कांग्रेस को 48 साल पुराना लुटियंस कार्यालय Akbar Road खाली करने का निर्देश

48 साल पुराना कांग्रेस मुख्यालय Akbar Road, अब खाली करने का आदेश।

कांग्रेस को लुटियंस कार्यालय खाली करने का आदेश मिल गया है। सरकारी निर्देश के अनुसार, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को अपने 48 साल पुराने ऐतिहासिक मुख्यालय 24, अकबर रोड को शनिवार तक खाली करना होगा। कांग्रेस के स्रोतों ने बताया कि कांग्रेस को लुटियंस कार्यालय खाली करने का आदेश राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है। पिछले साल पार्टी ने कोटला मार्ग पर नया मुख्यालय इंदिरा भवन का उद्घाटन किया था, लेकिन अकबर रोड का बंगला अभी भी खाली नहीं हुआ है और वहां पार्टी गतिविधियां जारी हैं।

कांग्रेस को लुटियंस कार्यालय खाली करने का यह निर्देश रायसीना रोड पर स्थित भारतीय यूथ कांग्रेस के कार्यालय संख्या 5 के लिए भी लागू है। पार्टी स्रोतों के मुताबिक, कांग्रेस इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि कुछ राहत मिल सके। सोनिया गांधी द्वारा पिछले साल नए मुख्यालय इंदिरा भवन के उद्घाटन के दौरान कई वरिष्ठ नेता ने कहा था कि अकबर रोड कार्यालय से उनका भावनात्मक लगाव हमेशा बना रहेगा। यह बंगला इतिहास से जुड़ा हुआ है। ब्रिटिश राज के दौरान वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो के कार्यकारी परिषद के सदस्य सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास स्थान रहा था।

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अकबर रोड बंगले का ऐतिहासिक महत्व

कांग्रेस को लुटियंस कार्यालय खाली करने का आदेश के बीच इस बंगले की दीवारें इतिहास से भीगी हुई हैं। 1960 के दशक में यह म्यांमार की भारत राजदूत डॉ खिन क्यी का आवास था। उनकी बेटी आंग सान सू ची, जो बाद में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता बनीं, ने यहां कई साल बिताए। लेकिन इस बंगले का सबसे शानदार अध्याय 1970 के अंत में शुरू हुआ। 1977 के चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी में विभाजन हो गया। इंदिरा गांधी ने अलग गुट का नेतृत्व किया और नए कार्यालय की जरूरत पड़ी। राज्यसभा सांसद जी वेंकटस्वामी, इंदिरा गांधी के वफादार, ने अपना अकबर रोड बंगला उपलब्ध कराया।

इस बंगले ने कांग्रेस के शानदार पुनरुत्थान की गवाही दी। यह राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और फिर डॉ मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री काल में मुख्यालय रहा। जगह की मांग बढ़ने पर बंगले का विस्तार भी किया गया, जब तक कांग्रेस को नया पता इंदिरा भवन नहीं मिला। कांग्रेस को लुटियंस कार्यालय खाली करने का आदेश इस ऐतिहासिक स्थल को नई भूमिका दे सकता है। पार्टी कार्यकर्ता भावुक हैं, लेकिन नया मुख्यालय आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यह घटना राजनीतिक बहस को हवा देगी।

Disclaimer: यह समाचार लेख विभिन्न ऑनलाइन स्रोतों और समाचार एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के संकलन पर आधारित है।

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