भारत तालिबान से जुड़ाव: रणनीतिक नीति, सुरक्षा सहयोग और कूटनीतिक प्रभाव

नई दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच हुई ऐतिहासिक बैठक।

भारत तालिबान से जुड़ाव को लेकर नई कूटनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहा है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को उजागर किया है। नई दिल्ली में हुई ऐतिहासिक बैठक ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया अध्याय खोला है और यह संकेत दिया है कि भारत अपनी अफगान नीति में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहा है।

भारत तालिबान से जुड़ाव की रणनीति

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत तालिबान से जुड़ाव का दृष्टिकोण तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:

मानवीय सहायता और सुरक्षा सहयोग

भारत अफगानिस्तान की जनता को आवश्यक मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। खाद्य सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा भी भारत की प्राथमिकता में है। अफगानिस्तान से आतंकवादी गतिविधियों को रोकना और सीमा पार आतंकवाद से निपटना दोनों देशों के लिए साझा चिंता है।

रणनीतिक हित और संतुलित नीति

मध्य एशिया से जुड़ाव और क्षेत्रीय स्थिरता भारत के दीर्घकालिक हितों के लिए आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत तालिबान को औपचारिक मान्यता दिए बिना व्यावहारिक जुड़ाव बनाए हुए है। यह नीति भारत को अफगान जनता के साथ संपर्क बनाए रखने, आपदा प्रतिक्रिया में तेजी दिखाने, आतंकवाद विरोधी खुफिया जानकारी साझा करने और क्षेत्रीय परियोजनाओं में भागीदारी का अवसर देती है।

लोगों से लोगों के बीच संबंध इस जुड़ाव की मजबूत नींव माने जा रहे हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते, शैक्षणिक आदान-प्रदान और व्यापारिक संबंध दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाते हैं। भारत में अफगान छात्रों की उपस्थिति, चिकित्सा सुविधाओं का उपयोग और व्यावसायिक अवसर इन संबंधों को और गहरा करते हैं।

यह नीति दर्शाती है कि भारत व्यावहारिक राजनीति और दीर्घकालिक रणनीतिक सोच के साथ अपनी विदेश नीति को आकार दे रहा है। भारत तालिबान से जुड़ाव बिना औपचारिक मान्यता के भारत को अफगानिस्तान में अपने हितों की रक्षा करने और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देने का अवसर प्रदान करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति भविष्य में भारत को अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और विकास में सक्रिय भूमिका निभाने में मदद करेगी, जबकि आतंकवाद और अस्थिरता के खतरों से निपटने में भी सहायक होगी।

अधिक जानकारी के लिए देखें: संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट

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