भारत नक्सल हिंसा से मुक्त: अमित शाह की संसद में बड़ी घोषणा
भारत नक्सल हिंसा से मुक्त: अमित शाह की ऐतिहासिक घोषणा
भारत नक्सल हिंसा से मुक्त हो चुका है। यह घोषणा लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने की। उन्होंने कहा कि देश में नक्सलवाद अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर, जो नक्सलवाद का अंतिम गढ़ था, अब विकास के पथ पर अग्रसर है। सरकार ने 31 मार्च तक नक्सल हिंसा उन्मूलन का लक्ष्य रखा था, जिससे पहले लोकसभा में इस विषय पर चर्चा हुई।
अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा, “भारत नक्सल हिंसा से मुक्त है। पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने पर देश को सूचित किया जाएगा, लेकिन मैं कह सकता हूं कि हम नक्सल मुक्त हो चुके हैं।” उन्होंने बस्तर में नक्सलवाद के लगभग समाप्त होने की बात कही। वहां हर गांव में स्कूल खोलने का अभियान चलाया गया। हर गांव में राशन दुकानें खोली गईं। प्रत्येक तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड वितरित किए गए, जिससे वे पांच किलोग्राम अनाज प्राप्त कर रहे हैं।
बस्तर में विकास की नई शुरुआत
अमित शाह ने कहा कि बस्तर के लोग ‘लाल आतंक’ की छाया के कारण पिछड़ गए थे, इसलिए विकास उन तक नहीं पहुंचा। आज वह छाया हट चुकी है और बस्तर विकास के मार्ग पर है। जो लोग संवाद की बात करते हैं, उन्हें शाह ने बस्तर के मंचों से बार-बार कहा है- हथियार डाल दो, सरकार तुम्हारा पुनर्वास करेगी। लेकिन वे हथियार नहीं छोड़ते। सरकार की नीति स्पष्ट है- हथियार डालने वालों से संवाद, हिंसा चुनने वालों को कड़ा जवाब।
चर्चा के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच एक नया मोर्चा खुला। सत्ताधारी दल के सदस्यों ने कांग्रेस के 60 वर्ष के शासन को नक्सलवाद फैलने का जिम्मेदार ठहराया। शाह ने बताया कि नक्सल हिंसा से 20,000 युवाओं की जान गई और 12 करोड़ लोग प्रभावित हुए। कांग्रेस सरकार की विफलता के कारण आदिवासी और अन्य समुदाय विकास से वंचित रहे।
कांग्रेस शासन की नाकामी
उन्होंने कहा, “पिछले 75 वर्षों में कांग्रेस ने 60 वर्ष शासन किया। फिर आदिवासी समुदाय विकास से क्यों वंचित रहे? पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश में नक्सलवाद कश्मीर और पूर्वोत्तर की मिलिटेंसी से बड़ा खतरा है, फिर भी कुछ नहीं किया गया।” भारत नक्सल हिंसा से मुक्त होने के साथ ही विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।

