जनरल नरवणे की किताब विवाद: Four Stars of Destiny पर Penguin की कड़ी कानूनी चेतावनी
जनरल नरवणे की किताब विवाद पर प्रकाशक की बड़ी सफाई
जनरल नरवणे की किताब विवाद ने देश की राजनीति, संसद की कार्यवाही और प्रकाशन जगत में नई बहस छेड़ दी है, जिसमें पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरणात्मक किताब Four Stars of Destiny के कथित लीक और उसके प्रसार को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि जनरल नरवणे की किताब Four Stars of Destiny पर केवल उसी का विशेष प्रकाशन अधिकार है और यह किताब अभी तक किसी भी रूप में प्रकाशित नहीं हुई है। प्रकाशक के अनुसार न तो प्रिंट कॉपी निकली है, न ही किसी डिजिटल, पीडीएफ या अन्य प्रारूप में इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया गया है। यही वजह है कि कथित रूप से घूम रहीं प्रतियों को वह कॉपीराइट उल्लंघन मानते हुए अवैध बता रहा है।
अपने विस्तृत स्पष्टीकरण में प्रकाशन समूह ने कहा कि जो भी संस्करण अभी सार्वजनिक क्षेत्र में दिखाई दे रहा है, वह चाहे आंशिक हो या पूर्ण, ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, किसी भी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो, वह अधिकृत नहीं है और तुरंत रोकने योग्य कॉपीराइट उल्लंघन की श्रेणी में आता है। जनरल नरवणे की किताब विवाद को लेकर कंपनी ने साफ चेतावनी दी है कि वह ऐसे अनधिकृत प्रसार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी।
Statement from the publisher. pic.twitter.com/pksacg3EeT
— Penguin India (@PenguinIndia) February 9, 2026
दिल्ली पुलिस ने भी इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जनरल नरवणे की किताब Four Stars of Destiny के कथित लीक और अवैध वितरण पर एफआईआर दर्ज की है और मामले की जांच स्पेशल सेल को सौंपी गई है। शिकायतों के आधार पर यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि अप्रकाशित पांडुलिपि के हिस्से किन परिस्थितियों में सार्वजनिक डोमेन तक पहुंचे और उसमें किन लोगों की भूमिका हो सकती है। पुलिस के अनुसार, यह प्रकाशन अभी आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त नहीं कर सका है, इसलिए किसी भी प्रारूप में प्री-प्रिंट या ड्राफ्ट का प्रसार संदेह के घेरे में है। जनरल नरवणे की किताब विवाद तब बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल गया जब कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद परिसर में Four Stars of Destiny की एक प्रति हाथ में लेकर मीडिया के सामने दिखाई और दावा किया कि यह वही किताब है जिसे सरकार और सत्ता पक्ष अस्तित्वहीन बता रहे हैं। राहुल गांधी का आरोप है कि पूर्व थलसेनाध्यक्ष ने 2020 के भारत-चीन लद्दाख सीमा गतिरोध के घटनाक्रम का विस्तृत ब्योरा इस संस्मरण में दर्ज किया है, जिसे जनता से छिपाने की कोशिश की जा रही है।
राहुल गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान इस किताब का उल्लेख करना चाहा और कथित अंश पढ़ने का प्रयास किया, लेकिन यह तर्क देकर रोका गया कि किताब आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है और इसे संसदीय रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। बाद में संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जब स्पीकर, सरकार और रक्षा मंत्री सभी यह कहते हैं कि यह किताब मौजूद नहीं है, तो वे युवाओं को दिखाना चाहते हैं कि यह किताब वास्तव में मौजूद है। विवाद यहीं नहीं थमा। जनरल नरवणे की किताब विवाद के बीच राहुल गांधी ने सार्वजनिक तौर पर यह भी कहा कि या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या फिर प्रकाशक पेंगुइन झूठ बोल रहा है, और ऐसे में वे सेना के पूर्व प्रमुख की बात पर भरोसा करना पसंद करेंगे। उनका दावा है कि किताब में कुछ ऐसे तथ्य हैं जो सरकार के लिए असहज हो सकते हैं और इसी वजह से इसे लेकर टकराव बढ़ रहा है।
लोकसभा के भीतर यह मुद्दा तीखा राजनीतिक टकराव बन गया। जब राहुल गांधी को लगातार दूसरे दिन भी Four Stars of Destiny से जुड़े एक लेख को उद्धृत करने की अनुमति नहीं दी गई, तो विपक्षी दलों ने सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराया। इसके बाद कथित “अव्यवस्थित आचरण” के आरोप में आठ सांसदों को मौजूदा बजट सत्र की पूरी शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया, जिनमें सात कांग्रेस और एक सीपीआई(एम) के सांसद शामिल थे। राहुल गांधी ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर कलंक बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिखा और कहा कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर बोलने से रोका जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्य किताबों और लेखों के हवाले खुले तौर पर देते रहे हैं।
कानूनी दृष्टि से मामला अब भी इस मूल सवाल पर टिका है कि एक अप्रकाशित पांडुलिपि के हिस्से सार्वजनिक क्षेत्र में कैसे पहुंच गए और क्या यह सुरक्षा तथा गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस संभावित लीक या ब्रीच के स्रोत, इसके नेटवर्क और उन व्यक्तियों की शिनाख्त पर काम कर रही है जो डिजिटल या प्रिंट रूप में इन प्रतियों के प्रसार में शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया लगातार दोहरा रहा है कि Four Stars of Destiny का कोई अधिकृत संस्करण अभी तक प्रकाशित, वितरित या बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है और जो भी प्रति बाजार या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिख रही है, वह उसकी अनुमति के बिना है। जनरल नरवणे की किताब विवाद इस तरह अब कॉपीराइट अधिकार, संसदीय विशेषाधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा बहस के चौराहे पर खड़ा एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है, जबकि विवाद के केंद्र में मौजूद किताब आधिकारिक रूप से अब भी अप्रकाशित ही है।

