शाकिब अल हसन और मशरफे की वापसी पर बांग्लादेश सरकार का बड़ा संकेत
शाकिब अल हसन और मशरफे की वापसी पर नया सरकारी रुख
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अब शाकिब अल हसन और मशरफे की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की उम्मीदें तेज़ हो गई हैं। नए नियुक्त राज्य मंत्री (युवा और खेल) अमीनुल हक ने संकेत दिया है कि दोनों दिग्गज क्रिकेटरों के खिलाफ चल रहे मामलों को तेज़ी से निपटाने की दिशा में सरकार गंभीरता से काम करेगी, ताकि उनकी मैदान पर वापसी संभव हो सके।
अमीनुल हक, जो बांग्लादेश फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान रहे हैं, को फरवरी 12 के आम चुनावों में बीएनपी गठबंधन की भारी जीत के बाद युवा और खेल राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। उन्होंने मिरपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ कहा कि शाकिब अल हसन और मशरफे दोनों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सरकार लचीला और सहनशील रुख अपनाएगी, ताकि कानूनी बाधाओं के हटते ही दोनों फिर से बांग्लादेश क्रिकेट से जुड़ सकें।
दर्ज मामलों पर तेज़ सुनवाई की तैयारी
शेख हसीना सरकार के अगस्त 2024 में विरोध प्रदर्शनों के बीच सत्ता से बेदखल होने के बाद से शाकिब अल हसन और मशरफे देश से बाहर हैं और उन पर कई मामलों सहित हत्या जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ी एफआईआर दर्ज की गई हैं। अमीनुल हक ने प्रेस से बातचीत में कहा कि शाकिब और मशरफे से जुड़ा पूरा मामला अब सरकार के दायरे में है, और वे चाहते हैं कि इन मामलों की सुनवाई को तेज़ गति से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ कानूनी प्रक्रिया पूरी करना ही नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि यदि आरोपों से राहत मिलती है, तो शाकिब अल हसन और मशरफे को बांग्लादेश क्रिकेट में वापसी का अवसर भी मिल सके। उनकी बातों से यह संदेश गया है कि नए राजनीतिक परिदृश्य में पूर्व शासक दल के समर्थक रहे इन दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के लिए भी दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं हैं। अमीनुल हक ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर “लचीला” रुख अपनाएगी और मामलों को राज्य स्तर पर ही हैंडल किया जाएगा। उनके मुताबिक, उद्देश्य यह है कि जितनी जल्दी संभव हो, इन मामलों के निष्कर्ष तक पहुंचा जाए, ताकि शाकिब अल हसन और मशरफे फिर से राष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश की प्रतिनिधित्व कर सकें।
शाकिब की वैश्विक लीगों में मौजूदगी, मशरफे की घरेलू सक्रियता
करीब डेढ़ वर्ष से शाकिब अल हसन राष्ट्रीय टीम से बाहर हैं, हालांकि वे दुनिया भर में टी20 फ्रेंचाइज़ी लीगों में सक्रिय बने हुए हैं। बांग्लादेश के लिए उनकी आखिरी टेस्ट उपस्थिति 2024 के अंत में कानपुर में भारत के खिलाफ खेले गए मुकाबले में दर्ज की गई थी, जिसके बाद से वे घरेलू अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हैं। दूसरी ओर, 42 वर्षीय मशरफे 2024 के विद्रोह से पहले तक बांग्लादेश की घरेलू प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से खेलते रहे थे और उन्हें अभी भी देश के सबसे अनुभवी तेज़ गेंदबाजों में गिना जाता है। राजनीतिक परिस्थिति बदलने के साथ-साथ अब यह चर्चा तेज़ है कि यदि मामलों में राहत मिलती है, तो क्या शाकिब अल हसन और मशरफे दोनों किसी रूप में फिर से बांग्लादेश क्रिकेट संरचना का हिस्सा बन पाएंगे। सितंबर 2025 में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम व्यवस्था के दौरान खेल सलाहकार रहे आसिफ महमूद शोइजिब भूयैन ने यह बयान दिया था कि शाकिब को दोबारा बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे एक समय उनकी वापसी लगभग असंभव मानी जाने लगी थी। लेकिन अब नई सरकार में अमीनुल हक का बदला हुआ रुख यह संकेत देता है कि राजनीतिक और खेल दोनों मोर्चों पर समीकरण बदल रहे हैं और शाकिब अल हसन और मशरफे के लिए वापसी की संभावनाएं फिर आकार ले रही हैं।
अमीनुल हक ने यह भी माना कि पिछले वर्षों में हुए बीसीबी चुनावों की पारदर्शिता पर सवाल उठे थे और वे क्रिकेट बोर्ड के साथ बैठकर एक बेहतर और विश्वसनीय व्यवस्था पर काम करना चाहते हैं। इससे यह संदेश जाता है कि प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ खिलाड़ियों के मुद्दों पर भी नए सिरे से विचार किया जाएगा, जिसमें शाकिब अल हसन और मशरफे जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों का भविष्य भी शामिल है। अमीनुल ने बताया कि वे पद संभालते ही भारत के उप उच्चायुक्त से भी मिले और दोनों देशों के बीच खेल से जुड़े मुद्दों को मैत्रीपूर्ण वार्ता के माध्यम से सुलझाने की बात पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है और क्रिकेट सहित खेल जगत की समस्याओं को कूटनीतिक संवाद और आईसीसी के नियमों के तहत हल करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
कुल मिलाकर, नए राजनीतिक परिदृश्य और सरकार के नरम रुख के बीच यह उम्मीद ज़िंदा है कि यदि कानूनी प्रक्रियाएं शाकिब अल हसन और मशरफे के पक्ष में जाती हैं, तो दोनों फिर से बांग्लादेश क्रिकेट के सक्रिय चेहरों के रूप में दिख सकते हैं। फिलहाल पूरा देश इस बात पर नज़र लगाए हुए है कि मामलों की सुनवाई कितनी तेज़ी से आगे बढ़ती है और क्या सचमुच ये दोनों दिग्गज एक बार फिर राष्ट्रीय जर्सी पहनने में सफल होंगे।

