भारत अमेरिका ट्रेड डील: डोभाल का कड़ा रुख, टैरिफ घटकर 18% पर समझौता
भारत अमेरिका ट्रेड डील: कूटनीति से बदला समीकरण
भारत अमेरिका ट्रेड डील को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की वाशिंगटन यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों में नया मोड़ ला दिया। सितंबर 2025 में हुई इस अहम मुलाकात में डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत किसी दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है, लेकिन व्यापार समझौते के लिए सकारात्मक बातचीत जारी रखना चाहता है। यह बैठक ऐसे समय हुई जब दोनों देशों के रिश्ते टैरिफ और तीखी बयानबाजी के कारण तनावपूर्ण बने हुए थे। सूत्रों के अनुसार डोभाल ने कहा कि भारत अमेरिका ट्रेड डील आपसी सम्मान और समानता पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जताया कि भारत ट्रंप प्रशासन की सार्वजनिक आलोचनाओं से असहज है और रिश्तों को पटरी पर लाने के लिए माहौल शांत होना जरूरी है। अगस्त में अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाने से व्यापार प्रभावित हुआ था और भारतीय निर्यातकों को भारी झटका लगा था।
डोभाल-रुबियो मुलाकात से बदला माहौल
बैठक के कुछ ही दिनों बाद संबंधों में नरमी के संकेत दिखने लगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई दी और उनके काम की सराहना की। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच कई फोन वार्ताएं हुईं, जिनमें भारत अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने पर चर्चा तेज हुई। वर्ष के अंत तक दोनों देशों ने टैरिफ कम करने और व्यापार बढ़ाने पर सहमति की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर ली। सोमवार को ट्रंप ने घोषणा की कि भारत पर लगाए गए शुल्क घटाकर 18% कर दिए जाएंगे। साथ ही रूसी तेल खरीदने पर लगाया गया 25% दंडात्मक शुल्क भी हटा लिया गया। बदले में भारत ने अमेरिकी उत्पादों की बड़ी खरीद, ऊर्जा आयात में विविधता और कुछ आयात शुल्क शून्य करने पर सहमति जताई। हालांकि आधिकारिक दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन इसे भारत अमेरिका ट्रेड डील की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
रणनीतिक साझेदारी और भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को पूंजी, तकनीक और रक्षा सहयोग के लिए अमेरिका की जरूरत है, जबकि अमेरिका के लिए भारत एशिया में एक अहम रणनीतिक साझेदार है। चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए दोनों देशों का सहयोग महत्वपूर्ण हो गया है। इसी वजह से नई दिल्ली ने दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देते हुए संबंध सुधारने की नीति अपनाई। हाल के महीनों में अमेरिकी कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश की घोषणाएं की हैं। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियां डेटा सेंटर और एआई सेक्टर में अरबों डॉलर निवेश कर रही हैं। इससे भारत के विनिर्माण और डिजिटल इकोनॉमी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत अपने निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा अमेरिका को भेजता है, इसलिए यह साझेदारी आर्थिक रूप से भी बेहद अहम है। हालांकि भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए यूरोपीय संघ और अन्य देशों के साथ भी व्यापार समझौते किए हैं, लेकिन अमेरिका के साथ संबंध सुधारना उसकी प्राथमिकता बनी हुई है। जानकारों के मुताबिक यह समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी है और आने वाले वर्षों में व्यापार तथा निवेश को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है। कुल मिलाकर, भारत अमेरिका ट्रेड डील ने कूटनीति और विश्वास के जरिए तनाव को अवसर में बदलने का उदाहरण पेश किया है।

