अजित पवार के निधन के बाद NCP में सुनेत्रा पवार के नेतृत्व की मांग तेज

सुनेत्रा पवार डिप्टी CM पद की शपथ से पहले शरद पवार ने जल्दबाज़ी पर सवाल उठाए।

अजित पवार निधन के बाद NCP में सुनेत्रा पवार नेतृत्व की मांग तेज हो गई है, जिससे पार्टी के भविष्य और सत्ता समीकरणों को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।

अजित पवार निधन के बाद NCP में सुनेत्रा पवार नेतृत्व की मांग पर राजनीतिक हलचल

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और NCP के प्रभावशाली नेता अजित पवार के अचानक हुए विमान हादसे में निधन के बाद पूरे राज्य की राजनीति में शोक और सन्नाटा फैल गया है। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बुधवार को बारामती में राज्य सम्मान के साथ किया गया, जहां भारी भीड़ और शीर्ष नेताओं की उपस्थिति ने उनके कद को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया। इसी पृष्ठभूमि में अब अजित पवार निधन के बाद NCP में सुनेत्रा पवार नेतृत्व की मांग खुलकर सामने आने लगी है, जिसे लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर गहन मंथन शुरू हो गया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, अजित पवार के निधन के बाद औपचारिक चर्चा तीन दिन के राजकीय शोक के खत्म होने के बाद ही शुरू होगी, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं ने पहले ही अपनी राय स्पष्ट कर दी है। अजित पवार न केवल उपमुख्यमंत्री थे बल्कि वित्त विभाग जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय भी संभाल रहे थे, इसलिए उनकी अनुपस्थिति से सरकार और पार्टी, दोनों में नेतृत्व का बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। इसी खालीपन को भरने के लिए अजित पवार निधन के बाद NCP में सुनेत्रा पवार नेतृत्व की मांग को एक स्वाभाविक राजनीतिक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

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सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम और पार्टी चीफ बनाने की आवाज

NCP के वरिष्ठ नेता और मंत्री नर्हरी जिरवाल ने खुले तौर पर कहा कि कार्यकर्ताओं और जनता के बीच “वहिनी” सुनेत्रा पवार के पक्ष में व्यापक समर्थन बन रहा है। उनके अनुसार, कई लोगों ने यह इच्छा जताई है कि सुनेत्रा पवार को मुख्यधारा की राजनीति में लाकर जिम्मेदारी सौंपी जाए और यह मत पार्टी नेतृत्व के सामने औपचारिक रूप से रखा जाएगा। इसी क्रम में NCP के उपाध्यक्ष सुरेश घुले ने कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और राज्य अध्यक्ष सुनील तटकरे को पत्र लिखकर सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम और NCP प्रमुख बनाए जाने की मांग रखी है और इस पर तुरंत बैठक बुलाने का सुझाव दिया है।

पूर्व मंत्री और हाल ही में नियुक्त NCP प्रवक्ता अनिल पाटिल ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी दो दशकों से पवार परिवार के नेतृत्व में काम कर रही है और अजित पवार के न रहने के बाद भी वही परंपरा जारी रखने के लिए तैयार है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सुनेत्रा पवार नेतृत्व संभालेंगी, तो उन्होंने विश्वास जताया कि उनके नाम का पार्टी में कोई भी नेता विरोध नहीं करेगा। इन बयानों से यह संकेत मजबूत हुआ है कि अजित पवार निधन के बाद NCP में सुनेत्रा पवार नेतृत्व की मांग केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक विकल्प के रूप में आकार ले रही है।

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नेतृत्व सूत्र पर मतभेद, तटकरे का नाम भी चर्चा में

हालांकि पार्टी के भीतर एक धड़ा ऐसा भी है, जो मानता है कि संगठन की कमान सुनेत्रा पवार को दी जा सकती है, लेकिन उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद किसी अनुभवी और लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले नेता को मिलने चाहिए। इस समूह की ओर से सुनील तटकरे के नाम पर जोर दिया जा रहा है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और करीब 15 साल तक मंत्री रहते हुए वित्त, जल संसाधन और ऊर्जा जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं। यह धड़ा तर्क दे रहा है कि सरकार में स्थिरता और प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए तटकरे जैसा अनुभवी चेहरा डिप्टी सीएम पद के लिए उपयुक्त रहेगा।

दूसरी ओर, NCP के कई नेता मानते हैं कि पार्टी की पहचान और जनाधार का बड़ा हिस्सा मराठा समुदाय से जुड़ा है और ऐसे में शीर्ष नेतृत्व किसी मराठा, विशेषकर पवार परिवार के सदस्य के हाथ में ही रहना चाहिए। NCP के 41 विधायकों में से लगभग आधे मराठा समुदाय से आते हैं, इसलिए सुनेत्रा पवार को नेतृत्व सौंपने की मांग सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी संदर्भ में अजित पवार निधन के बाद NCP में सुनेत्रा पवार नेतृत्व की मांग मराठा और पवार परिवार, दोनों प्रतीकों के संयोजन के रूप में देखी जा रही है।

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इसी बीच, NCP (शरदचंद्र पवार) गुट के वरिष्ठ नेता भी सुनेत्रा पवार से मुलाकात कर चुके हैं, जिससे दोनों गुटों के संभावित विलय की अटकलें फिर तेज हो गई हैं। जयंत पाटिल, राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे और पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख जैसे नेताओं की यह मुलाकात संकेत देती है कि अजित पवार की मृत्यु से पहले चल रही एकीकरण की बातचीत अब नए संदर्भ में दोबारा सामने आ सकती है। NCP (एसपी) नेता जयंत पाटिल ने खुलासा किया कि अजित पवार और उन्होंने दोनों गुटों के विलय को लेकर कई दौर की बैठकें की थीं, जिनमें यह तय हुआ था कि जिला परिषद चुनाव साथ मिलकर लड़े जाएंगे और नतीजों के बाद औपचारिक विलय की घोषणा की जाएगी। इसी बात की पुष्टि पूर्व मंत्री राजेश टोपे ने भी की, जिन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया लगभग तैयार थी और विलय की दिशा में गंभीर कदम उठाए जा रहे थे। लेकिन अब अजित पवार के असामयिक निधन से यह पूरा समीकरण बदल गया है और यह साफ नहीं है कि ये वार्ताएं पहले की तरह आगे बढ़ पाएंगी या नहीं।

NCP के वरिष्ठ नेता नर्हरी जिरवाल ने भी माना कि दोनों गुट पहले ही एकजुट होने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे और पार्टी तथा कार्यकर्ता अब बंटे रहने का कोई मतलब नहीं देखते। उनका मानना है कि महाराष्ट्र की जनता भी चाहती है कि NCP एकजुट रहे और राज्य की राजनीति में स्थिरता का संदेश दे। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में बड़ा सवाल यह है कि यदि सुनेत्रा पवार को नया चेहरा बनाकर नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जाती है, तो क्या सुप्रिया सुले सहित दूसरे वरिष्ठ नेता इस व्यवस्था को स्वीकार करेंगे या नहीं। पार्टी के एक वरिष्ठ NCP (एसपी) नेता के अनुसार, पहले की योजना के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अजित पवार को और कार्यकारी अध्यक्ष का पद सुप्रिया सुले को मिलने वाला था। अब परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है और अजित पवार निधन के बाद NCP में सुनेत्रा पवार नेतृत्व की मांग के उभरने से यह प्रश्न और जटिल हो गया है कि क्या सभी पक्ष सुनेत्रा वहिनी के नेतृत्व पर सहमत होंगे या नहीं। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और फैसलों से ही यह स्पष्ट होगा कि NCP की कमान किसके हाथ में जाएगी और महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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