मुंबई की नई मेयर रीतू तावड़े: 25 साल बाद बीजेपी का परचम, शिवसेना के संजय घाड़ी बने डिप्टी मेयर
मुंबई की नई मेयर रीतू तावड़े: बीएमसी में नया राजनीतिक अध्याय
मुंबई की नई मेयर रीतू तावड़े ने महानगर की राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है, क्योंकि 25 साल बाद यह पद शिवसेना के बजाय किसी अन्य पार्टी के हाथ में गया है और अब यह जिम्मेदारी भाजपा के पास है। इस बदलाव के साथ ही मुंबई में सत्ता संतुलन और नगर निगम की नीतियों पर दूरगामी असर पड़ने की संभावना दिखाई दे रही है। रीतू तावड़े का चयन भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से बृहन्मुंबई महानगरपालिका में मेयर पद पर शिवसेना का dominion रहा है। अब जब यह पद भाजपा की ओर गया है, तो शहर के नागरिकों की उम्मीदें नगर सेवाओं, आधारभूत संरचना और प्रशासनिक सुधारों में तेज़ी देखने की हैं। नई मेयर रीतू तावड़े एक वरिष्ठ भाजपा पार्षद हैं, जिन्हें पहली बार 2017 में घाटकोपर के वार्ड नंबर 121 से पार्षद के रूप में चुनकर भेजा गया था। स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहकर उन्होंने क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं, शिक्षा और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर काम किया और इसी अनुभव ने उन्हें महानगर स्तर की जिम्मेदारी के लिए तैयार किया।
शिक्षा क्षेत्र में उनकी भूमिका भी उल्लेखनीय रही है, क्योंकि मुंबई की नई मेयर रीतू तावड़े ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका की शिक्षा समिति की चेयरपर्सन के रूप में कार्य किया है। इस पद पर रहते हुए उन्होंने नगर निगम द्वारा संचालित स्कूलों की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सुविधाओं और शैक्षणिक माहौल में सुधार के लिए पहल की, जिससे वे संगठन के भीतर एक सक्रिय और परिणामोन्मुख नेता के रूप में उभरीं।
मेयर रीतू तावड़े के कार्यकाल को विशेष इसलिए भी माना जा रहा है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका देश की सबसे समृद्ध और प्रभावशाली नगर निकायों में से एक है, जो शहर की सड़कों, जल आपूर्ति, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित अनेक महत्वपूर्ण सेवाओं का प्रबंधन करती है। ऐसे में मेयर के रूप में उनकी भूमिका केवल औपचारिक न होकर नीति निर्माण और क्रियान्वयन के स्तर पर भी महत्वपूर्ण होगी। उधर, शिवसेना के संजय शंकर घाड़ी को मुंबई का डिप्टी मेयर नियुक्त किया गया है, जो दहिसर के पार्षद हैं और स्थानीय स्तर पर सक्रिय राजनीतिक चेहरा रहे हैं। गठबंधन की राजनीति और नगर निगम की कार्यशैली के संदर्भ में डिप्टी मेयर के रूप में उनकी भूमिका, मेयर के साथ समन्वय स्थापित करने और निगम की बैठकों तथा समितियों में संतुलन बनाने में अहम मानी जा रही है।
रीतू तावड़े और डिप्टी मेयर संजय शंकर घाड़ी की जोड़ी को भाजपा और शिवसेना के बीच वर्तमान राजनीतिक समीकरणों का प्रतीक भी माना जा रहा है, जहां नगर निगम स्तर पर साझेदारी के जरिए प्रशासनिक स्थिरता और स्थानीय विकास को प्राथमिकता देने की कोशिश दिख रही है। यह संयोजन शहर के विभिन्न हिस्सों में चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं को गति देने तथा नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान में भी सहायक हो सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई की नई मेयर रीतू तावड़े के लिए सबसे बड़ी चुनौती शहर की जटिल शहरी समस्याओं—जैसे ट्रैफिक जाम, जलभराव, झुग्गी पुनर्विकास, प्रदूषण और आधारभूत ढांचे के दबाव—का संतुलित और दीर्घकालिक समाधान तैयार करना होगा। इसके साथ ही, उन्हें निगम की वित्तीय पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और नागरिकों के साथ संवाद बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी ठोस पहल करनी होगी।
रीतू तावड़े से यह अपेक्षा भी की जा रही है कि वे शिक्षा समिति की पूर्व अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभव का उपयोग करते हुए नगर निगम स्कूलों के आधुनिकीकरण, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति योजनाओं और बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान देंगी। यदि इन क्षेत्रों में ठोस नीतिगत फैसले लिए जाते हैं, तो महानगर की अगली पीढ़ी के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण बन सकता है और नगर निगम की छवि भी मजबूत होगी। डिप्टी मेयर के रूप में संजय शंकर घाड़ी से अपेक्षा है कि वे पश्चिमी उपनगरों, विशेषकर दहिसर और आसपास के इलाकों की समस्याओं पर फोकस बढ़ाएंगे और इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निगम प्रशासन के साथ तालमेल रखेंगे। मेयर और डिप्टी मेयर की संयुक्त भूमिका से उम्मीद की जा रही है कि मुंबई के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम—सभी हिस्सों में संतुलित विकास और समन्वित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।

