ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र, ISS पर कदम रखने वाले पहले भारतीय ISRO अंतरिक्ष यात्री

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन ISS मिशन के लिए अशोक चक्र से सम्मानित भारत के अंतरिक्ष नायक।

शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र: ISS मिशन से जुड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र, भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य सम्मान से सम्मानित किया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर उनके ऐतिहासिक मिशन और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में असाधारण योगदान की औपचारिक मान्यता है।

भारतीय वायु सेना के टेस्ट पायलट और ISRO के गगनयान कार्यक्रम से जुड़े अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के माध्यम से नासा के केनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा से उड़ान भरकर ISS तक पहुंचकर नया इतिहास रचा। इस मिशन के साथ वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय ISRO अंतरिक्ष यात्री बने, जबकि अंतरिक्ष में जाने वाले कुल भारतीयों की सूची में वे दूसरे स्थान पर हैं और उनसे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने यह उपलब्धि हासिल की थी।



भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य सम्मान

अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य सम्मान है, जिसे युद्ध के अलावा असाधारण साहस, अद्वितीय वीरता, बहादुरी भरे कार्य या सर्वोच्च स्तर के आत्मबलिदान के लिए दिया जाता है। यह सम्मान शांतिकाल में प्रदान किए जाने वाले परम वीर चक्र के समकक्ष माना जाता है और इसे सशस्त्र बलों के जवानों के साथ-साथ नागरिकों को भी दिया जा सकता है।ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र प्रदान करने का निर्णय उनके उस साहस और जिम्मेदारी की भावना को सलाम करना है, जिसके साथ उन्होंने निजी रूप से आयोजित Axiom-4 मिशन में पायलट के रूप में भाग लेते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक का जटिल और जोखिम भरा अंतरिक्ष सफर सफलतापूर्वक पूरा किया। यह मिशन भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता और वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग में उसकी सक्रिय भूमिका का प्रतीक भी माना जा रहा है।
जून 2025 में लॉन्च हुए इस मिशन के तहत, स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान ने नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरकर लगभग 28 घंटे की यात्रा के बाद ISS से डॉक किया, जिसके बाद शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर प्रवेश किया और वे पृथ्वी की कक्षा में स्थित इस प्रयोगशाला तक पहुंचने वाले 634वें अंतरिक्ष यात्री बने। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ भारतीय वायु सेना और ISRO के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।



ISS मिशन और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर प्रभाव

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र मिलने से भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन कार्यक्रम को नई ऊर्जा और वैश्विक पहचान मिली है, क्योंकि यह मिशन गगनयान से जुड़ी भावी उड़ानों के लिए अनुभव, तकनीकी समझ और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करता है।[] अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर उनके प्रवास के दौरान सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण, मानव शरीर पर अंतरिक्ष के प्रभाव, और विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों से जुड़े डेटा ने भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए मूल्यवान जानकारी उपलब्ध कराई।ISS तक की यात्रा के दौरान उन्होंने जटिल डॉकिंग प्रक्रियाओं, कड़ी सुरक्षा प्रोटोकॉल और अंतरिक्ष यान के संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, जो किसी भी पायलट के लिए उच्चतम स्तर की पेशेवर क्षमता और मानसिक दृढ़ता की मांग करती हैं।ऐसी परिस्थितियों में शांत, केंद्रित और सटीक निर्णय क्षमता दिखाना ही वह विशेषता है, जिसके लिए अशोक चक्र जैसा सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य सम्मान प्रदान किया जाता है।ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र दिए जाने से देश के युवाओं और भावी वैज्ञानिकों के लिए प्रेरक संदेश गया है कि समर्पण, अनुशासन और विज्ञान के प्रति जुनून के साथ वे भी अंतरिक्ष जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में विश्व स्तर पर पहचान बना सकते हैं। साथ ही, यह सम्मान इस बात की भी पुष्टि करता है कि भारत अब अंतरिक्ष अन्वेषण की वैश्विक दौड़ में केवल दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय और अग्रिम पंक्ति का भागीदार है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मिशन को भारत की तकनीकी क्षमता, पेशेवर कौशल और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की बहादुरी, नेतृत्व क्षमता और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति समर्पण को मान्यता देते हुए शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र प्रदान किया जाना देश के सैन्य और वैज्ञानिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ता है।



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