भारत–ओमान FTA डील: 10.5 अरब डॉलर के व्यापार पर बड़ा असर, अमेरिका को लग सकता है झटका

भारत–ओमान FTA डील साइनिंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां लगातार टैरिफ को अपना सबसे बड़ा हथियार बताते रहे, वहीं भारत–ओमान FTA डील भारत के लिए नई रणनीतिक बढ़त साबित हो सकती है। इस समझौते से भारत पर आयात शुल्क की मार कुछ हद तक कम होने के साथ-साथ व्यापारिक संतुलन बेहतर करने का मौका मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर ओमान पहुंचे हैं, जहां मस्कट में उनका भव्य स्वागत किया गया। इस यात्रा के दौरान भारत–ओमान FTA डील पर हस्ताक्षर किए जाने की तैयारी है, जिसमें दोनों देशों की शीर्ष नेतृत्व स्तर पर अहम बातचीत होगी। मस्कट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक इस समझौते को अंतिम रूप देंगे, जिसका उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना है।

भारत–ओमान FTA डील से व्यापार में नई रफ्तार

भारत–ओमान FTA डील के तहत दोनों देशों के बीच टैरिफ बाधाओं को घटाने पर फोकस रहेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलने की उम्मीद है। अभी तक अमेरिका की टैरिफ नीतियां भारत के लिए चुनौती रही हैं, लेकिन ओमान के साथ यह नई व्यवस्था भारत को वैकल्पिक बाज़ार और बेहतर शर्तें उपलब्ध करा सकती है।

भारतीय कारोबारियों के लिए नए अवसर

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार यह डील भारतीय उद्योगों और कारोबारियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी। उनके मुताबिक जूते, कपड़े, ज्वेलरी, कृषि उत्पाद, वाहन, ऑटो पार्ट्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में व्यापार तेज़ी से बढ़ने की संभावना है। उन्होंने ओमान को अफ्रीका और मध्य एशिया के लिए “एंट्री गेट” बताया, यानी यहां से भारत के उत्पाद इन क्षेत्रों के देशों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

फिलहाल भारत और ओमान के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 10.5 अरब डॉलर के आसपास है, जिसमें भारत का निर्यात करीब 4 अरब डॉलर और ओमान से आयात 6 अरब डॉलर से अधिक है। भारत–ओमान FTA डील लागू होने के बाद इन आंकड़ों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है, खासकर उन सेक्टरों में जहां टैरिफ घटने से कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी।

कौन–कौन से उत्पादों में होगा फायदा

भारत फिलहाल ओमान से मुख्य रूप से पेट्रोलियम और यूरिया आयात करता है, जो कुल आयात का लगभग 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। इसके बदले भारत ओमान को खनिज ईंधन, केमिकल, अनाज, जहाज, बिजली से जुड़ी मशीनें, चाय, कॉफी, मसाले, कपड़े और विभिन्न खाद्य उत्पाद निर्यात करता है।

भारत–ओमान FTA डील के बाद इन वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क में कमी से उत्पादों की कीमत कम हो सकती है और मांग बढ़ने की संभावना मजबूत होगी। इससे भारतीय निर्माताओं को उत्पादन बढ़ाने, नए बाज़ारों में पैर जमाने और लॉन्ग–टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट करने में मदद मिलेगी, जबकि ओमान को भरोसेमंद सप्लाई पार्टनर के रूप में भारत का साथ मिलेगा।

आर्थिक रिश्तों में लगातार मजबूती

पिछले कुछ वर्षों में भारत और ओमान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत होते रहे हैं, जिसका प्रमाण द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2023–24 में दोनों देशों के बीच व्यापार 8.94 अरब डॉलर रहा, जबकि 2022–23 में यह 12.38 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। साल 2023 में भारत ने ओमान से करीब 4 हजार करोड़ रुपये का कच्चा तेल खरीदा, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ओमान की अहमियत को और बढ़ाता है। भारत–ओमान FTA डील इस ऊर्जा साझेदारी को और संस्थागत रूप दे सकती है, जिससे लंबी अवधि के समझौतों और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।

GCC देशों में ओमान की खास भूमिका

ओमान खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए भारत–ओमान FTA डील का असर केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर लॉजिस्टिक और टैरिफ संरचना के जरिए भारतीय सामान अन्य GCC देशों तक भी अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर पहुंच सकते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ओमान ने वर्ष 2006 में अमेरिका के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया था और अब लगभग 20 साल बाद भारत के साथ यह बड़ा समझौता होने जा रहा है। ऐसे में ओमान के लिए भारत–ओमान FTA डील उसकी बहु–दिशात्मक व्यापार नीति को और संतुलन देगी, जबकि भारत के लिए यह अमेरिकी टैरिफ दबाव से आंशिक राहत का विकल्प बन सकती है।

लॉजिस्टिक एक्सेस और रणनीतिक महत्व

ओमान अकेला ऐसा खाड़ी देश है जिसके साथ भारत का लॉजिस्टिक एक्सेस एग्रीमेंट मौजूद है, जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को अलग पहचान देता है। वर्ष 2018 में हुए इस समझौते के तहत भारतीय नौसेना और वायुसेना ओमान के अहम रणनीतिक बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों का उपयोग कर सकती हैं।

भारत–ओमान FTA डील इस लॉजिस्टिक सहयोग को आर्थिक साझेदारी के साथ जोड़कर एक व्यापक स्ट्रैटेजिक फ्रेमवर्क तैयार कर सकती है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मौजूदगी और मजबूत होगी, वहीं ओमान को भी एक बड़े साझेदार के रूप में भारत से निवेश, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा सहयोग का लाभ मिलेगा, जिससे अमेरिका समेत अन्य देशों की भूमिका पर भी नया संतुलन बन सकता है।

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