दिल्ली फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के निकट ध्वस्तीकरण: MCD की देर रात कार्रवाई

दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास MCD द्वारा हाई कोर्ट के आदेश पर चलाए गए ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान बुलडोज़र, मलबा और पुलिस बल की तैनाती दिखाती हुई तस्वीर,

दिल्ली फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के निकट ध्वस्तीकरण विवाद क्या है?

दिल्ली फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले ने राष्ट्रीय राजधानी के पुरानी दिल्ली इलाके, खासकर तुर्कमान गेट और रामलीला मैदान के आसपास के क्षेत्र में अचानक तनाव का माहौल पैदा कर दिया, जहां नगर निगम दिल्ली (MCD) ने देर रात बुलडोज़र कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चलाई। जानकारी के अनुसार, फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के निकट स्थित कथित अतिक्रमित स्थल पर MCD ने बुधवार की देर रात और तड़के घंटों में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया, जो दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया आदेश के अनुपालन में किया गया था। इस कार्रवाई से पहले इलाके के लोगों के बीच हलचल मच गई, क्योंकि वीडियो में दिखाई दिया कि बुलडोज़र और अर्थ-मूविंग मशीनों से सौ साल पुरानी मस्जिद के कुछ हिस्सों के आसपास की संरचनाओं को तोड़ा जा रहा है और पुलिस बल बड़ी संख्या में तैनात है।

मौके से सामने आए अन्य वीडियो में देखा गया कि जैसे-जैसे ध्वस्तीकरण आगे बढ़ा, क्षेत्र में भीड़ जमा हो गई और कुछ समूहों ने सुरक्षा बलों की ओर पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और हालात को काबू में लाने की कोशिश की। इस दौरान दिल्ली पुलिस के कम से कम पांच जवानों के घायल होने की सूचना सामने आई, जबकि वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर नज़र रख रहे थे। दिल्ली फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाका नौ ज़ोनों में बांटा गया, हर ज़ोन की ज़िम्मेदारी अतिरिक्त उपायुक्त स्तर के अधिकारी को सौंपी गई और ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों तथा बॉडी-वॉर्न कैमरों की मदद से हर गतिविधि की रिकॉर्डिंग की गई ताकि बाद में उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।

मामले की कानूनी पृष्ठभूमि और हाई कोर्ट के आदेश

दिल्ली फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद ध्वस्तीकरण विवाद की जड़ें उस याचिका से जुड़ी हैं, जो मस्जिद सैयद फ़ैज़ इलाही की प्रबंध समिति ने हाई कोर्ट में दायर की है और जिसमें 22 दिसंबर 2025 को पारित MCD के आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश में निगम ने तय किया कि 0.195 एकड़ भूमि से अधिक क्षेत्र में मौजूद सभी संरचनाओं को अतिक्रमण माना जाएगा और उन्हें हटाया जा सकता है, क्योंकि मस्जिद की प्रबंध समिति या दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से स्वामित्व अथवा वैध कब्जे के पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं किए गए। ]

याचिका में तर्क दिया गया है कि संबंधित 0.195 एकड़ ज़मीन, जिस पर मस्जिद और उससे जुड़ा परिसर स्थित है, को वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया जा चुका है और वक्फ अधिनियम के तहत इस तरह के विवादों की सुनवाई और निपटारा केवल वक्फ ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि किसी अन्य प्राधिकरण के। प्रबंध समिति ने यह भी कहा कि वह इस संपत्ति का उपयोग लंबे समय से कर रही है और जमीन के लिए दिल्ली वक्फ बोर्ड को पट्टा किराया भी अदा किया जा रहा है, जबकि उसकी मुख्य आपत्ति खासतौर पर उसी भूमि पर संचालित कब्रिस्तान से जुड़ी है।

दूसरी ओर, MCD का कहना है कि उसका 22 दिसंबर 2025 का निर्णय खुद दिल्ली उच्च न्यायालय की 12 नवंबर 2025 की उस पीठ के आदेश की परिणति है, जिसमें नागरिक निकाय और लोक निर्माण विभाग (PWD) को तुर्कमान गेट के पास स्थित रामलीला मैदान की लगभग 38,940 वर्ग फुट भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए तीन माह का समय दिया गया था। उच्च न्यायालय में यह मामला सेव इंडिया फाउंडेशन नामक संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से पहुंचा था, जिसमें सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा और व्यावसायिक उपयोग का आरोप लगाया गया था।

ध्वस्तीकरण अभियान, स्थानीय विरोध और आगे की सुनवाई

कोर्ट के निर्देशों के बाद अक्टूबर 2025 में संबंधित प्राधिकरणों ने संयुक्त सर्वे कराते हुए क्षेत्र में मौजूद अतिक्रमणों का रिकॉर्ड तैयार किया, जिसमें यह दर्ज किया गया कि कई हिस्सों पर अवैध निर्माण हैं और कुछ भाग विभिन्न सार्वजनिक प्राधिकरणों के स्वामित्व में आते हैं। इसके बाद नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया अपनाई गई और 4 जनवरी को MCD अधिकारियों ने मौके पर जाकर अतिक्रमित क्षेत्रों को चिह्नित भी किया, जिस दौरान स्थानीय निवासियों के विरोध के चलते अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था करनी पड़ी। दिल्ली फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान MCD और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अमन समिति के सदस्यों तथा अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ कई समन्वय बैठकें कीं, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह और टकराव की स्थिति से बचा जा सके, लेकिन इसके बावजूद कुछ तत्वों द्वारा पथराव करने की कोशिश की गई, जिसके बाद न्यूनतम बल प्रयोग के साथ भीड़ को पीछे धकेलकर स्थिति सामान्य की गई। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सीसीटीवी और बॉडी-कैम फुटेज के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

इसी बीच, दिल्ली उच्च न्यायालय ने फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद से जुड़े विवाद पर कहा है कि मामला गंभीर विचार का विषय है और केंद्र के शहरी विकास मंत्रालय, MCD तथा दिल्ली वक्फ बोर्ड से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने याचिका को आगे की सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तारीख पर सूचीबद्ध किया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि दिल्ली फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद ध्वस्तीकरण से जुड़ा यह विवाद कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर आने वाले महीनों में भी सुर्खियों में रहने वाला है। वर्तमान परिस्थिति में स्थानीय समुदाय, नागरिक संगठन और प्रशासन सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत में रखे जाने वाले तर्क, वक्फ संपत्ति के दावों, सरकारी रिकॉर्ड और अतिक्रमण के आरोपों के बीच संतुलन कैसे स्थापित होगा और क्या मस्जिद एवं कब्रिस्तान से जुड़े हिस्सों पर दिल्ली फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद ध्वस्तीकरण से अलग कोई समाधान निकल सकेगा या नहीं।

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