IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: ACB ने दो पूर्व कर्मचारियों समेत चार गिरफ्तार, ₹46 करोड़ की हेराफेरी

IDFC बैंक घोटाला में ACB गिरफ्तारी, हरियाणा पुलिस

IDFC बैंक घोटाला में हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ा खुलासा किया है। मंगलवार रात को ACB ने चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें IDFC फर्स्ट बैंक के दो पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय शामिल हैं। अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और उसके भाई अभिषेक सिंगला भी हिरासत में हैं। इन पर सरकारी फंड्स की अनधिकृत ट्रांजेक्शन और जालसाजी का आरोप है।

विकास एवं पंचायत विभाग ने अकाउंटिंग मिसमैच पकड़ने के बाद आंतरिक जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि स्वाति और अभिषेक ने ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ नाम की कंपनी बनाकर फंड्स डायवर्ट किए। ACB अधिकारी बोले, “हम कोर्ट से इनकी कस्टडी लेंगे ताकि गहन पूछताछ हो सके।” IDFC फर्स्ट बैंक के सीनियर अधिकारी 16 फरवरी 2026 को जांच समिति के समक्ष पेश हुए थे, लेकिन उन्होंने अब तक स्टेटमेंट नहीं दिया।

IDFC बैंक घोटाले में फर्जी चेक और ₹46 करोड़ की हेराफेरी

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक द्वारा प्रोसेस किए गए चेक और डेबिट नोट्स पर तत्कालीन डीजी डीके बेहेरा के फर्जी सिग्नेचर थे, जबकि उन्होंने 28 अक्टूबर 2025 को चार्ज छोड़ा था। एक चेक पर आंकड़ों में ₹2.50 करोड़ लिखा था, लेकिन शब्दों में ‘पच्चीस रुपये’, फिर भी बैंक ने इसे क्लियर कर दिया। IDFC फर्स्ट बैंक के स्टेटमेंट से साफ है कि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के अकाउंट में ₹46.56 करोड़ ट्रांसफर हुए। AU बैंक ने जांच के लिए दस्तावेज नहीं दिए, जो गैर-सहयोगी रवैया दर्शाता है।

ट्रांजेक्शन हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और पंचकुला म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन से भी जुड़े मिले। यह सब मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना 2.0 के सरकारी अकाउंट्स से जुड़ा है। ACB ने सोमवार को पंचकुला थाने में FIR दर्ज की, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 316(5), 318(4), 336(3), 338, 340(2) व 61(2) लगाईं। जांच ₹590 करोड़ के अन्य संदिग्ध ट्रांजेक्शन तक फैलेगी।

बैंक खातों की खुलासा और फंड्स का दुरुपयोग

11 फरवरी को गठित जांच समिति ने पाया कि 26 सितंबर 2025 को IDFC फर्स्ट और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में अकाउंट खोले गए। वित्त विभाग के 12 जुलाई 2024 के निर्देश पर ₹50 करोड़ IDFC को और ₹25 करोड़ AU को ट्रांसफर हुए। लेकिन फंड्स के उपयोग की कोई मंजूरी नहीं ली गई। 10 दिसंबर 2025 को सिग्नेचर अपडेट का अनुरोध किया गया। 13 जनवरी 2026 को अकाउंट बंद करने के आदेश पर AU ने ₹25.45 करोड़ लौटाए, लेकिन IDFC ने सिर्फ ₹1.27 करोड़। विभाग ने आपत्ति जताई। IDFC बैंक घोटाला ने बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों को उजागर किया है।

यह मामला सरकारी फंड्स की सुरक्षा पर सवाल उठाता है। ACB की जांच जारी है, जो अन्य विभागों तक पहुंच सकती है। नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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