बड़ा रक्षा बढ़ावा: अप्रैल अंत तक भारत को मिलेगा चौथा S-400 मिसाइल सिस्टम, 400 किमी रेंज वाला
S-400 मिसाइल सिस्टम भारत की वायु रक्षा को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान कर रहा है। भारतीय वायुसेना की एक टीम रूस पहुंची है, जो चौथे S-400 मिसाइल सिस्टम का निरीक्षण कर रही है। यह सिस्टम अप्रैल अंत तक भारत पहुंचने की उम्मीद है और इसे पश्चिमी क्षेत्र में तैनात किया जाएगा।
S-400 मिसाइल सिस्टम की तैनाती और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता
भारतीय सशस्त्र बलों ने S-400 मिसाइल सिस्टम का भरपूर उपयोग ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया था। मई 2025 में इस सिस्टम ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों, ड्रोनों और जासूसी विमानों को सफलतापूर्वक ध्वस्त किया। उदाहरण के लिए, S-400 की लंबी दूरी वाली मिसाइल ने पाकिस्तान के पंजाब में 314 किलोमीटर दूर एक बड़े बॉडी वाले विमान को नष्ट कर दिया। इसके बाद रावलपिंडी ने अपने सभी ऑपरपरेशनल विमानों को अफगानिस्तान और ईरान सीमा के पास स्थित एयरबेस पर स्थानांतरित कर दिया।
लाहौर, रावलपिंडी, सियालकोट और पासरूर में पाकिस्तानी रडार स्थलों पर हमलों के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना 9-10 मई को दिखाई ही नहीं दी। इसका कारण था आдамपुर और भुज क्षेत्रों में तैनात S-400 मिसाइल सिस्टम का भय। यह सिस्टम 400 किलोमीटर की रेंज के साथ हवाई खतरों से देश की रक्षा करता है।
चौथा और पांचवां S-400 सिस्टम: तैनाती की योजना
चौथा S-400 मिसाइल सिस्टम राजस्थान में तैनात होने की संभावना है। पांचवां सिस्टम इस साल नवंबर तक तैयार हो जाएगा। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हाल ही में पांच अतिरिक्त रूसी मूल के S-400 त्रियम्फ वायु रक्षा सिस्टम को मंजूरी दी है। इससे भारत में कुल 10 S-400 इकाइयां होंगी।
2018 में भारत ने रूस से सरकारी स्तर पर पांच इकाइयों का ऑर्डर दिया था। DAC की मंजूरी के बाद अतिरिक्त सिस्टमों के लिए सरकारी सौदे की सभी औपचारिकताएं एक वर्ष के अंदर पूरी हो जाएंगी। भारतीय वायुसेना ने पहले भी पांच अतिरिक्त S-400 के साथ पैंटसिर शॉर्ट-रेंज सिस्टम की मांग की थी। ये सिस्टम ड्रोनों और कमिकेजे ड्रोनों के खिलाफ प्रभावी हैं तथा दो-स्तरीय रक्षा प्रणाली में एकीकृत हो सकते हैं।
भारत की रक्षा खरीद प्रक्रिया: कड़े नियंत्रण
भारत की रक्षा खरीद प्रक्रिया में सख्त निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कई चरण होते हैं। यह स्टेटमेंट ऑफ केस से शुरू होती है, जिसमें ऑपरेशनल जरूरत और खरीद का औचित्य बताया जाता है। फिर रक्षा खरीद बोर्ड द्वारा परीक्षा होती है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा सचिव करते हैं। उसके बाद DAC से नेसेसिटी ऑफ एक्सेप्टेंस मिलती है। लागत वार्ता, वित्तीय मंजूरी और अंत में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से अंतिम स्वीकृति मिलती है।
यह प्रक्रिया रक्षा सौदों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है। S-400 मिसाइल सिस्टम न केवल सीमा पर हवाई खतरों से निपटेगा, बल्कि देश की समग्र वायु रक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

