ED vs Mamata: I-PAC कोयला तस्करी केस की छापेमारी पर सियासी टकराव तेज

ED vs Mamata: I-PAC छापेमारी और कोयला तस्करी केस की जांच

ED vs Mamata मामले ने कोलकाता में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और दफ्तर पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद अचानक जोर पकड़ लिया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद पुलिस अधिकारियों के दल के साथ मौके पर पहुंचीं और इस कार्रवाई को खुलकर राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।

ED vs Mamata: I-PAC छापेमारी से कोयला तस्करी केस पर नई सियासत

ED vs Mamata टकराव की पृष्ठभूमि में केंद्रीय एजेंसी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत I-PAC के सेक्टर V स्थित कार्यालय और प्रतीक जैन के घर पर तलाशी ली गई, जहां से उन्हें कथित रूप से हवाला नेटवर्क के जरिये भेजी गई करोड़ों रुपये की संदेहास्पद रकम से जुड़े सुराग मिले हैं। ED के आधिकारिक बयान के मुताबिक, कथित कोयला तस्करी से अर्जित अवैध धन को कई जिलों में फैक्टरियों और औद्योगिक इकाइयों के जरिये घुमाकर हवाला चैनलों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया और इन्हीं चैनलों के जरिये कथित तौर पर I-PAC तक ‘तेंस ऑफ क्रोर्स’ की रकम पहुंचाई गई, जिसे एजेंसी ने ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ बताया है। एजेंसी का आरोप है कि कोयला तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा एक हवाला ऑपरेटर इस पूरे वित्तीय लेनदेन की कड़ी है, जिसने I-PAC को फंडिंग में अहम भूमिका निभाई, जबकि केस की जांच दिल्ली में दर्ज पुराने कोयला तस्करी मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग FIR पर आधारित है।

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छापेमारी के दौरान CM की एंट्री और ED की आपत्ति

ED vs Mamata विवाद तब और गहरा गया जब एजेंसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में हलफनामा देकर आरोप लगाया कि प्रतीक जैन के घर और I-PAC दफ्तर पर हो रही तलाशी शुरू में शांतिपूर्ण थी, लेकिन ममता बनर्जी के बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ अचानक पहुंचने के बाद जांच में गंभीर व्यवधान पैदा हुआ। एजेंसी का कहना है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की हलचल बढ़ गई, जिससे जब्त किए जा रहे दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइसों की सुरक्षित सीलिंग और रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया प्रभावित हुई, इसी आधार पर ED ने कोर्ट से स्वतंत्र और बिना हस्तक्षेप के जांच जारी रखने के लिए निर्देश मांगे हैं। उधर, I-PAC और प्रतीक जैन की ओर से दायर याचिका में तलाशी की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि केंद्रीय एजेंसी ने जिन प्रावधानों के तहत सर्च वॉरंट जारी किए, वे अस्पष्ट हैं और राजनीतिक कार्यों से जुड़े संवेदनशील डेटा पर इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।

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ममता बनर्जी का शाह पर हमला और ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ का आरोप

ममता बनर्जी ने प्रतीक जैन के घर और बाद में I-PAC कार्यालय का दौरा करने के बाद प्रेस से कहा कि ED vs Mamata प्रकरण असल में भाजपा नेतृत्व वाले केंद्र की ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ है, जिसका मकसद तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक रणनीति, उम्मीदवार सूची और गुप्त चुनावी दस्तावेजों तक पहुंच बनाना है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ‘नॉटी’ और ‘नैस्टियेस्ट होम मिनिस्टर’ बताते हुए आरोप लगाया कि जो व्यक्ति देश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा, वही संवैधानिक एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों को डराने, डेटा कब्जाने और चुनाव से पहले बंगाल में मतदाताओं की सूची से नाम हटवाने जैसे कदम उठा रहा है। >मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि क्या ED और गृह मंत्री का कर्तव्य विपक्षी पार्टी के IT सेल से हार्ड डिस्क, उम्मीदवारों की सूची और रणनीतिक कागजात उठाना है, और क्या किसी निजी राजनीतिक परामर्श कंपनी के दफ्तर को आधिकारिक जांच स्थल की तरह ट्रीट करना कानून की मंशा के अनुरूप कहा जा सकता है। ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि छापेमारी के दौरान ED अधिकारी ‘बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों’ के TMC के दस्तावेज, हार्ड डिस्क और संवेदनशील रणनीतिक कागज जब्त कर रहे थे, जिन्हें उन्होंने मौके पर पहुंचकर वापस लेने की कोशिश की और बाद में हाथ में हरे रंग की फाइल लेकर बाहर निकलते नजर आईं। TMC सुप्रीमो ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि वे भी ‘ED vs Mamata’ की तर्ज पर भाजपा के पार्टी कार्यालयों पर इसी तरह की छापेमारी करवाने लगें, तो राजनीतिक व्यवस्था का क्या हाल होगा, इसलिए अब भी समय है कि प्रधानमंत्री अपने गृह मंत्री को नियंत्रित करें और एजेंसियों को चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल करना बंद करें। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि आप तृणमूल कांग्रेस से सचमुच लड़ना चाहते हैं तो लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव में हमें हराइए, न कि हमारे कागजात, डेटा, चुनावी रणनीतियां और मतदाताओं की जानकारी जब्त कर ‘ED vs Mamata’ की लड़ाई को प्रशासनिक दमन में बदल दीजिए।

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ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एजेंसियों के जरिये TMC के वोट बैंक को कमजोर करने की कोशिशों का नतीजा उलटा पड़ेगा और जो सीटें भाजपा को मिलने की उम्मीद थी, वे शून्य के करीब सिमट जाएंगी, क्योंकि बंगाल के मतदाता इस टकराव को केवल कानून-व्यवस्था नहीं बल्कि लोकतंत्र बनाम बदले की राजनीति के रूप में देख रहे हैं। >भाजपा ने सोशल मीडिया मंच X पर पलटवार करते हुए लिखा कि ED vs Mamata प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पश्चिम बंगाल में छिपाने जैसा कुछ नहीं है तो एक ‘सिटिंग चीफ मिनिस्टर’ इतनी हड़बड़ी में क्यों पार्टी के दस्तावेज और हार्ड डिस्क खुद लेकर जा रही हैं, जबकि वही सामग्री कानूनी जांच का हिस्सा होनी चाहिए। पार्टी ने अपने पोस्ट में ममता बनर्जी के घटनास्थल पर ‘क्लूलेस और ब्रीथलेस’ अंदाज में पहुंचने को ‘डैमेज कंट्रोल’ से ज्यादा ‘डीपर कॉन्सपिरेसी’ का संकेत बताया और पूछा कि एक निजी संगठन के दफ्तर, जहां आधिकारिक तलाशी चल रही हो, वहां से फाइलें और डिजिटल रिकॉर्ड इस तरह हटाना जांच प्रक्रिया पर सीधा दबाव बनाने के समान है या नहीं।

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