CJI गवई ने किया जस्टिस सूर्यकांत की सिफारिश, होंगे भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश
जस्टिस सूर्यकांत: भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बनने की तैयारी
जस्टिस सूर्यकांत को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया है। वर्तमान CJI गवई ने अपनी सेवानिवृत्ति से पहले 23 नवंबर को उन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में सिफारिश की है। सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद, वे 24 नवंबर से भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश का पद संभालेंगे और फरवरी 2027 तक अपनी सेवाएं देंगे।
सीनियरिटी के आधार पर उत्तराधिकारी की सिफारिश
जानकारी के अनुसार, सीजेआई गवई जल्द ही जस्टिस सूर्यकांत को अपनी सिफारिश पत्र की प्रति सौंपेंगे। यह सिफारिश केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के पत्र के जवाब में की गई है, जिसमें उनसे परंपरा के अनुसार अपने उत्तराधिकारी का नाम बताने का अनुरोध किया गया था।
सीजेआई गवई ने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत “हर दृष्टि से योग्य और सक्षम हैं” और “संस्थान के प्रमुख के रूप में अमूल्य योगदान देंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “जस्टिस सूर्यकांत समाज के उस वर्ग से आते हैं जिसने संघर्षों का सामना किया है, जिससे वे न्याय की पीड़ा और संवेदनाओं को गहराई से समझ सकते हैं।”
जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक सफर
जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा से शीर्ष न्यायिक पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति होंगे। उनका करियर प्रशासनिक कुशलता और शैक्षणिक उत्कृष्टता से भरा रहा है। 38 वर्ष की उम्र में वे हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने और 2004 में 42 वर्ष की उम्र में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए।
न्यायपालिका में रहते हुए भी उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एलएल.एम. में प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 2019 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया।
जस्टिस सूर्यकांत अपनी विनम्रता, संतुलित स्वभाव और निष्पक्ष दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। वे जिला न्यायपालिका के प्रदर्शन की निगरानी और उच्च न्यायालयों में समानता बनाए रखने में भी अग्रणी रहे हैं।
सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद, वे 24 नवंबर को शपथ लेंगे। इसके साथ ही भारतीय न्यायपालिका में नेतृत्व का नया अध्याय शुरू होगा।

