कृत्रिम बारिश दिल्ली: प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार की बड़ी पहल

कृत्रिम बारिश दिल्ली से प्रदूषण में राहत

नई दिल्ली: दिवाली से पहले बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को घोषणा की कि यदि मौसम की परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो आने वाले दो से तीन दिनों में कृत्रिम बारिश दिल्ली में की जाएगी। यह निर्णय दिल्ली में GRAP-1 (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू होने के बाद लिया गया है।

कृत्रिम बारिश दिल्ली और क्लाउड सीडिंग क्या है?

क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें विमानों या ड्रोनों की मदद से बादलों में सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड या ड्राई आइस जैसे रसायन छिड़के जाते हैं। ये रसायन बादलों में मौजूद जल कणों को संघनित करने में मदद करते हैं, जिससे बारिश होती है। यह तकनीक दुबई, चीन और अमेरिका जैसे देशों में पहले से इस्तेमाल की जा रही है।

दिल्ली की प्रदूषण समस्या

दिवाली के मौसम में दिल्ली-NCR का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। पटाखों के धुएं, पराली जलाने, वाहनों के उत्सर्जन और ठंड के कारण धुंध के मिश्रण से शहर में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इस साल भी GRAP-1 को लागू करना पड़ा है, जो प्रदूषण नियंत्रण के लिए आपातकालीन उपायों का पहला चरण है।

सरकार का सराहनीय कदम

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की यह घोषणा कई मायनों में सराहनीय है:

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: सरकार ने पारंपरिक उपायों से आगे जाकर आधुनिक विज्ञान और तकनीक का सहारा लिया है। कृत्रिम बारिश दिल्ली में प्रदूषण को तत्काल कम कर सकती है।
  • समय पर कार्रवाई: दिवाली से पहले ही इस योजना की घोषणा करना दूरदर्शिता दर्शाता है।
  • जनता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता: प्रदूषण से होने वाली बीमारियों को देखते हुए यह कदम राहतकारी है।
  • GRAP के साथ समन्वय: क्लाउड सीडिंग और GRAP का संयोजन एक व्यापक रणनीति है।

चुनौतियां और विचारणीय बिंदु

हालांकि यह पहल सराहनीय है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं:

  • मौसम पर निर्भरता: क्लाउड सीडिंग के लिए बादलों का होना जरूरी है।
  • लागत: यह एक महंगी प्रक्रिया है।
  • अस्थायी समाधान: कृत्रिम बारिश दिल्ली में केवल अस्थायी राहत देती है।

दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता

क्लाउड सीडिंग एक आपातकालीन उपाय है, लेकिन दिल्ली के प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निम्नलिखित उपायों में है:

  • पराली जलाने पर प्रभावी रोक
  • सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना
  • हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना
  • औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण
  • वृक्षारोपण अभियान और जनजागरूकता

दिल्ली सरकार द्वारा कृत्रिम बारिश दिल्ली की यह पहल दर्शाती है कि प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि, यह केवल एक अल्पकालिक उपाय है। स्थायी बदलाव के लिए सरकार, उद्योगों और नागरिकों सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

पटाखों का कम इस्तेमाल, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग और पर्यावरण के प्रति जागरूकता ही दीर्घकालिक समाधान हैं। इस दिवाली, आइए संकल्प लें कि हम अपनी राजधानी को फिर से स्वच्छ और हरा-भरा बनाएंगे।

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