टी20 वर्ल्ड कप में संजू सैमसन की 97* नाबाद पारी, गौतम गंभीर की वर्ल्ड क्लास तारीफ

एडन गार्डन्स पर संजू सैमसन की शानदार 97* नाबाद पारी।

टी20 वर्ल्ड कप हीरो संजू सैमसन ने एडन गार्डन्स मैदान पर 97 रनों की नाबाद पारी खेली, जो उनके करियर का एक ऐतिहासिक पल साबित हुआ। जब वे 97* पर नाबाद लौटे, तो उन्होंने इसे बड़े शब्दों में सजाया नहीं। बस इतना कहा, “यह मेरे जीवन का एक महान दिन है।” भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ 195 रनों का लक्ष्य मिला था, जो क्वार्टर फाइनल जैसा मुकाबला था। हारने का मतलब टूर्नामेंट का अंत, जीतने का सेमीफाइनल का रास्ता।  संजू सैमसन ने न सिर्फ चेज पूरा किया, बल्कि इसे पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया। उनकी यह पारी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप में भारत की किसी सफल चेज में सर्वाधिक स्कोर बन गई, जो विराट कोहली के 2016 और 2022 के 82* नाबाद को पीछे छोड़ चुकी है।

टी20 वर्ल्ड कप हीरो संजू सैमसन का सफर

टूर्नामेंट की शुरुआत में संजू सैमसन पहले विकेट पर भारत की पहली पसंद नहीं थे। टूर्नामेंट से ठीक पहले हुई फेरबदल के बावजूद उन्हें इंतजार करना पड़ा। जरूरी जीत वाले मैचों की श्रृंखला ने ही उन्हें शीर्ष पर मौका दिया। कभी-कभी करियर चुपचाप मोड़ लेता है- एक चयन यहां, एक बातचीत वहां। इस बार मौका दबाव के साथ आया, और संजू ने इसे नियंत्रण से संभाला। उन्होंने चेज को शांत आत्मविश्वास से खेला- जरूरत पर सिंगल लिए, इनफील्ड से बाउंड्री निकालीं, और गियर बदले बिना रफ्तार बढ़ाई। कोई जंगली शॉट्स नहीं, कोई हताशा नहीं, बस साफ-सुथरे क्रिकेट शॉट्स। बाद में उन्होंने बताया कि कोहली और रोहित शर्मा को देखकर टी20 चेज की गति सीखी। एडन गार्डन्स पर यह सीख दिखी। उन्होंने पल का पीछा नहीं किया, पल खुद उनके पास आया। यह आईपीएल और टी20आई में पहली बार था जब संजू ने ओपनिंग की और सफल चेज में नाबाद रहे।

अनिश्चय से अधिकार तक का सफर

टी20 वर्ल्ड कप हीरो संजू सैमसन पर मुख्य कोच गौतम गंभीर का भरोसा हमेशा अटल रहा। मैच के बाद उन्होंने कहा, “वह वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी है। हम सब जानते हैं कि संजू में कितनी क्वालिटी है। जरूरत थी उन्हें बैकिंग देने की और आत्मविश्वास का। जब टीम को सबसे ज्यादा उनकी जरूरत पड़ी, उन्होंने अपना पूरा दमखम दिखाया।” संजू ने पहले लीन पैच झेला था। उन्हें बाहर किया गया, सवाल उठे- निरंतरता, भूमिका और स्वभाव पर। गंभीर का नजरिया अलग था। “कभी-कभी दबाव से खिलाड़ी को अलग कर स्पेस देना जरूरी होता है। हम हमेशा उनके टैलेंट को जानते थे। वर्ल्ड कप मैच में मौका मिला, तो उन्होंने कमाल कर दिया।” इसमें इंसानी फैसला था- पीछे हटना बजाय जोर डालने के, समय पर भरोसा करना। जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने लय की झलक दी, वेस्टइंडीज के खिलाफ इसे साबित कर दिया।

शांत चेज और टीम प्रयास

क्वार्टर फाइनल जैसे मुकाबले में 195 रनों का चेज जल्दी बिखर सकता था, लेकिन नहीं बिखरा। गंभीर मानते हैं कि बड़े टूर्नामेंट मानसिकता से जीते जाते हैं। “कौशल एक हफ्ते में नहीं सुधरता। दबाव सोखना जरूरी है।” संजू शुरू से ही सहज दिखे। रन रेट बढ़ने पर भी कोई घबराहट नहीं। सूर्यकुमार के साथ साझेदारी ने चीजें संभालीं, अंतिम तेजी नियंत्रित लगी। भारत ने जल्दी खत्म करने की जिद नहीं की, खेल में बने रहने पर फोकस किया। गंभीर ने जोर दिया, “यह टीम स्पोर्ट है। शिवम के दो बाउंड्री संजू के 97* जितने महत्वपूर्ण। बड़ी योगदान सुर्खियां बनाते हैं, छोटी जीत दिलाती हैं।” संजू के लिए यह सिर्फ 97 रन नहीं, वैलिडेशन था- धैर्य, बैकिंग और लय लौटने के विश्वास का। भारत अब वानखेड़े पर इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में। चुनौती कठिन, स्पॉटलाइट तेज। लेकिन कोलकाता की इस रात टी20 वर्ल्ड कप हीरो संजू सैमसन स्टैंड-इन ओपनर या प्लान बी नहीं लगे। वे ऐसे लगे जैसे अपना पल ढूंढ लिया और संभाल लिया।

Disclaimer: यह समाचार लेख विभिन्न ऑनलाइन स्रोतों और समाचार एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के संकलन पर आधारित है।

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