Bitcoin गिरावट: कीमत 63,295 डॉलर पर, 2 ट्रिलियन डॉलर वैल्यू गायब
Bitcoin गिरावट: क्रिप्टो मार्केट में 2 ट्रिलियन डॉलर वैल्यू साफ
Bitcoin गिरावट ने वैश्विक क्रिप्टो मार्केट को जोरदार झटका दिया है, जहां पिछले कुछ दिनों में निवेशकों की जोखिम लेने की भूख कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। Bitcoin गिरावट के ताज़ा दौर में दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी की कीमत 63,295.74 डॉलर के निचले स्तर तक फिसल गई, जो अक्टूबर 2024 के बाद सबसे कमजोर स्तर है और इसने बाजार में गहरी चिंता पैदा कर दी है। हालिया सत्र में Bitcoin गिरावट इतनी तीव्र रही कि एक ही दिन में इसकी कीमत करीब 12.6% टूटकर लगभग 63,525 डॉलर के आसपास आ गई, जिससे यह नवंबर 2022 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट बन गई। पिछले 24 घंटों में लगभग 1 बिलियन डॉलर के बिटकॉइन पोज़िशन जबरन लिक्विडेट हो गए, जो यह संकेत देता है कि उच्च लेवरेज पर लिए गए दांव तेजी से साफ हो रहे हैं और कई ट्रेडर मजबूरी में अपनी होल्डिंग बेच रहे हैं।
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क्रिप्टो मार्केट से 2 ट्रिलियन डॉलर वैल्यू गायब
CoinGecko के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2024 की शुरुआत में जब क्रिप्टो मार्केट लगभग 4.379 ट्रिलियन डॉलर के शिखर पर था, तब से अब तक करीब 2 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू मिट चुकी है। सिर्फ पिछले एक महीने में ही लगभग 800 बिलियन डॉलर का नुकसान देखने को मिला है, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि Bitcoin गिरावट के साथ-साथ व्यापक क्रिप्टो मार्केट में भी तेज बिकवाली हावी है।
साल की शुरुआत से अब तक बिटकॉइन में लगभग 28% तक की गिरावट दर्ज हो चुकी है और मौजूदा सप्ताह में ही इसकी कीमत लगभग 17% फिसली है। दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी ईथर की स्थिति भी बेहतर नहीं रही, जिसकी कीमत एक कारोबारी सत्र में 13% से अधिक गिरकर लगभग 1,854 डॉलर के आसपास पहुंच गई, जबकि इस सप्ताह में इसकी कुल गिरावट 19% और पूरे वर्ष की बात करें तो लगभग 38% तक नुकसान दर्ज हो चुका है।
क्रिप्टो मार्केट में यह भारी दबाव उस समय दिख रहा है जब कीमती धातुओं और वैश्विक इक्विटी बाजारों में भी उथल-पुथल जारी है। सोना और चांदी जैसे धातु ऊंचे लेवरेज और सट्टे की वजह से अधिक अस्थिर हो गए हैं, जहां चांदी की कीमत एक स्तर पर लगभग 18% तक गिरकर 72.21 डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गई। इसी बीच, अमेरिकी इक्विटी इंडेक्स S&P 500 सात सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया, जबकि Nasdaq दो महीने से अधिक के सबसे निचले स्तर पर फिसल गया, खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों में बिकवाली के कारण।
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ETF आउटफ्लो, नीतिगत अनिश्चितता और ‘कैपिटुलेशन मोड’
कई बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि Bitcoin गिरावट के इस चरण में क्रिप्टो मार्केट तथाकथित ‘कैपिटुलेशन मोड’ में प्रवेश कर चुका है, जहां निवेशक बड़े पैमाने पर नुकसान स्वीकार करते हुए पोज़िशन बंद कर रहे हैं। एक प्रमुख क्रिप्टो विश्लेषण मंच से जुड़े कंपनी एक्सपर्ट का कहना है कि पिछले चक्रों को देखें तो यह सिर्फ अल्पकालिक करेक्शन नहीं, बल्कि डिस्ट्रीब्यूशन से रीसेट फेज में संक्रमण जैसा है, जो आमतौर पर कुछ सप्ताह नहीं बल्कि कई महीनों तक चल सकता है।
ताज़ा गिरावट का असर सिर्फ टोकन प्राइस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिटकॉइन और अन्य डिजिटल एसेट्स होल्ड करने वाली सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी जा रही है। इससे यह आशंका बढ़ी है कि क्रिप्टो मार्केट का यह झटका व्यापक वित्तीय बाजारों, खासकर टेक सेक्टर और ग्रोथ स्टॉक्स में जोखिम धारणा को और कमजोर कर सकता है।
कुछ विश्लेषकों के अनुसार, हाल में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के तौर पर एक पूर्व गवर्नर को चुने जाने की संभावना ने भी क्रिप्टो मार्केट की बिकवाली को हवा दी है, क्योंकि उन्हें अपेक्षाकृत कड़ा रुख अपनाने वाला नीति-निर्माता माना जाता है। बाजार में यह धारणा है कि अगर फेड बैलेंस शीट को तेज़ी से घटाने की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो तरलता का सहारा कम होने से Bitcoin गिरावट और अन्य जोखिम भरे एसेट्स पर दबाव और बढ़ सकता है।
क्रिप्टोकरेंसी को लंबे समय से ढीली मौद्रिक नीति और बड़ी बैलेंस शीट का लाभार्थी माना गया है, जहां प्रचुर तरलता के दौर में सट्टा आधारित एसेट क्लास में निवेश तेजी से बढ़ता रहा। अब जब यह आशंका बढ़ रही है कि फेड बैलेंस शीट को छोटा कर सकता है और ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं, पारंपरिक निवेशक जोखिम भरे क्रिप्टो एसेट्स से दूरी बना रहे हैं।
एक प्रमुख वैश्विक बैंक के विश्लेषकों ने नोट में बताया कि अक्टूबर 2025 के डाउनटर्न के बाद से संस्थागत क्रिप्टो ETF से लगातार भारी निकासी हो रही है। उनके अनुसार, अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF में नवंबर में लगभग 7 बिलियन डॉलर, दिसंबर में करीब 2 बिलियन डॉलर और जनवरी में 3 बिलियन डॉलर से अधिक का आउटफ्लो दर्ज किया गया, जो यह दिखाता है कि पारंपरिक संस्थागत निवेशक धीरे-धीरे क्रिप्टो से पीछे हट रहे हैं और Bitcoin गिरावट का दबाव बढ़ा रहे हैं।
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विश्लेषकों का मानना है कि यह लगातार बिकवाली इस ओर इशारा करती है कि पारंपरिक निवेशकों की रुचि घट रही है और क्रिप्टो एसेट क्लास को लेकर व्यापक नकारात्मकता बढ़ रही है। इसके साथ ही, टेक सेक्टर में जारी कमजोरी ने भी बिटकॉइन और ईथर जैसे टोकन पर अतिरिक्त दबाव बनाया है, क्योंकि पिछले कई वर्षों से बिटकॉइन की कीमतें टेक शेयरों, खासकर एआई थीम से जुड़ी कंपनियों की चाल के साथ गहराई से जुड़ी रही हैं।
हालिया सप्ताह में वैश्विक सॉफ्टवेयर और टेक स्टॉक्स में भारी गिरावट ने क्रिप्टो टोकन की वैल्यू में भी तेज कमी की रफ्तार बढ़ा दी है। कुछ बाजार विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर कीमतों में यह गिरावट जारी रहती है, तो क्रिप्टो माइनिंग कंपनियों पर भी दबाव इतना बढ़ सकता है कि उन्हें अपनी होल्डिंग बेचने के लिए मजबूर होना पड़े और इससे ‘फोर्स्ड लिक्विडेशन’ का एक दुष्चक्र शुरू हो सकता है।
एक जानी-मानी ग्लोबल फाइनेंशियल फर्म के स्ट्रैटेजिस्ट का कहना है कि क्रिप्टो को हमेशा पोर्टफोलियो का बहुत छोटा हिस्सा ही रखना चाहिए, क्योंकि यह एसेट क्लास काफी अस्थिर है और खास तौर पर रिटेल निवेशकों के बीच इसकी पकड़ बहुत मजबूत है। ऐसे में Bitcoin गिरावट और व्यापक क्रिप्टो कमजोरी संपूर्ण बाजार जोखिम को बढ़ा सकती है, इसलिए निवेशकों के लिए जोखिम प्रबंधन और विविधीकरण पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

