरिफ के प्रभाव को बनाए रखेगा, बल्कि अमेरिका के लिए और भी अधिक राजस्व जुटाने का रास्ता खोलेगा।
Supreme Court के 6-3 फैसले के बाद ट्रंप की नाराजगी
US Supreme Court ने 6-3 के फैसले में ट्रंप के उन व्यापक टैरिफ को खारिज कर दिया, जो उन्होंने 1977 के आपातकालीन कानून के तहत लागू किए थे और जिन्हें लेकर उन्होंने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को झकझोर दिया था। कोर्ट का कहना था कि यह आपातकालीन कानून राष्ट्रपति को इतने व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता, जिससे राष्ट्रपति पद की शक्तियों और संसद की कराधान संबंधी अधिकारों के बीच संतुलन बिगड़ता है। यह फैसला ट्रंप की आर्थिक नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
फैसले के बाद ट्रंप ने Supreme Court के कुछ जजों पर तीखा हमला बोला और कहा कि जिन्हें उन्होंने सही और स्वीकार्य TARIFFS पद्धति के खिलाफ वोट दिया, उन्हें खुद पर शर्म आनी चाहिए। Truth Social पर पोस्ट करते हुए उन्होंने इस निर्णय को “हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि अब समायोजन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और वे पहले से भी ज्यादा पैसा इकट्ठा करने की पूरी कोशिश करेंगे। ट्रंप ने आगे कहा कि वे Supreme Court के कुछ सदस्यों से “शर्मिंदा” हैं क्योंकि उनके अनुसार उन जजों में देश के हित में सही कदम उठाने का साहस नहीं दिखा। उन्होंने उन पर यह आरोप भी लगाया कि वे तथाकथित RINOS और कट्टर वामपंथी डेमोक्रेट्स के लिए “लैपडॉग्स” की तरह काम कर रहे हैं और संविधान के प्रति गैर-देशभक्त और अविश्वासी हैं। यह बयान राष्ट्रपति और न्यायपालिका के रिश्तों में आई कड़वाहट को खुलकर दर्शाता है।
10% Global Tariff के कानूनी आधार और 150 दिन की सीमा
नया 10% Global Tariff 1974 के Trade Act की एक अलग धारा के तहत लागू किया जा रहा है, जो राष्ट्रपति को बड़े और गंभीर बैलेंस ऑफ पेमेंट्स मुद्दों की स्थिति में अधिकतम 15% तक का टैरिफ 150 दिनों के लिए लगाने की अनुमति देती है। इस प्रावधान के तहत ट्रंप ने 10% Global Tariff का रास्ता चुना है, ताकि पहले वाले आपातकालीन कानून के स्थान पर एक ऐसा कानूनी ढांचा अपनाया जा सके जिसे पहले ही कानून के रूप में स्वीकार और परखा जा चुका है।
इस नए टैरिफ के लागू होते ही, पहले के 10% से 50% तक के वे टैरिफ समाप्त हो जाएंगे जिन्हें Supreme Court ने अवैध करार दिया था और जो 1977 के International Emergency Economic Powers Act के तहत लगाए गए थे। अब 150 दिनों के बाद अगर इन टैरिफ को आगे बढ़ाना होगा तो इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी, यानी कार्यपालिका की शक्ति पर विधायिका की औपचारिक निगरानी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी।
ट्रंप का कहना है कि उन्होंने बीते वर्ष में टैरिफ का प्रभावी इस्तेमाल करके अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है और “MAKE AMERICA GREAT AGAIN” के अपने नारे को आर्थिक मोर्चे पर साकार किया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिकी शेयर बाजार में DOW ने 50,000 और S&P ने 7,000 का स्तर पार किया, जिसे उनकी भारी चुनावी जीत के बाद चार साल के कार्यकाल के अंत तक ही संभव माना जा रहा था। ट्रंप इन आंकड़ों को अपनी टैरिफ नीति की सफलता के प्रमाण के रूप में पेश कर रहे हैं।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि टैरिफ के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती दी है और मजबूत बॉर्डर नीति के साथ मिलकर देश में अवैध रूप से आने वाले फेंटानिल को 30% तक घटाया है। वे कहते हैं कि जिन टैरिफ को कोर्ट ने खारिज किया है उनकी जगह अब अन्य विकल्प अपनाए जाएंगे, जबकि बाकी टैरिफ पहले की तरह लागू रहेंगे। इस तरह नया 10% Global Tariff उनके लिए नीतिगत समायोजन का एक चरण है, न कि पीछे हटने का संकेत।
व्हाइट हाउस में वापसी के महज छह महीने के भीतर ही ट्रंप ने पुराने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को तोड़ते हुए उन देशों पर कड़े टैरिफ लगाने शुरू किए जो एकतरफा व्यापार सौदों पर सहमत नहीं थे। उन्होंने उन देशों से “पारस्परिक” करों की बात करते हुए 50% तक टैरिफ और लगभग सभी अन्य देशों पर 10% “बेसलाइन” टैक्स का एलान किया था। तब उन्होंने व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करते हुए sweeping टैरिफ को उचित ठहराया था, लेकिन अब Supreme Court के फैसले के बाद उन्हें 10% Global Tariff जैसे नए और अपेक्षाकृत सीमित कानूनी विकल्पों की तरफ मुड़ना पड़ रहा है। घोषणा के तुरंत बाद कई देशों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी, जिसके चलते ट्रंप ने पारस्परिक टैरिफ को 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया और देशों को बातचीत का समय दिया। कुछ देशों ने अंततः उनकी शर्तें मान लीं, जबकि जो देश नहीं झुके उन पर और भी सख्त टैरिफ लगा दिए गए। अब 10% Global Tariff के जरिए वे यह संदेश देना चाहते हैं कि Supreme Court के निर्णय के बावजूद उनकी टैरिफ आधारित आर्थिक और राजनीतिक रणनीति किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगी बल्कि एक नए कानूनी रास्ते से आगे बढ़ती रहेगी।


