भारत ने खारिज किया चीन का दावा: इंडिया-पाक संघर्ष में कोई थर्ड पार्टी दखल नहीं

इंडिया-पाक संघर्ष में कोई थर्ड पार्टी दखल नहीं: भारत की स्पष्ट नीति

इंडिया-पाक संघर्ष में कोई थर्ड पार्टी: भारत की सख्त स्थिति

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि इंडिया-पाक संघर्ष में कोई थर्ड पार्टी दखल स्वीकार्य नहीं है और हालिया सैन्य तनाव के दौरान भी ऐसा कोई मध्यस्थ हस्तक्षेप नहीं हुआ। ऑपरेशन सिंदूर के बाद युद्धविराम पर जो सहमति बनी, वह दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच सीधे संवाद के जरिए तय की गई, न कि किसी बाहरी ताकत की पहल से।

नई दिल्ली के आधिकारिक सूत्रों ने चीन के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें बीजिंग ने इस वर्ष हुए इंडिया-पाक टकराव के दौरान शांति स्थापित करने में कथित मध्यस्थता का श्रेय लिया था। उनके अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद युद्धविराम की पहल पाकिस्तान की ओर से हुई थी और भारत ने केवल सैन्य स्तर पर स्थापित संवाद तंत्र के तहत बातचीत कर एक समझ पर सहमति व्यक्त की, जिसमें इंडिया-पाक संघर्ष में कोई थर्ड पार्टी भूमिका नहीं थी।

चीन की यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब वहां के विदेश मंत्री वांग यी ने एक महत्वपूर्ण भाषण में दावा किया कि बीजिंग ने साल भर में कई “हॉटस्पॉट” क्षेत्रों में तनाव घटाने के लिए मध्यस्थता की है, जिनमें इंडिया-पाक तनाव भी शामिल है। उन्होंने कहा कि चीन ने उत्तरी म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दे, फिलिस्तीन-इज़राइल तथा कंबोडिया-थाईलैंड जैसे कई क्षेत्रों के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद में भी शांति स्थापित करने की दिशा में काम किया।

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भारत की नीति: द्विपक्षीय बातचीत, कोई बाहरी दखल नहीं

भारत ने दोहराया कि 7 से 10 मई तक चले सैन्य टकराव के दौरान सभी सैन्य और कूटनीतिक कदम पूरी तरह द्विपक्षीय स्तर पर उठाए गए। विदेश मंत्रालय ने 13 मई की प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि युद्धविराम से जुड़ी तारीख, समय और भाषा 10 मई 2025 को दोपहर 3:35 बजे शुरू हुई डीजीएमओ की फोन बातचीत में तय हुई थी, जो इस बात का प्रमाण है कि इंडिया-पाक संघर्ष में कोई थर्ड पार्टी शामिल नहीं थी।

भारत की लंबे समय से घोषित नीति रही है कि भारत और पाकिस्तान से जुड़े सभी मसले द्विपक्षीय समझौतों और बातचीत के जरिए ही सुलझाए जाएंगे। इस नीति के तहत न तो किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार की जाती है और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय मंच को विवादों के समाधान के लिए अधिकृत माना जाता है। यही कारण है कि नई दिल्ली ने वाशिंगटन और बीजिंग, दोनों के दावों को “भ्रामक” और “तथ्य-विहीन” बताते हुए खारिज किया।

कूटनीतिक हलकों का मानना है कि शांति प्रक्रियाओं का श्रेय लेने की होड़ में बड़ी शक्तियां अक्सर ऐसे दावे करती रहती हैं, लेकिन भारत अपने संप्रभु अधिकार और निर्णय-स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहता। इसलिए, सरकार ने यह संदेश और अधिक मजबूती से दोहराया कि इंडिया-पाक संघर्ष में कोई थर्ड पार्टी न अतीत में स्वीकृत हुई है और न भविष्य में उसकी कोई गुंजाइश है।

चीन पर अमेरिकी रिपोर्ट और ‘लाइव लैब’ विवाद

इसी बीच एक द्विदलीय अमेरिकी आयोग की हालिया रिपोर्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें आरोप लगाया गया कि चीन ने मई में हुए चार दिवसीय इंडिया-पाक संघर्ष को अपनी उन्नत सैन्य प्रणालियों के परीक्षण और प्रचार के लिए “लाइव लैब” की तरह इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान पाकिस्तान ने चीन से मिले आधुनिक हथियारों और प्लेटफॉर्म का उपयोग किया, जिन्हें वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में परखने का यह पहला बड़ा मौका माना जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि इस संघर्ष के दौरान चीन के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम, एयर-टू-एयर मिसाइलें और लड़ाकू विमान सक्रिय ऑपरेशन में आजमाए गए, ताकि उन्हें भविष्य में सीमा विवादों और निर्यात बाजारों के लिए अधिक आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जा सके। यह भी दावा किया गया कि टकराव खत्म होने के तुरंत बाद बीजिंग ने पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, अवाक्स प्लेटफॉर्म और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे उन्नत हथियारों की पेशकश की।

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नई दिल्ली में सैन्य हलकों ने भी इस पहलू पर चिंता जताई है कि पड़ोसी देश के साथ संघर्ष को चीन ने अपने रणनीतिक हितों और हथियार उद्योग के विस्तार के लिए इस्तेमाल किया। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने अपने प्राचीन सैन्य सिद्धांतों, विशेषकर “उधारी तलवार से वार” जैसी रणनीति का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के माध्यम से भारत पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की। इस संदर्भ में भी भारत का स्पष्ट संदेश रहा कि इंडिया-पाक संघर्ष में कोई थर्ड पार्टी आधिकारिक रूप से शामिल नहीं थी, भले ही परदे के पीछे सैन्य सहयोग के अलग आयाम मौजूद रहे हों।

कुल मिलाकर, भारत ने कूटनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर यह रेखांकित किया है कि उसके लिए संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और निर्णय-स्वतंत्रता सर्वोच्च हैं। इसी सिद्धांत के तहत सरकार ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया कि इंडिया-पाक संघर्ष में कोई थर्ड पार्टी मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी और किसी भी विवाद का समाधान केवल दोनों देशों के बीच सीधे संवाद और आपसी सहमति से ही निकलेगा।

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