भारत और Five Eyes: अजीत डोभाल की रणनीतिक खुफिया पहल
भारत और Five Eyes खुफिया सहयोग में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। भारत, जो अब तक दुनिया के सबसे विशिष्ट खुफिया गठबंधन Five Eyes के बाहर था, अब इस नेटवर्क के साथ बढ़ते रक्षा और खुफिया सहयोग की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इस ऐतिहासिक परिवर्तन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल की भूमिका अहम रही है।
भारत और Five Eyes गठबंधन क्या है?
Five Eyes दुनिया का सबसे पुराना और शक्तिशाली खुफिया साझेदारी नेटवर्क है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बना यह गठबंधन वैश्विक निगरानी, आतंकवाद विरोधी अभियानों और साइबर सुरक्षा में सहयोग करता आया है।
भारत के साथ बढ़ता सहयोग
हालांकि भारत अभी तक Five Eyes का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में भारत और Five Eyes देशों के बीच खुफिया एवं रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ द्विपक्षीय रक्षा और प्रौद्योगिकी समझौते इस दिशा में एक बड़ा कदम हैं। मार्च 2025 में घोषणा की गई कि भारत इन चार देशों के साथ किसी न किसी रूप में रक्षा सहयोग कर चुका है। यह भारत की रणनीतिक स्वीकार्यता का संकेत है।
अजीत डोभाल की रणनीतिक भूमिका
अजीत कुमार डोभाल, जो 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड में जन्मे, भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे हैं। वे इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व प्रमुख और वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उन्होंने भारत और Five Eyes गठबंधन में रणनीतिक पुल का काम किया है।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में ऑपरेशन ब्लैक थंडर, कश्मीर में गुप्त मिशन, पाकिस्तान में अंडरकवर ऑपरेशन और 2016 व 2019 की सर्जिकल स्ट्राइक में भूमिका शामिल है। जून 2024 में उन्हें तीसरी बार NSA नियुक्त किया गया। जनवरी 2025 में उन्होंने अमेरिकी NSA जेक सुलिवन से मुलाकात कर सुरक्षा साझेदारी को मजबूत किया। उन्होंने भारतीय एजेंसियों (R&AW, IB, NTRO, MI, DIA, NIA) के बीच समन्वय बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और प्रभावी बनाया है।
Five Eyes सहयोग के संभावित लाभ
भारत और Five Eyes सहयोग से आतंकवाद विरोधी अभियानों में रीयल-टाइम जानकारी साझा की जा सकेगी। साइबर सुरक्षा, सीमा पार अपराध और ड्रग ट्रैफिकिंग के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई संभव होगी। तकनीकी दृष्टि से उन्नत निगरानी प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सैटेलाइट डेटा का उपयोग बढ़ेगा। इंडो-पैसिफिक रणनीति में यह सहयोग चीन की आक्रामकता का जवाब देने में सहायक होगा। इसके अलावा आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार मार्गों की सुरक्षा भी सुदृढ़ होगी।
चुनौतियां और सावधानियां
Five Eyes का नेटवर्क व्यापक निगरानी के लिए जाना जाता है, जिससे गोपनीयता संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। भारत को रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी होगी। साथ ही कनाडा जैसे कुछ देशों के साथ तनावपूर्ण संबंधों को भी सुलझाना जरूरी होगा।
भविष्य की संभावनाएं और निष्कर्ष
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को औपचारिक सदस्यता से पहले सहयोगी देश का दर्जा मिल सकता है। जापान, जर्मनी और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ विस्तारित गठबंधन बन सकता है। भारत और Five Eyes सहयोग भारत की सुरक्षा और वैश्विक स्थिति दोनों को मजबूत करेगा। अजीत डोभाल की दूरदर्शिता ने भारत को एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है। आने वाले वर्षों में यह सहयोग और गहरा होगा, जो भारत के राष्ट्रीय हित में होगा।

