पटना NEET अभ्यर्थी मौत केस 14/26: CBI जांच की सिफारिश, पोस्टमार्टम में यौन उत्पीड़न के संकेत

पटना NEET अभ्यर्थी मौत केस: CBI जांच और न्याय की मांग

पटना NEET अभ्यर्थी मौत मामले में CBI जांच की सिफारिश

पटना NEET अभ्यर्थी मौत मामले ने बिहार में कानून-व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते अब इस संवेदनशील केस को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश की गई है। पटना के चितरगुप्त नगर स्थित एक छात्रावास में रह रही यह NEET की महिला अभ्यर्थी रहस्यमय परिस्थिति में बेहोश मिली थी और बाद में इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिजनों ने यौन उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाया।
बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं गृह विभाग संभाल रहे सम्राट चौधरी ने शनिवार को जानकारी दी कि राज्य सरकार ने पटना NEET अभ्यर्थी मौत मामले (केस संख्या 14/26) की जांच CBI को सौंपने की औपचारिक संस्तुति केंद्र सरकार को भेज दी है।  उनके अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस हत्या के मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायोन्मुख तरीके से हो, ताकि पीड़ित परिवार और समाज का भरोसा बना रहे।
फिलहाल इस मामले की जांच बिहार पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) कर रही है, जिसे अलग-अलग वैज्ञानिक और फॉरेंसिक सबूतों को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी दी गई है। बताया गया कि जांच की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है और इस बीच DNA व अन्य फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिनसे पटना NEET अभ्यर्थी मौत की घटना की सच्चाई स्पष्ट होने की उम्मीद की जा रही है।

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मृतक अभ्यर्थी मूल रूप से जहानाबाद की निवासी थी और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए पटना के चितरगुप्त नगर स्थित एक महिला छात्रावास में रह रही थी। इसी छात्रावास के कमरे में वह इस माह की शुरुआत में संदिग्ध हालात में बेहोश मिली, जिसके बाद उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां कई दिनों तक कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने शुरू से ही आरोप लगाया कि लड़की के साथ यौन उत्पीड़न किया गया और बाद में उसकी हत्या कर मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि शुरूआती जांच के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने गंभीर आरोपों को नज़रअंदाज़ कर प्रकरण को दबाने की कोशिश की, जिसके विरोध में परिवार लगातार उच्च स्तरीय जांच और पटना NEET अभ्यर्थी मौत केस की CBI जांच की मांग करता रहा। इस पूरे प्रकरण ने तब और तूल पकड़ा जब खबर आई कि बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने कथित रूप से मृतका के परिवार को अपने आवास पर बुलाकर उन्हें यह मानने के लिए समझाने की कोशिश की कि यह मामला आत्महत्या का है और यहां यौन उत्पीड़न की कोई घटना नहीं घटी। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि इस तरह के प्रयास से यह संदेश जाता है कि पटना NEET अभ्यर्थी मौत मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने और सच दबाने की कोशिश हो रही है।

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पीड़िता की मां ने राजधानी पटना में DGP आवास के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा कि वे न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं लेकिन उन्हें लगता है कि सिस्टम के भीतर कई लोग मामले को रफा-दफा करने में लगे हुए हैं। उनका आरोप है कि पैसे और प्रभाव के दम पर आरोपियों को बचाने तथा केस को कमजोर करने की कोशिश हो रही है, जिसके चलते उनकी बेटी को न्याय मिलना मुश्किल दिख रहा है। परिवार के वकील ने भी स्पष्ट कहा कि अब जब पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर भरोसा टूट चुका है, तो न्याय पाने का एकमात्र विकल्प अदालत का दरवाजा खटखटाना ही बचा है। उन्होंने बताया कि परिवार पहले ही उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने और जरूरत पड़ने पर उच्चतम न्यायालय तक जाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है, ताकि पटना NEET अभ्यर्थी मौत की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
उधर विपक्षी दल भी इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर हैं और आरोप लगा रहे हैं कि शुरुआत में पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तथा यौन उत्पीड़न की आशंकाओं को नकारने की कोशिश की। विपक्ष का कहना है कि अगर समय रहते पारदर्शी जांच होती और सभी तथ्य सामने लाए जाते तो आज पटना NEET अभ्यर्थी मौत को लेकर इतना बड़ा जनाक्रोश पैदा नहीं होता।

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सरकार की ओर से हालांकि यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और CBI जांच की सिफारिश इसी दिशा में एक मजबूत कदम है। अब पूरा देश और खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं इस बात पर नज़र बनाए हुए हैं कि आगे जांच किस दिशा में बढ़ती है और क्या इस संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार को वास्तविक न्याय मिल पाता है। अंततः यह मामला सिर्फ एक छात्रा की दुखद मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह छात्रावास सुरक्षा, महिला सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता जैसे व्यापक सवाल भी खड़ा कर रहा है। यही कारण है कि पटना NEET अभ्यर्थी मौत की पारदर्शी और त्वरित जांच न केवल एक परिवार के लिए, बल्कि समाज और व्यवस्था पर जनता के भरोसे के लिए भी अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है।

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