सेवा तीर्थ: नया पीएमओ परिसर, 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का केंद्र

सेवा तीर्थ नया पीएमओ परिसर

सेवा तीर्थ नया पीएमओ: 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का तीर्थ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ नया पीएमओ परिसर से अपने पहले संबोधन में इसे 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला सेवा स्थल बताया। उन्होंने कहा कि यह नया परिसर औपनिवेशिक मानसिकता से निर्णायक दूरी और आधुनिक भारत की उम्मीदों का प्रतीक है, जहां से विक्सित भारत का संकल्प और तेज गति से आगे बढ़ेगा। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन वे परिसर हैं जो किसी शासक या महाराजा की सोच नहीं, बल्कि भारत के नागरिकों के सपनों और अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। उनके अनुसार, इन भवनों में लिए जाने वाले हर निर्णय का केंद्र 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षाएं होंगी, न कि औपनिवेशिक शासन की दृष्टि। उन्होंने इस दिन को भारत की विकास यात्रा में नया इतिहास गढ़ने वाला क्षण बताया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब भी कोई अधिकारी या कर्मचारी इन भवनों में प्रवेश करे, तो वह यह सोचकर अपने दिन की शुरुआत करे कि उसका काम आम नागरिकों के जीवन को कितना आसान बनाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे कार्यालय केवल कामकाज की जगह नहीं, बल्कि प्रेरणा के केंद्र भी होने चाहिए, जहां से सेवा, कर्तव्य और सुशासन की भावना मजबूत हो।

सेवा तीर्थ नया पीएमओ परिसर में कौन-कौन से दफ्तर हैं?

सेवा तीर्थ अब नए प्रधानमंत्री कार्यालय यानी सेवा तीर्थ नया पीएमओ, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को एक ही परिसर में समेटता है। पहले ये सभी दफ्तर राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में फैले हुए थे, जिससे समन्वय, सुरक्षा और संचालन में अतिरिक्त समय और संसाधन लगते थे। अब इन तीनों महत्वपूर्ण संस्थानों को एकीकृत, आधुनिक और उच्च सुरक्षा वाले ढांचे में लाकर कामकाज को तेज, कुशल और नागरिक केंद्रित बनाने की कोशिश की गई है।
नया परिसर डिजिटल रूप से एकीकृत दफ्तरों, केंद्रीकृत रिसेप्शन और सुव्यवस्थित पब्लिक इंटरफेस जोन के साथ तैयार किया गया है, ताकि नीति-निर्माण, समन्वय और जनता से संवाद अधिक सुचारु हो सके। ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं के साथ यह भवन न केवल प्रशासनिक दृष्टि से, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी भविष्य के भारत की सोच को दर्शाता है।

कर्तव्य भवन 1 और 2 में प्रमुख मंत्रालय

सेवा तीर्थ के साथ जुड़े कर्तव्य भवन 1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, कॉरपोरेट कार्य, शिक्षा, संस्कृति, कानून और न्याय, सूचना और प्रसारण, कृषि और किसान कल्याण, रसायन और उर्वरक तथा जनजातीय कार्य जैसे कई प्रमुख मंत्रालयों के दफ्तर शामिल किए गए हैं। इन मंत्रालयों को एक विशाल और समेकित परिसर में स्थानांतरित करने से समन्वय, निर्णय प्रक्रिया और नीति क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें ब्रिटिश शासन की सोच के अनुरूप बनाई गई थीं, जहां सत्ता का केंद्र जनता से दूर था। इसके विपरीत, सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन ऐसे ढांचे हैं जो सेवा-प्रधान शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को बल देते हैं। उन्होंने इसे उस यात्रा की अगली कड़ी बताया, जिसमें राजपथ का नाम कर्तव्य पथ और अन्य प्रतिष्ठित स्थलों के नाम भी जन-केन्द्रित सोच के साथ बदले गए हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘विक्सित भारत’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि हमारी नीतियों, योजनाओं के साथ-साथ हमारे कार्यालय और भवन भी इसी दृष्टि को प्रतिबिंबित करने चाहिए। सेवा तीर्थ नया पीएमओ परिसर को उन्होंने ऐसी जगह बताया, जहां से लिए गए निर्णय न केवल प्रशासनिक सुधार को गति देंगे, बल्कि आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाएंगे। उन्होंने इसे लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए दिव्य प्रेरणा और सामूहिक संकल्प का स्थान बताया।

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