ई-कॉमर्स पर कैश ऑन डिलीवरी शुल्क पर सख्ती
ई-कॉमर्स पर कैश ऑन डिलीवरी शुल्क को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने ई-कॉमर्स कंपनियों को चेतावनी दी है कि कैश ऑन डिलीवरी (COD) पर अतिरिक्त शुल्क वसूलना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। सरकार इस मामले में कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार है।
उपभोक्ता शिकायतों पर कार्रवाई
उपभोक्ता मामलों के विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स कैश ऑन डिलीवरी शुल्क वसूल रहे हैं। मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस प्रथा को “डार्क पैटर्न” करार दिया है जो उपभोक्ताओं को भ्रमित करता है और उनका शोषण करता है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे मामलों पर कोई समझौता नहीं होगा।
विस्तृत जांच और सरकार का दृष्टिकोण
मंत्री ने कहा कि इस मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है और ई-कॉमर्स पर कैश ऑन डिलीवरी शुल्क वसूलने वाली कंपनियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह पहल सरकार की उपभोक्ता-केंद्रित नीति और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता को दर्शाती है। सरकार का मानना है कि डिजिटल कॉमर्स में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना आवश्यक है।
सरकार का यह कदम उन लाखों उपभोक्ताओं को राहत देगा जो ऑनलाइन खरीदारी के दौरान कैश ऑन डिलीवरी विकल्प चुनते हैं लेकिन अतिरिक्त शुल्क से परेशान रहते हैं। ई-कॉमर्स पर कैश ऑन डिलीवरी शुल्क को समाप्त करने की दिशा में यह निर्णय डिजिटल व्यापार को अधिक भरोसेमंद बनाएगा।
नोट: उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अनुचित शुल्क की शिकायत उपभोक्ता हेल्पलाइन या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर करें।

