घरेलू आलोचना के बीच मुहम्मद यूनुस ने विदाई भाषण में चीन, India’s 7 Sisters उठाईं
मुहम्मद यूनुस का विदाई भाषण: चीन, India’s 7 Sisters घरेलू आलोचना के बीच मुहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में चीन का जिक्र कर India’s 7 Sisters को निशाना बनाया। बांग्लादेश के पूर्व मुख्य सलाहकार ने राष्ट्रवादी बयानबाजी से संप्रभुता पर जोर दिया।
मुहम्मद यूनुस ने विदाई भाषण में बार-बार कहा कि बांग्लादेश ने अपनी विदेश नीति में संप्रभुता, गरिमा और स्वतंत्रता हासिल कर ली है। वे अब दूसरों के निर्देशों पर निर्भर नहीं रहेंगे। यह बयान दिल्ली के प्रति इशारा माना जा रहा है। भाषण राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर आया, जब घरेलू मोर्चे पर लोकतंत्र बहाली और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में नाकामी की आलोचना हो रही थी। शेख हसीना के सत्तावादी शासन (authoritarian rule) के बाद 2024 की सड़क विद्रोह ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ दी, खासकर हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े।
भारत विरोधी बयानबाजी
मुहम्मद यूनुस ने नेपाल, भूटान और India’s 7 Sisters का जिक्र कर आर्थिक एकीकरण की बात की। उन्होंने कहा, हमारा खुला समुद्र सिर्फ सीमा नहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था का द्वार है। नेपाल, भूटान और India’s 7 Sisters के साथ आर्थिक क्षेत्र, व्यापार समझौते और ड्यूटी-फ्री बाजार से हम वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन सकते हैं। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को स्वतंत्र देशों के साथ जोड़कर उन्होंने राजनीतिक सीमाओं को धुंधला करने की कोशिश की। यह नई दिल्ली को उकसाने वाला लगता है। भारत ने वर्षों से बांग्लादेश के रास्ते उत्तर-पूर्व को जोड़ने में निवेश किया है, लेकिन यूनुस ने इसे उलट दिया।
चीन कारक और सैन्य आधुनिकीकरण
मुहम्मद यूनुस ने चीन, जापान, अमेरिका और यूरोप से गहरे संबंधों पर जोर दिया। तीस्ता नदी परियोजना और नीलफामारी में 1000 बेड अस्पताल का जिक्र किया, जो भारत के सिलिगुड़ी गलियारे के पास है। भारत इसे संदेह से देखता रहा है। उन्होंने सैन्य आधुनिकीकरण की बात की, किसी आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए। यह संप्रभुता की बात के साथ कठोर लगता है।
हालांकि, भाषण में घरेलू असफलताओं पर कोई जवाबदेही नहीं। सांप्रदायिक हिंसा, अल्पसंख्यक हिंदुओं पर मंदिरों पर हमले, चरमपंथी तत्वों पर कार्रवाई की कमी का जिक्र नहीं। 18 महीने के कार्यकाल को सुधार की कहानी बताया। आलोचक कहते हैं कि लोकतांत्रिक विश्वास और सुरक्षा बहाल करने का वादा अधूरा रहा। यूनुस का भाषण एकजुट करने वाला नहीं, बल्कि बचावात्मक लगता है। नोबेल विजेता ने अल्पसंख्यक सुरक्षा और लोकतंत्र पर सवाल छोड़ दिए।

